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सिमुलतला आवासीय विद्यालय : बिहार का ‘मिनी शिमला’ जो अब बन चुका है ‘टॉपर्स की फैक्ट्री’

बिहार बोर्ड की 10वीं कक्षा के रिजल्ट में इस बार भी सिमुलतला सिरमौर साबित हुआ। टॉप 10 में इस आवासीय विद्यालय से कुल 6 विद्यार्थियों ने अपना नाम दर्ज कराया। इस बार सिमुलतला के आदित्य कुमार ने बिहार विद्यालय परीक्षा समिति की मैट्रिक बोर्ड परीक्षा 2024 में राज्य भर में तीसरा स्थान प्राप्त किया। सिमुलतला आवासीय विद्यालय जमुई के छात्र रहे आदित्य कुमार ने 486 अंक हासिल किये। वहीं विक्की कुमार 483 अंक प्राप्त कर पांचवें स्थान पर रहे। मिताल और अमन कुमार ने 480-480 अंक प्राप्त कर नौवां स्थान हासिल किया, जबकि विक्की कुमार और सावन कुमार 479- 479 अंक प्राप्त कर दसवें स्थान पर रहे।

दरअसल, बिहार बोर्ड के मैट्रिक की परीक्षा में सिमुलतला का रिजल्ट हमेशा टॉप-10 में रहा है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के इस ड्रीम प्रोजेक्ट यानी सिमुलतला आवासीय विद्यालय की स्थापना नेतरहाट की तर्ज पर वर्ष 2010 में हुई थी और 2015 में यहां से फर्स्ट बैच ने मैट्रिक परीक्षा में भाग लिया था। पहले ही बैच में यहाँ के छात्रों ने सफलता का परचम लहरा दिया था। और तभी से इसे टॉपर्स की फैक्ट्री कहा जाने लगा। अपने प्रदर्शन से लगातार इस विद्यालय ने अपनी उपयोगिता को साबित भी किया है। साबित किया है कि इसे टॉपर्स की फैक्ट्री यूँ ही नहीं कहा जाता, बल्कि इसका वह हकदार भी है। इस बार भी मैट्रिक परीक्षा में इस विद्यालय का दबदबा बरकरार रहा।

उल्लेखनीय है कि बीते कुछ वर्षों में मैट्रिक परीक्षा में सिमुलतला विद्यालय का प्रदर्शन लगभग एक समान रहा है। विद्यालय की स्थापना के बाद पहले साल 2015 में विद्यालय से 108 छात्र परीक्षा में शामिल हुए थे तथा बिहार के कुल 31 बच्चों में 30 बच्चे इसी विद्यालय से थे। वर्ष 2016 में विद्यालय से 121 बच्चे शामिल हुए थे तथा पूरे बिहार में टॉप करने वाले सभी 42 बच्चे इसी विद्यालय के थे। इसके बाद 2017 में टॉप टेन में सिमुलतला विद्यालय से 12, 2018 में 17, 2019 में 16, 2020 में 30 तथा 2021 में 14 बच्चे टॉप टेन में शामिल हुए थे। वहीं बीते साल 2022 में सिमुलतला आवासीय विद्यालय से 5 बच्चे टॉप टेन में स्थान हासिल कर सके थे।

गुरुकुल विद्यालय की अवधारणा पर आधारित सिमुलतला विद्यालय एक को-एड यानी सह-शैक्षिक आवासीय विद्यालय है। उच्च गुणवत्ता वाली शिक्षा के लिए ख्यात है। यहां नामांकन प्रवेश परीक्षा के माध्यम से होता है और सभी वर्गों के लिए सीटें आरक्षित रहती हैं। स्कूल में कमजोर छात्रों के लिए एक अलग रेमेडियल यानी उपचारात्मक कक्षा का भी प्रावधान होता है। यहां ‘वन टीच वन’ के तहत सीनियर छात्र जूनियर को पढ़ाते हैं। यहां छात्रों को हर दिन 1 घंटा बोलकर पढ़ाया जाता है, जबकि गुरुकुल परंपरा के तहत खाना बनाने और साफ-सफाई का काम छात्र ही करते हैं। इतना ही नहीं कक्षा और छात्रावास में प्रत्येक 20 छात्रों पर 1 शिक्षक होता है, ताकि बच्चे की शिक्षा उचित ढंग से हो सके। बच्चों पर पूरा ध्यान दिया जाता है। यहां पढ़ाई तो अंग्रेजी माध्यम में होती है, लेकिन हिंदी और संस्कृत पर विशेष जोर दिया जाता है। बच्चों को कंप्यूटर, लाइब्रेरी के अलावा नियमित रूप से योग भी कराया जाता है। पढ़ाई के साथ-साथ बच्चों को सांस्कृतिक कार्यक्रम और फिल्में दिखाने की भी व्यवस्था है ताकि बच्चे पढ़ाई के साथ-साथ किसी भी क्षेत्र में पीछे न रहें।

यहां छठी क्लास में बच्चों का नामांकन होता है। इसके बाद से बच्चों को हर साल होम एग्जाम से गुजरना पड़ता है। होम एग्जाम बहुत टफ होता है। इस परीक्षा में किसी प्रकार की ढील नहीं दी जाती। होम एग्जाम का स्टैंडर्ड ऊंचा रखा जाता है ताकि बच्चों को बोर्ड की परीक्षा में आसानी हो। स्कूल के शिक्षक अपने स्तर से बच्चों की तैयारी कराते रहते हैं। क्लासरूम में डिस्कशन पर अधिक ध्यान दिया जाता है। बच्चों को खुद से प्रश्नों के उत्तर लिखने को प्रोत्साहित किया जाता है। शिक्षक उन्हें अपनी भाषा में उत्तर लिखने को कहते हैं। स्कूल के प्रिंसिपल का कहना है कि यहाँ बच्चों को सेल्फ स्टडी, गाइडेड स्टडी और ग्रुप स्डटी कराते हैं, जिससे वे किसी भी परीक्षा के लिए तैयार हो सकें। ग्रुप स्टडी और शिक्षकों की लगातार कोशिश बच्चों की सफलता का मूल मंत्र है। 

बहरहाल, बिहार के दक्षिण पूर्व अंतिम छोर पर जमुई जिले के सिमुलतला की पहचान में आज एक नाम सिमुलतला आवासीय विद्यालय का जरूर जुड़ गया है, लेकिन सिमुलतला की पुरानी पहचान भी रही है। इसे ‘मिनी शिमला’ के नाम से जाना जाता रहा है। अंग्रेजों के शासन काल से ही यहां सैलानियों का आना- जाना लगा रहा है। पर्यटन को लेकर यह स्थान खास था। हिल स्टेशन के रूप में पहचान रखने वाले सिमुलतला में एक समय साढ़े तीन सौ से अधिक बंगाली लोगों की कोठियां थीं। देश की आजादी के पहले जब कोलकाता ब्रिटिश हुकूमत का केंद्र था तो अक्सर बंगाली अधिकारी अपनी छुट्टियां मनाने यहीं आया करते थे। इन कोठियों में लोग हॉलिडे मनाते और स्वास्थ्य लाभ लेने के लिए आते थे। स्वामी विवेकानंद की तबीयत जब बिगड़ी थी तब उन्होंने भी यहां प्रवास किया था। सिमुलतला की वादियों और कोठियों में कई बंगाली और हिंदी फिल्म की शूटिंग भी हुई है। हालांकि कई कोठियां बिक गईं, लेकिन आज भी लगभग डेढ़ सौ ऐसी कोठियां यहाँ बची हैं। आज भी पहाड़ियों से घिरी वादियों के बीच सिमुलतला सबको भाता है। और अब तो सिमुलतला की एक और बड़ी पहचान बन गई है,  2010 में स्थापित सिमुलतला आवासीय विद्यालय। टॉपर्स की फैक्ट्री।

हालांकि स्वामी विवेकानंद की यात्रा के कारण उनके मानने वालों ने यहां पर रामकृष्ण मठ का भी निर्माण किया था। इसके अलावा पहाड़ियों के बीच हल्दिया झरना और पत्थर का बना सिकिटिया आश्रम भी है। सिमुलतला के पानी के बारे में कहा जाता है कि यहां हल्दिया झरना का पानी पेट के लिए लाभदायक है। इंसान कुछ भी खाता है कुछ ही देर में उसे फिर भूख लग जाती है। सिमुलतला हिल स्टेशन पर लालडेंगा हाउस भी आकर्षण का केंद्र है। बताया जाता है कि बांग्लादेश के नालडेंगा राजबाड़ी किले की तर्ज पर वहां के राजा ने लालडेंगा हाउस का निर्माण किया था, जो आज खंडहर है, बावजूद इसके वह आकर्षण का केंद्र है। बताया जाता है कि बांग्लादेश के नालडेंगा राजबाड़ी किले की तर्ज पर वहां के राजा ने लालडेंगा हाउस का निर्माण किया था, जो आज खंडहर है, बावजूद इसके वह आकर्षण का केंद्र है। 52 कमरों और 53 दरवाजे वाले इस किले की अपनी पहचान है, लेकिन उपेक्षित होने के कारण यह किला अब जमींदोज होने के कगार पर है।  
     

रईस अहमद 'लाली'

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