
फॉरेंसिक साइंस में करियर को लेकर लोगों का आकर्षण हाल के वर्षों में लगातार बढ़ता देखा जा रहा है। विशेषकर, मानव शरीर रचना विज्ञान में रुचि रखने वाले छात्रों के लिए तो यह करियर का सबसे बेहतर विकल्प बनकर उभरा है। एमबीबीएस जैसे कोर्सों में प्रवेश की अनिश्चितता और महंगी होती फीस भी विज्ञान के छात्रों को इस ओर मुखातिब कर रही है। वैसे फॉरेंसिक विज्ञान एक ऐसा विषय ही है जो अधिकांश लोगों को आकर्षित करता है, जब वे इसके बारे में पूरी तरह जान लेते हैं। दरअसल, यह विज्ञान और आपराधिक न्याय का प्रमुख अध्ययन है। कहें तो बहु-विषयक विषय। साथ ही जीवन से गहरा जुड़ा। तभी इसका दायरा लगातार बढ़ रहा है।
आखिर क्या है फॉरेंसिक साइंस?
फॉरेंसिक विज्ञान आपराधिक जांच और कानूनी समस्याओं के लिए वैज्ञानिक ज्ञान और कार्यप्रणाली का अनुप्रयोग है। फॉरेंसिक साइंस एक बहु-विषयक विषय है, जिसमें विज्ञान के विभिन्न क्षेत्रों, जैसे कि रसायन विज्ञान, जीव विज्ञान, भौतिकी, भूविज्ञान, मनोविज्ञान, सामाजिक विज्ञान, इंजीनियरिंग आदि शामिल हैं। फॉरेंसिक साइंस अनिवार्य रूप से एक अपराध प्रयोगशाला आधारित पेशा है। फॉरेंसिक विज्ञान किसी अपराध में हुई घटनाओं को दर्शाते हुए सटीक और उद्देश्यपूर्ण जानकारी प्रदान करने के लिए वैज्ञानिक तकनीक का अनुप्रयोग है।
फॉरेंसिक साइंस, भौतिक अपराधों और उसके सबूतों का विश्लेषण करने के लिए इस्तेमाल किया गया विज्ञान का एक अहम हिस्सा है। इसका उपयोग दुनियाभर में सार्वजनिक स्वास्थ्य की सुरक्षा, कानूनों और नियमों को लागू करने और नागरिक विवादों को हल करने के लिए किया जाता है। फॉरेंसिक विज्ञान अपराध को निष्कर्ष देने के लिए कई वैज्ञानिक और गणितीय तकनीकों का उपयोग करता है। फॉरेंसिक वैज्ञानिक स्थानीय, राज्य और सरकारी स्तरों के लिए काम करते हैं।
फॉरेंसिक साइंटिस्ट कैसे बनें
यह करियर उत्कृष्ट संचार कौशल वाले लोगों के लिए है, जो सूक्ष्तम विवरण नोटिस करने की क्षमता रखते हैं। एक फॉरेंसिक वैज्ञानिक या एक फॉरेंसिक विज्ञान विशेषज्ञ को कुशल होना चाहिए और वैज्ञानिक सबूत और डेटा की व्याख्या करने में रुचि होनी चाहिए।
फॉरेंसिक विज्ञान तकनीशियनों के पास आपराधिक जांच से संबंधित भौतिक साक्ष्य एकत्र करने, पहचानने, वर्गीकृत करने और विश्लेषण करने जैसे कौशल होने चाहिए। एक एस्पिरेंट के पास मजबूत तकनीकी कौशल, विश्लेषणात्मक कौशल, विज्ञान में विभिन्न क्षेत्रों की गहरी टिप्पणियों और ज्ञान होना चाहिए जो सबूत की पहचान करने में मदद करता है, अपराधी को गिरफ्तार करने और अपराध के बारे में पूछताछ करने के लिए महत्वपूर्ण जानकारी एकत्र करता है।
कोर्स और योग्यता
अंडरग्रेजुएट कोर्स (3 वर्ष): फोरेंसिक विज्ञान में बी.एससी
बैचलर डिग्री प्रोग्राम 3-4 साल का डिग्री प्रोग्राम है। पाठ्यक्रम में आपराधिक प्रक्रिया और साक्ष्य, अपराध पीड़ित अध्ययन, आपराधिक प्रक्रिया में संवैधानिक मुद्दे, फिंगरप्रिंट विश्लेषण, अपराध दृश्य जांच और अपराध कारणों के सिद्धांत आदि जैसे विषय शामिल हैं। फॉरेंसिक विज्ञान में स्नातक पाठ्यक्रम में शामिल होने के लिए आवेदक को अपने हाई स्कूल या डिप्लोमा पाठ्यक्रम में कम से कम 50 प्रतिशत अंक लाने जरूरी होते हैं।
स्नातकोत्तर पाठ्यक्रम (2 वर्ष): फॉरेंसिक साइंस में एम.एससी या पीजी डिप्लोमा
फॉरेंसिक विज्ञान में मास्टर डिग्री व्यक्तियों को फॉरेंसिक विज्ञान उद्योग के भीतर उन्नत पदों के लिए तैयार करती है। इसमें ड्रग विश्लेषण, आपराधिक, जैविक साक्ष्य, डीएनए विश्लेषण, ट्रेस साक्ष्य, रक्त छींटे और विष विज्ञान आदि जैसे मुख्य विषय शामिल हैं। ऐसे उम्मीदवार विभिन्न विभागों जैसे क्राइम लैब, पुलिस विभाग, और सरकारी एजेंसियों जैसे ड्रग एनफोर्समेंट एडमिनिस्ट्रेशन, हॉस्पिटल लैब, मेडिकल परीक्षक कार्यालय और दवा कंपनियों में वरिष्ठ स्तर की नौकरियां पा सकते हैं।
डॉक्टोरल कोर्स (3 वर्ष): फॉरेंसिक साइंस में पीएच.डी. या एम.फिल
अगर कोई व्यक्ति लेक्चरर की नौकरी चाहता है या अनुसंधान के लिए जाना चाहता है या फिर फॉरेंसिक विज्ञान में किसी भी प्रकार के उन्नत नेतृत्व के पदों का विकल्प चुनता है तो उसके लिए डॉक्टरेट की डिग्री अनिवार्य है। मुख्य विषयों में फॉरेंसिक इंस्ट्रूमेंटल एनालिसिस, एडवांस फॉरेंसिक, फिजिकल एविडेंस कॉन्सेप्ट, कंट्रोल्ड सब्सटेंस एनालिसिस, फॉरेंसिक लेबोरेटरी मैनेजमेंट और रिसर्च डिजाइन फॉरेंसिक साइंस, पैटर्न और लॉ एंड फॉरेंसिक साइंसेज शामिल हैं। एक अभ्यर्थी फॉरेंसिक विज्ञान के क्षेत्र में फॉरेंसिक बायोलॉजी, फॉरेंसिक सेरोलॉजी, फॉरेंसिक केमिस्ट्री, फॉरेंसिक टॉक्सिकोलॉजी, फॉरेंसिक बैलेस्टिक, फॉरेंसिक एंटोमोलॉजी, फॉरेंसिक वनस्पति विज्ञान आदि क्षेत्रों में अपना विशेषज्ञता पाठ्यक्रम कर सकता है।
एमबीबीएस पृष्ठभूमि के साथ फॉरेंसिक साइंटिस्ट बनना भी संभव है। एमबीबीएस खत्म करने के बाद छात्र फॉरेंसिक साइंस में एमडी कर सकते हैं।
भारत में शीर्ष फॉरेंसिक विज्ञान कॉलेज
– एफएस भारतीय शिक्षा विभाग, पुणे
– लेडी हार्डिंग मेडिकल कॉलेज, नई दिल्ली
– अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान, नई दिल्ली
– डॉ. बीआर अम्बेडकर विश्वविद्यालय, आगरा
– इंस्टीट्यूट आॅफ फॉरेंसिक साइंस, मुंबई
– लोकनायक जयप्रकाश नारायण नेशनल इंस्टीट्यूट आॅफ क्रिमिनोलॉजी एंड फॉरेंसिक साइंस, नई दिल्ली
– इंस्टीट्यूट आॅफ फॉरेंसिक साइंसेज (गुजरात फॉरेंसिक साइंसेज यूनिवर्सिटी), गांधीनगर
– साइबर फॉरेंसिक और सूचना सुरक्षा केंद्र (मद्रास विश्वविद्यालय), चेन्नई
– गवर्नमेंट इंस्टीट्यूट आॅफ फॉरेंसिक साइंस, औरंगाबाद
– सैम हिगिनबॉटम इंस्टीट्यूट आॅफ एग्रीकल्चर, टेक्नोलॉजी और साइंसेज, इलाहाबाद
– सेंट जेवियर्स कॉलेज (मुंबई विश्वविद्यालय), मुंबई
– इंस्टीट्यूट आॅफ फॉरेंसिक साइंस एंड क्रिमिनोलॉजी (पंजाब यूनिवर्सिटी), चंडीगढ़
– उस्मानिया विश्वविद्यालय, हैदराबाद
करियर और जॉब्स
अपराध दर और अपराधियों की संख्या में वृद्धि के कारण, फॉरेंसिक विज्ञान का दायरा तेजी से बढ़ रहा है। फॉरेंसिक साइंस के क्षेत्र में नौकरी के बहुत सारे अवसर हैं। पूरे विश्व में, विशेषकर भारत में, फॉरेंसिक वैज्ञानिकों की आवश्यकता बहुत बड़ी है। कुछ फॉरेंसिक वैज्ञानिक वस्तुओं को लेकर विश्लेषण करने के लिए अपराध स्थल पर जाते हैं और वस्तुओं पर विश्लेषण करने के लिए फॉरेंसिक प्रयोगशाला में काम करते हैं।
सरकारी क्षेत्र में फॉरेंसिक वैज्ञानिकों को लगाया जा सकता है। वे विभिन्न कानून प्रवर्तन एजेंसियों और जांच विभागों जैसे पुलिस, राज्य और केंद्र सरकार और कानूनी प्रणाली की जांच सेवाओं में काम करते हैं। इनमें इंटेलिजेंस ब्यूरो (कइ), केंद्रीय जांच ब्यूरो (उइक), फॉरेंसिक साइंस लैब्स (केंद्र सरकार), अस्पताल, कानूनी संस्था, पुलिस विभाग, गुणवत्ता नियंत्रण ब्यूरो, बैंक, विश्वविद्यालय, रक्षा/सेना आदि शामिल हैं।
जॉब प्रोफाइल
फॉरेंसिक विज्ञान के क्षेत्र में कुछ शीर्ष पदनाम हैं:
– इनवेस्टिगेटिव अधिकारी
– फोरेंसिक एक्सपर्ट
– फोरेंसिक वैज्ञानिक
– अपराध दृश्य अन्वेषणकर्ता
– शिक्षक / प्रोफेसर
– क्राइम रिपोर्टर
– फोरेंसिक इंजीनियर
– कानून सलाहकार
– लिखावट विशेषज्ञ




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