
समाचार उत्पादन और गलत सूचना में एआई के उपयोग के बारे में वैश्विक चिंताएं बढ़ रही हैं। यह दावा रॉयटर्स इंस्टीट्यूट फॉर द स्टडी ऑफ जर्नलिज्म द्वारा प्रकाशित एक रिपोर्ट में किया गया है। यह रिपोर्ट समाचार उद्योग के लिए एक बड़ी चुनौती है, जो पहले से ही दर्शकों को आकर्षित करने के लिए संघर्ष कर रही है।
रॉयटर्स इंस्टीट्यूट द्वारा प्रकाशित इस रिपोर्ट की प्रमुख बात यह है कि अर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी एआई द्वारा संचालित की गई खबरें सिर्फ गूगल के डाटा पर आधारित होती हैं जो कभी भी पाठकों को भ्रामक सूचना पहुंचा सकती हैं। रिपोर्ट में 47 देशों के लगभग एक लाख लोगों से सर्वेक्षण किया गया है।
सर्वेक्षण के अनुसार, 52% अमेरिकी उत्तरदाताओं और 63% यूके उत्तरदाताओं ने कहा कि वे ज्यादातर एआई के साथ उत्पादित समाचारों से असहज होंगे। रिपोर्ट में प्रत्येक देश में 2,000 लोगों का सर्वेक्षण किया गया, जिसमें पाया गया कि उपभोक्ता पत्रकारों के काम को और अधिक कुशल बनाने के लिए एआई के उपयोग के साथ अधिक सहज नहीं हैं।
रॉयटर्स इंस्टीट्यूट के वरिष्ठ शोध सहयोगी और डिजिटल न्यूज रिपोर्ट के प्रमुख लेखक निक न्यूमैन ने इसमें कहा है, “लोगों के एआई के इस्तेमाल के लिए इस तरह शक करना आश्चर्यजनक था। अधिकतर लोगों को यह डर था कि इस तरह की सामग्री की विश्वसनीयता और भरोसे का भविष्य क्या हो सकता है।’’
गौरतलब है कि ऑनलाइन झूठी समाचार सामग्री के बारे में चिंताए पिछले वर्ष की तुलना में तीन प्रतिशत अंक बढ़ गई है। इस सर्वे के 59% उत्तरदाताओं ने कहा कि वे इससे चिंतित थे। रिपोर्ट में कहा गया है कि दक्षिण अफ्रीका और अमेरिका में यह आंकड़ा क्रमशः 81% और 72% अधिक था, क्योंकि दोनों देशों में इस साल चुनाव होने हैं।




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