
बांग्लादेश में आरक्षण के मुद्दे पर भड़की हिंसा के बीच बड़ी संख्या में वहां के अलग-अलग कॉलेजों में पढ़ रहे भारतीय छात्र स्वदेश लौट रहे हैं। अब तक 4500 से अधिक छात्रों की वापसी हो चुकी है, जो बांग्लादेश में अशांति के बाद वहां फंसे हुए थे। और सिर्फ भारतीय ही नहीं, पड़ोसी देश नेपाल, भूटान और मालदीव के भी छात्र अच्छी खासी तादाद में भारत वापस आए हैं। वे मौजूदा हालात में अपने घर लौटने में असमर्थ थे, इसलिए उन्होंने फिलवक्त भारत में शरण ली है। विदेश मंत्रालय का कहना है कि अभी भी 4 हज़ार से ज़्यादा भारत के छात्र वहां फंसे हैं, जिनकी सुरक्षित वापसी सुनिश्चित करने के प्रयास किये जा रहे हैं। लेकिन इन सबके बीच एक सवाल गंभीरता से बार-बार उठ रहा है कि भारत में बेहतर सुविधाएं होने के बावजूद भारतीय छात्र बांग्लादेश पढ़ाई करने क्यों जाते हैं? वहां आखिर ऐसी कौन-सी पढ़ाई है, जिसकी सुविधा भारत में नहीं है?
जैसा कि स्वदेश वापसी कर रहे छात्रों की अलग-अलग मीडिया से बातें हुईं, उससे यही पता चलता है कि असल में बांग्लादेश में अधिकांश भारत के छात्र मेडिकल की पढ़ाई करने जाते हैं। और केवल भारत ही नहीं, नेपाल, भूटान और मालदीव जैसे देशों से भी बड़ी संख्या में छात्र हर साल मेडिकल की पढाई करने के लिए बांग्लादेश का रुख करते हैं। वे बांग्लादेश के मेडिकल कॉलेजों से एमबीबीएस की डिग्री हासिल करने के लिए वहां पढ़ाई करते हैं। बांग्लादेश में कई अच्छी गुणवत्ता वाले मेडिकल कॉलेज हैं जो विश्व स्तरीय शिक्षा प्रदान करते हैं। बांग्लादेश की ढाका यूनिवर्सिटी का दुनिया भर में नाम है। इसके अलावा वहां नर्सिंग विद्यार्थियों की संख्या भी बहुत बड़ी है
बांग्लादेश में रंगपुर मेडिकल कॉलेज, ब्राह्मणबरिया मेडिकल कॉलेज और घाटुला मेडिकल कॉलेज सहित कई ऐसे कॉलेज हैं, जहां भारतीय छात्र मेडिकल की पढ़ाई करने जाते हैं। त्रिपुरा की सीमा से सटे बांग्लादेश के ब्राह्मणबेरिया में ब्राह्मणबरिया मेडिकल कॉलेज है। यहां सैकड़ों की संख्या में भारतीय छात्र मेडिकल की पढ़ाई कर रहे हैं। ब्राह्मणबेरिया के अलावा इसी इलाके में घाटुला मेडिकल कॉलेज है, वहां में भी काफी संख्या में भारतीय छात्र-छात्रा पढ़ाई कर रहे हैं। खासकर, यहां मेघालय, असम, मिजोरम, हरियाणा और उत्तर प्रदेश के छात्र पढाई करने आते हैं।
बहरहाल, सवाल वही कि जब भारत में बहुत सारे मेडिकल कॉलेज हैं तो फिर छात्र बांग्लादेश क्यों जाते हैं? इसका मुख्य कारण भारत में शिक्षा का महंगा होना है। भारत में एमबीबीएस की पढ़ाई काफी महंगी है। यहां कोर्स की फीस 5 लाख रुपये से लेकर 50 लाख रुपये तक है। प्राइवेट मेडिकल कॉलेज की फीस करोड़ों में है। वहीं बांग्लादेश में पढ़ाई का खर्च बहुत कम है। बांग्लादेश में मेडिकल की पढ़ाई का खर्च लगभग 25 लाख रुपये है। प्रति वर्ष या सेमेस्टर 25 हजार से 35 हजार रुपये खर्च होते हैं। प्रवेश के लिए कोई प्रवेश शुल्क की आवश्यकता नहीं है। चूंकि बांग्लादेश की एमबीबीएस डिग्री भारत में स्वीकार की जाती है, इसलिए बाद में घर वापस आने के बाद अभ्यास करने में कोई समस्या भी नहीं होती है।
बांग्लादेश के सरकारी और निजी मेडिकल कॉलेज एनएमसी द्वारा मान्यता प्राप्त हैं।अधिकांश विश्वविद्यालय विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) द्वारा भी मान्यता प्राप्त हैं। परिणामस्वरूप, इन विश्वविद्यालयों से डिग्री प्राप्त करने के बाद विदेश में नौकरी पाने में कोई कठिनाई नहीं होती है। इसके साथ ही बांग्लादेश में मेडिकल अंग्रेजी में पढ़ाया जाता है। चूंकि बांग्ला पड़ोसी देश की मातृभाषा है, इसलिए यहां से गये विद्यार्थियों को ज्यादा परेशानी नहीं होती है। वहां वातावरण के अनुरूप ढलने में कोई परेशानी नहीं होती। मुख्य रूप से इन्हीं कारणों से भारत और पड़ोसी देशों से कई छात्र बांग्लादेश में पढ़ने जाते हैं।
हर साल हजारों की संख्या में इंडियन स्टूडेंट्स मेडिकल की पढ़ाई के लिए बांग्लादेश जाते हैं। साल 2022 की बात करें तो भारत सरकार द्वारा दिए गए आंकड़ों के मुताबिक 9308 कैंडिडेट्स इंडिया से बांग्लादेश गए। इनमें से 922 ने फॉरेन मेडिकल ग्रेजुएट एग्जामिनेशन में भी हिस्सा लिया। यानी ये विदेश से पढ़कर इंडिया में ही प्रैक्टिस करना चाहते थे। मोटी तौर पर कहें तो हर साल 10 हजार के करीब इंडियन स्टूडेंट्स एमबीबीएस के लिए पड़ोसी देश जाते हैं।
मेडिकल की पढ़ाई के लिए बांग्लादेश के चुनाव के पीछे इसके अतिरिक्त भी कई सारे कारण हैं। बांग्लादेश और इंडिया के बीच दूरी बहुत कम है। दूसरी विदेशी धरती के मुकाबले यहां आना-जाना कम खर्च में हो जाता है। प्लेन से कोलकाता से ढाका 5000 रूपये के करीब, रोड से 1500 के करीब और ट्रेन से 1200 रुपये में पहुंचा जा सकता है। इसलिए कैंडिडेट्स को विदेश में पढ़ने के बावजूद देश से कनेक्ट रहना आसान हो जाता है। यहां और वहां के कल्चर में बहुत फर्क नहीं है और अगर आपको थोड़ी-बहुत बंगाली आती है तो ये और भी बढ़िया होता है। यहां मेडिकल की बैचलर्स डिग्री पांच साल की है और एक साल का इंटर्नशिप पीरियड है।
इंडिया में सीटें कम हैं तो कई बार जिन कैंडिडे्टस को यहां एडमिशन नहीं मिलता, वे पड़ोसी देश से एमबीबीएस करने का फैसला लेते हैं। यहां एडमिशन के लिए पात्रता पीसीबी विषयों के साथ कम से कम 50 परसेंट अंकों से 12वीं पास और नीट क्वालीफाई होना है। नीट पास करने के बाद लगभग सभी विदेशी देशों में कैंडिडे्टस को एमबीबीएस में एडमिशन मिल जाता है। यहां पढ़ाई का माध्यम इंग्लिश है, इसलिए भी इंडियन कैंडिडेट्स को आसानी होती है।




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