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आईआईटी क्यों बंद कर रहा है ब्रांच चेंज करने का ऑप्शन?

देश के सर्वश्रेष्ठ इंजीनियरिंग कॉलेज, भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान यानी आईआईटी (IIT) से पढ़ाई करने की सोच रहे युवाओं के लिए यह खबर एक महत्वपूर्ण है। देश के कुछ आईआईटी ने पहले साल के बाद छात्रों को दी जाने वाली ब्रांच चेंज करने की सुविधा को बंद करने का फैसला किया है। यानी आईआईटी में अब स्टूडेंट्स ब्रांच नहीं बदल सकेंगे। गौरतलब है कि आईआईटी द्वारा पहले साल के छात्रों को पहले साल के बाद अपनी कोर ब्रांच बदलने का अवसर दिया जाता है। हालांकि, 23 आईआईटी में से नौ ने अब यह विकल्प बंद कर दिया है। आईआईटी बॉम्बे, आईआईटी मद्रास, आईआईटी खड़गपुर समेत देश के कुल 9 IITs ने ये बड़ा फैसला लिया है।

आईआईटी का कहना है कि ये फैसला स्टूडेंट्स के हित में लिया गया है। आईआईटी का दावा है कि इस विकल्प को बंद करने के पीछे का कारण पहले से ही तनावग्रस्त छात्रों पर और अधिक दबाव डालने से उन्हें बचाना है। यानी आपने कंप्यूटर साइंस, मैकेनिकल, इलेक्ट्रिकल, इलेक्ट्रॉनिक कम्युनिकेशन या जिस भी स्ट्रीम में आईआईटी में एडमिशन लेंगे, उसी में कोर्स पूरा करना पड़ेगा। फिर चाहे आपकी परफॉर्मेंस कितनी भी अच्छी क्यों न हो। अब तक फर्स्ट ईयर के बाद आईआईटी में ब्रांच बदलने का ऑप्शन मिलता था। कोई भी छात्र अच्छे CGPA के साथ अपनी स्ट्रीम चेंज कर सकता था। इसके लिए स्टूडेंट्स को पहले साल में CGPA 7.50 से ज्यादा और 32 क्रेडिट चाहिए होते थे।

विशेषज्ञों का मानना है कि लगभग 50 प्रतिशत नए छात्र ब्रांच चेंज करने का विकल्प चुनना चाहते हैं, लेकिन केवल 10 प्रतिशत छात्र ही इस ऑप्शन का इस्तेमाल कर पाते हैं। आमतौर पर एक छात्र पहले साल के अंत में ब्रांच चेंज के लिए तभी आवेदन कर सकता है, जब उसका सीजीपीए 7.50 (सामान्य श्रेणी) से अधिक हो। उम्मीदवार को पहले शैक्षणिक सेशन के अंत में 32 से अधिक क्रेडिट लाने की आवश्यकता होती है। साथ ही ब्रांच चेंज की अनुमति पहले साल के अंत में सीजीपीए द्वारा निर्धारित योग्यता के क्रम में सख्ती से दी जाती है। दुर्भाग्य से, आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए कुछ छात्र आमतौर पर अपने पहले वर्ष के अधिकांश दिन अपनी किताबों के साथ अपने कमरों या पुस्तकालयों में बिताते हैं। 

सीटों की सीमित संख्या और हाई सीजीपीए की आवश्यकता छात्रों के लिए कंपीटेटिव को कठिन बनाती है, जिसके परिणामस्वरूप छात्र फ्रेशर्स एक्टिविटीज में भाग लेने, क्लब/ग्रुपों के मेंबर बनने, पाठ्येतर गतिविधियों में भाग लेने, कॉलेज फेस्ट में भाग लेने, नए-नए दोस्तों के साथ समय बिताने आदि से चूक जाते हैं। विशेषज्ञों का मानना ​​है कि इसका छात्रों पर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है, खासकर तब जब अधिकांश इंजीनियरिंग छात्र अपनी (कम से कम) स्कूली शिक्षा के अंतिम दो साल पहले से ही जेईई मेन और जेईई एडवांस को क्रैक करने की चिंता में बिताते हैं। इसके अतिरिक्त, इन सभी प्रयासों, तैयारियों और त्याग के बाद भी यदि छात्रों को अपनी पसंद की ब्रांच नहीं मिल पाती है, तो वे अक्सर निराश महसूस करते हैं और अपनी बीटेक डिग्री के शेष वर्षों तक असंतुष्ट रहते हैं। 

आईआईटी मद्रास, खड़गपुर, धनबाद, मंडी, भुवनेश्वर, धारवाड़ ने इस साल से ये सुविधा बंद की है। इससे पहले 2023 में आईआईटी बॉम्बे, 2021 में आईआईटी हैदराबाद और 2018 में आईआईटी जम्मू ये फैसिलिटी खत्म कर चुका है।

 

Asmita Sarkar

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