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NCAHP ने एलाइड और हेल्थकेयर शिक्षा के लिए नए नियम किए अधिसूचित, मानकों की निगरानी के लिए बनेंगे स्वायत्त बोर्ड

नेशनल कमीशन फॉर एलाइड एंड हेल्थकेयर प्रोफेशन्स (NCAHP) ने एलाइड और हेल्थकेयर प्रोफेशन से जुड़े शिक्षा मानकों, संस्थानों की मान्यता, मूल्यांकन और रेटिंग की निगरानी के लिए स्वायत्त बोर्डों की स्थापना से जुड़े नए नियम अधिसूचित किए हैं। इसे एलाइड और हेल्थकेयर शिक्षा के क्षेत्र में अधिक व्यवस्थित नियामक व्यवस्था की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

ऑटोनॉमस बोर्ड्स एंड सेंट्रल असेसमेंट कमेटी (Establishment, Constitution, Functions and Powers) Regulations, 2026 को 28 सितंबर को अधिसूचित किया गया और राजपत्र में प्रकाशित किया गया। नियम राजपत्र में प्रकाशित होने की तारीख से लागू हो गए हैं।

अलग-अलग जिम्मेदारियों के लिए बनेंगे बोर्ड

नए नियमों के तहत राज्य परिषदों के अधीन अलग-अलग अंडरग्रेजुएट, पोस्टग्रेजुएट, असेसमेंट एंड रेटिंग तथा एथिक्स एंड रजिस्ट्रेशन बोर्ड बनाए जाएंगे। इन बोर्डों का काम एलाइड और हेल्थकेयर प्रोफेशन से जुड़े पाठ्यक्रमों की गुणवत्ता, संस्थानों की मान्यता, मूल्यांकन और पेशेवर मानकों की निगरानी करना होगा।

अंडरग्रेजुएट बोर्ड की प्रमुख जिम्मेदारी यह सुनिश्चित करना होगी कि मान्यता प्राप्त स्नातक पाठ्यक्रमों के लिए सभी राज्यों में एक समान शैक्षणिक मानकों का पालन हो। बोर्ड फैकल्टी के विकास और प्रशिक्षण को बढ़ावा देने के साथ शोध को प्रोत्साहित करेगा। इसके अलावा, आयोग द्वारा मंजूर दक्षता आधारित ढांचे के आधार पर स्नातक कार्यक्रमों के मूल्यांकन में भी भूमिका निभाएगा।

इसी तरह पोस्टग्रेजुएट बोर्ड मान्यता प्राप्त स्नातकोत्तर पाठ्यक्रमों के लिए इन मानकों और दक्षता आधारित व्यवस्था को लागू करने की दिशा में काम करेगा।

संस्थानों की मान्यता और रेटिंग की होगी निगरानी

एलाइड और हेल्थकेयर शिक्षा का विस्तार लगातार अलग-अलग विषयों और संस्थानों में हो रहा है। ऐसे में प्रशिक्षण की गुणवत्ता और संस्थानों के लिए एक समान मानक तय करना नियामक व्यवस्था की बड़ी जरूरत बन गया है।

नए ढांचे के तहत असेसमेंट एंड रेटिंग बोर्ड संस्थानों को मान्यता देने और उन्हें नए पाठ्यक्रम शुरू करने की अनुमति से जुड़े आवेदनों का मूल्यांकन करेगा। यह बोर्ड मान्यता प्राप्त संस्थानों का निरीक्षण कर यह देखेगा कि वे निर्धारित न्यूनतम मानकों का पालन कर रहे हैं या नहीं।

इसके अलावा संस्थानों की वार्षिक रिपोर्ट और उनके द्वारा सार्वजनिक की गई जानकारी की समीक्षा कर कमियों की पहचान की जाएगी।

खास बात यह है कि संस्थानों के मूल्यांकन और रेटिंग की जानकारी सार्वजनिक की जाएगी। इसे राज्य परिषद की वेबसाइट या किसी अन्य सार्वजनिक मंच के माध्यम से उपलब्ध कराया जाएगा। इससे छात्रों और अन्य संबंधित पक्षों को मान्यता प्राप्त संस्थानों के प्रदर्शन से जुड़ी जानकारी हासिल करने में मदद मिल सकती है।

सिर्फ निरीक्षण नहीं, लगातार होगी निगरानी

नए नियमों में मान्यता प्राप्त संस्थानों की लगातार निगरानी पर जोर दिया गया है। यानी संस्थानों की गुणवत्ता जांच के लिए केवल समय-समय पर होने वाले निरीक्षण पर निर्भर नहीं रहा जाएगा।

संस्थानों की रेटिंग में निर्धारित मानकों का पालन, शैक्षणिक गुणवत्ता, नए और प्रभावी शिक्षण तरीकों, छात्रों के लिए उपलब्ध अतिरिक्त पाठ्यक्रम, शोध कार्य और उसके प्रभाव जैसे पहलुओं को शामिल किया जाएगा।

इसके अलावा छात्रों का अनुशासन, शिक्षण और सीखने का माहौल तथा छात्रों से मिलने वाला फीडबैक भी रेटिंग का हिस्सा होगा। शैक्षणिक, खेल और सामाजिक गतिविधियों में छात्रों और शिक्षकों की भागीदारी तथा इन गतिविधियों के लिए संस्थान में उपलब्ध सुविधाओं को भी रेटिंग के मानकों में शामिल किया जाएगा।

तीन सदस्यीय टीम करेगी संस्थानों का निरीक्षण

संस्थानों के निरीक्षण के लिए तीन सदस्यों की टीम बनाई जाएगी। इसमें संबंधित स्वायत्त बोर्ड का कम से कम एक सदस्य और दो ऐसे मूल्यांकनकर्ता शामिल होंगे, जिन्हें संस्थान में चलाए जा रहे पाठ्यक्रमों के आधार पर पैनल में शामिल किया गया हो।

राज्य परिषदें निरीक्षण टीमों के गठन और आवंटन के लिए डिजिटल व्यवस्था भी विकसित कर सकती हैं। निरीक्षण के दौरान संबंधित रिकॉर्ड और प्रमाण सुरक्षित रखना जरूरी होगा। साथ ही, जहां हितों का टकराव यानी Conflict of Interest हो, वहां निरीक्षण करने की अनुमति नहीं होगी।

एथिक्स एंड रजिस्ट्रेशन बोर्ड की भी होगी अहम भूमिका

नए नियामक ढांचे में एथिक्स एंड रजिस्ट्रेशन बोर्ड भी बनाया जाएगा। यह बोर्ड राज्य में एलाइड और हेल्थकेयर प्रोफेशनल्स का रजिस्टर बनाए रखने के साथ पेशेवर आचरण और नैतिक मानकों को लागू करने की निगरानी करेगा।

पेशेवर कदाचार से जुड़ी शिकायतों की जांच भी इसी बोर्ड की जिम्मेदारी होगी। नियमों का उल्लंघन पाए जाने पर बोर्ड संबंधित प्रोफेशनल का नाम राज्य रजिस्टर से हटाने की सिफारिश कर सकता है।

स्वायत्त बोर्डों में 10 से 20 सदस्य होंगे

नियमों के अनुसार प्रत्येक स्वायत्त बोर्ड में अध्यक्ष सहित 10 से 20 सदस्य हो सकते हैं। इनमें मान्यता प्राप्त एलाइड और हेल्थकेयर प्रोफेशन की विभिन्न श्रेणियों का प्रतिनिधित्व होगा।

बोर्ड के अध्यक्ष के लिए किसी मान्यता प्राप्त एलाइड या हेल्थकेयर प्रोफेशन में पोस्टग्रेजुएट डिग्री जरूरी होगी। इसके साथ एलाइड और हेल्थकेयर साइंसेज के क्षेत्र में कम से कम 15 साल का अनुभव होना चाहिए, जिसमें कम से कम सात साल नेतृत्व की भूमिका में काम करने का अनुभव शामिल हो।

बोर्ड के सदस्यों के लिए कम से कम 10 साल का अनुभव जरूरी होगा, जिसमें पांच साल का नेतृत्व संबंधी अनुभव शामिल होना चाहिए। सदस्यों का कार्यकाल दो साल का होगा और उन्हें लगातार दो कार्यकाल तक दोबारा नियुक्त किया जा सकता है। हालांकि, अधिकतम आयु सीमा 70 वर्ष निर्धारित की गई है।

राज्य परिषद न होने पर सेंट्रल असेसमेंट कमेटी करेगी काम

नए नियम उन राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के लिए भी व्यवस्था करते हैं, जहां अभी तक कार्यशील राज्य परिषद स्थापित नहीं हुई है।

ऐसी स्थिति में सेंट्रल असेसमेंट कमेटी (Central Assessment Committee) NCAHP की समग्र निगरानी में उन जिम्मेदारियों को निभाएगी, जो सामान्य परिस्थितियों में स्वायत्त बोर्डों को सौंपी गई हैं।

इस समिति में 10 से 30 सदस्य हो सकते हैं। इसमें विभिन्न पेशेवर परिषदों का प्रतिनिधित्व होगा। ऐसे राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को भी प्रतिनिधित्व दिया जाएगा, जहां अभी कार्यशील राज्य परिषद मौजूद नहीं है।

सेंट्रल असेसमेंट कमेटी एलाइड और हेल्थकेयर संस्थानों के सत्यापन, निरीक्षण और रेटिंग के लिए वही प्रक्रिया अपनाएगी, जो स्वायत्त बोर्डों के लिए निर्धारित की गई है। समिति के अध्यक्ष का पद हर साल अलग-अलग एलाइड और हेल्थकेयर प्रोफेशन से जुड़े सदस्यों के बीच बदलता रहेगा।

इन नियमों के लागू होने से एलाइड और हेल्थकेयर प्रोफेशन की शिक्षा, संस्थागत गुणवत्ता, पेशेवर पंजीकरण और नैतिक मानकों के लिए देश में अधिक स्पष्ट और एक समान नियामक व्यवस्था विकसित होने की उम्मीद है।

Raish Ahmed

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