तुर्किये में बच्चों की ऑनलाइन सुरक्षा को मजबूत करने के लिए सोशल मीडिया इस्तेमाल से जुड़े नए नियम लागू किए जा रहे हैं। इनके तहत 15 साल से कम उम्र के बच्चे सोशल मीडिया पर नया अकाउंट नहीं बना सकेंगे। कंपनियों को यूजर्स की उम्र की जांच करनी होगी, जबकि 15 से 17 साल के किशोरों के लिए भी अकाउंट की गोपनीयता, मैसेजिंग और कंटेंट देखने से जुड़े नियम सख्त किए जाएंगे।
नए प्रावधानों का उद्देश्य बच्चों को सोशल मीडिया के संभावित खतरों से बचाना, उनकी निजी जानकारी सुरक्षित रखना और सोशल मीडिया कंपनियों की जवाबदेही तय करना है। इन नियमों के तहत कंपनियों को ऐसे फीचर्स में भी बदलाव करना होगा, जो यूजर्स को लंबे समय तक प्लेटफॉर्म पर सक्रिय रहने के लिए प्रेरित करते हैं।
सरकारी पोर्टल से होगी उम्र की जांच
तुर्किये के आधिकारिक राजपत्र में प्रकाशित नियमों के अनुसार, सोशल मीडिया कंपनियों को नया अकाउंट बनाते समय यूजर की उम्र की पुष्टि करनी होगी। इसके लिए देश के सरकारी डिजिटल पोर्टल ई-देवलेट (e-Devlet) के माध्यम से डिजिटल टोकन जारी करने की व्यवस्था की गई है।
इस टोकन का उद्देश्य यूजर की उम्र से जुड़ी पात्रता की पुष्टि करना है। इसके जरिए यह पता लगाया जा सकेगा कि यूजर निर्धारित 15 या 18 साल की उम्र की शर्त पूरी करता है या नहीं। व्यवस्था इस तरह तैयार की गई है कि उम्र की पुष्टि के लिए यूजर की दूसरी निजी जानकारी सोशल मीडिया कंपनियों के साथ साझा न करनी पड़े। कंपनियां इस टोकन का इस्तेमाल किसी अन्य उद्देश्य के लिए भी नहीं कर सकेंगी।
यदि कोई यूजर 15 साल से कम उम्र का पाया जाता है, तो उसका नया अकाउंट बनाने का अनुरोध स्वीकार नहीं किया जाएगा। वहीं, पहले से मौजूद अकाउंट्स को भी 31 मार्च 2027 तक नए नियमों के अनुरूप करना होगा।
15 से 17 साल के किशोरों के अकाउंट रहेंगे प्राइवेट
नए नियम केवल छोटे बच्चों तक सीमित नहीं हैं। 15 से 17 साल के किशोरों के लिए भी सोशल मीडिया पर कई तरह की पाबंदियां लागू होंगी। इस आयु वर्ग के अकाउंट डिफॉल्ट रूप से प्राइवेट रहेंगे और उन्हें अपनी प्रोफाइल सार्वजनिक करने का विकल्प नहीं दिया जाएगा।
किशोर किन लोगों को फॉलो करते हैं और कौन उन्हें फॉलो करता है, इसकी जानकारी भी दूसरे यूजर्स से छिपाई जाएगी। मैसेजिंग के मामले में भी नियम सख्त होंगे। किशोरों को केवल उन्हीं अकाउंट्स से संदेश मिल सकेंगे, जिन्हें वे खुद फॉलो करते हैं। इसके अलावा, मैसेज पढ़े जाने की जानकारी देने वाले ‘रीड रिसीट’ फीचर पर भी रोक रहेगी।
किशोरों की तस्वीरों और निजी जानकारी की सुरक्षा के लिए कंपनियों को तकनीकी उपाय करने होंगे, ताकि उनकी प्रोफाइल फोटो, पोस्ट और तस्वीरों के स्क्रीनशॉट लेने से रोका जा सके। इन प्रावधानों का मकसद किशोरों की निजी जिंदगी में अनावश्यक दखल, ऑनलाइन उत्पीड़न और उनकी सामग्री के गलत इस्तेमाल के जोखिम को कम करना है।
ऑटो-प्ले और अनलिमिटेड स्क्रॉलिंग जैसे फीचर्स पर भी सख्ती
सोशल मीडिया पर लगातार वीडियो देखने और पोस्ट स्क्रॉल करते रहने की आदत बच्चों के समय और मानसिक स्वास्थ्य को प्रभावित कर सकती है। इसे ध्यान में रखते हुए नए नियमों में ऐसे फीचर्स पर भी ध्यान दिया गया है, जो यूजर्स को लंबे समय तक प्लेटफॉर्म पर बनाए रखते हैं।
किशोरों के अकाउंट में ऑटो-प्ले और अनलिमिटेड फीड जैसे फीचर्स की अनुमति नहीं होगी। इसके साथ ही, कंपनियां बच्चों की ऑनलाइन गतिविधियों के आधार पर उनकी प्रोफाइलिंग नहीं कर सकेंगी और न ही इस उद्देश्य के लिए उनके निजी डेटा का इस्तेमाल कर पाएंगी।
सोशल मीडिया कंपनियों को अपने कंटेंट फिल्टर और रिकमेंडेशन सिस्टम में भी बदलाव करना होगा। इसका उद्देश्य ऐसे कंटेंट को बच्चों तक पहुंचने से रोकना या उसकी पहुंच कम करना है, जो उनके शारीरिक, मानसिक या भावनात्मक विकास पर बुरा असर डाल सकता है।
नियम तोड़ने पर सोशल मीडिया कंपनियों के खिलाफ कार्रवाई
नए नियमों का पालन नहीं करने वाली कंपनियों के खिलाफ कार्रवाई की जा सकेगी। उल्लंघन के मामलों में पहले कंपनियों को इसकी जानकारी देकर सुधार का अवसर दिया जाएगा। इसके बाद कार्रवाई तय करते समय उल्लंघन की गंभीरता, उसकी अवधि, प्रभावित बच्चों की संख्या और कंपनी की ओर से किए गए सुधारों को ध्यान में रखा जाएगा।
नियमों में यूजर्स के लिए अपील की व्यवस्था भी शामिल है। उम्र की जांच, अकाउंट को निलंबित करने या बंद करने जैसे फैसलों के खिलाफ अपील की जा सकेगी। कंपनियों को तुर्किये की भाषा में अपील स्वीकार करनी होगी और इसके लिए कोई शुल्क नहीं लिया जाएगा। ऐसे मामलों की समीक्षा केवल स्वचालित सिस्टम के भरोसे नहीं छोड़ी जाएगी, बल्कि मानवीय जांच भी जरूरी होगी।
बच्चों की ऑनलाइन सुरक्षा पर बढ़ता जोर
तुर्किये के ये नियम सोशल मीडिया कंपनियों के लिए बच्चों की उम्र की पुष्टि, निजी जानकारी की सुरक्षा और नुकसानदेह कंटेंट की पहुंच कम करने जैसी जिम्मेदारियों को अधिक स्पष्ट बनाते हैं। साथ ही, कंपनियों को अपने प्लेटफॉर्म के डिजाइन और काम करने के तरीके में भी बदलाव करना होगा।
हालांकि, इन नियमों का वास्तविक असर इस बात पर निर्भर करेगा कि उम्र की जांच कितनी प्रभावी होती है, बच्चों की निजी जानकारी कितनी सुरक्षित रहती है और नियमों का उल्लंघन करने वाली कंपनियों के खिलाफ कितनी सख्ती से कार्रवाई की जाती है। बच्चों की ऑनलाइन सुरक्षा और उनकी निजता के बीच संतुलन बनाए रखना भी इस व्यवस्था की एक अहम चुनौती होगी।




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