NEET UG 2026: नीट पेपर लीक के बाद प्रतियोगी परीक्षाओं को सुरक्षित बनाने के लिए तकनीक के इस्तेमाल पर चर्चा तेज हो गई है। इंफोसिस के सह-संस्थापक नंदन नीलेकणि ने सुझाव दिया है कि एक बड़ा प्रश्न बैंक तैयार किया जाए और परीक्षा के दिन आखिरी समय में उसी से प्रश्नपत्र बनाया जाए। इसमें आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की मदद लेने की संभावना भी शामिल है। हालांकि, ‘सुपर 30’ के संस्थापक आनंद कुमार ने इस प्रस्ताव पर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि पेपर लीक रोकना जरूरी है, लेकिन ऐसा करते समय ग्रामीण और गरीब परिवारों के छात्रों के लिए नई मुश्किलें खड़ी नहीं होनी चाहिए।
आनंद कुमार ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर अपनी बात रखते हुए तीन प्रमुख चिंताएं बताई हैं। इनमें कंप्यूटर तक सीमित पहुंच, दूरदराज के परीक्षा केंद्रों पर सुविधाओं की कमी और AI से चुने गए सवालों में गलती की आशंका शामिल है। उन्होंने साफ किया कि वह तकनीक या AI के विरोधी नहीं हैं, लेकिन परीक्षा जैसे महत्वपूर्ण मामले में अंतिम फैसला सोच-समझकर लिया जाना चाहिए।
नंदन नीलेकणि ने क्या सुझाव दिया है?
नीट परीक्षा में पेपर लीक के विवाद के बाद केंद्र सरकार ने परीक्षा व्यवस्था में सुधार के लिए नंदन नीलेकणि की अध्यक्षता में एक उच्चस्तरीय टास्क फोर्स गठित की थी। इस समिति का उद्देश्य परीक्षा प्रक्रिया को अधिक सुरक्षित और भरोसेमंद बनाने के उपाय सुझाना है।
13 अक्टूबर 2026 को ब्लूमबर्ग न्यू इकोनॉमी फोरम में बातचीत के दौरान नीलेकणि ने कहा कि पहले से तैयार प्रश्नपत्र को लीक करके बेचे जाने का खतरा रहता है। इससे बचने के लिए बड़ी संख्या में सवालों का एक प्रश्न बैंक बनाया जा सकता है और परीक्षा वाले दिन आखिरी समय में उसी से प्रश्नपत्र तैयार किया जा सकता है। उन्होंने देशभर में कंप्यूटर आधारित परीक्षा (CBT) के लिए केंद्रों की संख्या बढ़ाने की जरूरत भी बताई।
इस प्रस्ताव का मकसद परीक्षा से पहले प्रश्नपत्र के लीक होने की आशंका कम करना है। हालांकि, यह अभी परीक्षा व्यवस्था में सुधार के लिए दिया गया सुझाव है। इसे लागू करने की अंतिम व्यवस्था या समय-सीमा की घोषणा अलग से की जानी बाकी है।
आनंद कुमार ने क्यों जताई असहमति? ये हैं 3 कारण
1. गांवों और गरीब परिवारों के छात्रों को हो सकती है परेशानी
आनंद कुमार की पहली चिंता कंप्यूटर तक पहुंच को लेकर है। उनका कहना है कि देश के दूरदराज के गांवों और आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों में आज भी ऐसे प्रतिभाशाली छात्र हैं, जिन्हें कंप्यूटर की पर्याप्त सुविधा नहीं मिलती। ऐसे में यदि परीक्षा पूरी तरह कंप्यूटर आधारित कर दी जाती है, तो इन छात्रों के सामने एक नई चुनौती खड़ी हो सकती है।
उनके मुताबिक, पेपर लीक रोकने के लिए किए जाने वाले सुधार ऐसे होने चाहिए, जिनसे परीक्षा की सुरक्षा बढ़े, लेकिन किसी छात्र को केवल संसाधनों की कमी के कारण नुकसान न उठाना पड़े।
2. क्या छोटे शहरों और दूरदराज के केंद्रों पर भी होंगी समान सुविधाएं?
आनंद कुमार ने दूसरा सवाल परीक्षा केंद्रों की सुविधाओं और सुरक्षा को लेकर उठाया है। उनका कहना है कि महानगरों में उपलब्ध कंप्यूटर, इंटरनेट, तकनीकी सहायता और सुरक्षा व्यवस्था जैसी सुविधाएं क्या दूरदराज के परीक्षा केंद्रों पर भी सुनिश्चित की जा सकेंगी?
यदि कंप्यूटर आधारित परीक्षा लागू होती है, तो सभी केंद्रों पर एक जैसी जरूरी सुविधाएं उपलब्ध कराना अहम होगा। तकनीकी खराबी, इंटरनेट या कंप्यूटर से जुड़ी समस्या का असर भी उम्मीदवारों की परीक्षा पर नहीं पड़ना चाहिए। आनंद कुमार की चिंता है कि व्यवस्था में असमानता होने पर ग्रामीण क्षेत्रों के छात्रों को अतिरिक्त मुश्किलों का सामना करना पड़ सकता है।
3. AI से चुने गए सवालों के सही होने की गारंटी कौन देगा?
आनंद कुमार की तीसरी और अहम आपत्ति प्रश्नों की गुणवत्ता को लेकर है। उनका कहना है कि प्रतियोगी परीक्षाओं में कम संख्या में सवाल होने के बावजूद कई बार प्रश्नों में गलतियां सामने आती हैं। ऐसे में यदि हजारों सवालों के बड़े बैंक से AI की मदद से आखिरी समय में प्रश्न चुने जाएंगे, तो उनकी शुद्धता सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी किसकी होगी?
नीट जैसी परीक्षा में किसी सवाल की गलती भी उम्मीदवार के अंकों और मेडिकल कॉलेज में दाखिले की संभावना को प्रभावित कर सकती है। इसलिए प्रश्न बैंक कितना भी बड़ा क्यों न हो, सवालों की जांच और उनकी गुणवत्ता सुनिश्चित करना जरूरी होगा।
AI का विरोध नहीं करते आनंद कुमार, लेकिन अंतिम फैसला विशेषज्ञों का हो
आनंद कुमार ने अपनी पोस्ट में स्पष्ट किया कि वह तकनीक या आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के खिलाफ नहीं हैं। उनका मानना है कि AI शिक्षा के क्षेत्र में बड़े बदलाव ला सकता है और प्रश्नपत्र तैयार करने में विशेषज्ञों की मदद भी कर सकता है। लेकिन तकनीक से सहायता लेने और अंतिम निर्णय उसी पर छोड़ देने में अंतर है।
उनके अनुसार, परीक्षा व्यवस्था में सुधार का उद्देश्य केवल नई तकनीक अपनाना नहीं होना चाहिए। पेपर लीक रोकने के लिए सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करना, जिम्मेदारी तय करना और मौजूदा प्रणाली की कमजोरियों को दूर करना भी जरूरी है।
आनंद कुमार लंबे समय से छात्रों के साथ काम कर रहे हैं। उनका कहना है कि परीक्षा का असली उद्देश्य तकनीक की ताकत दिखाना नहीं, बल्कि देश के हर हिस्से में मौजूद प्रतिभा को पहचानना है। किसी प्रश्न में एक गलती का असर सिर्फ कुछ अंकों तक सीमित नहीं रह सकता, बल्कि इससे छात्र के भविष्य और उसके सपनों पर भी असर पड़ सकता है।
NEET परीक्षा में सुधार के सामने क्या है बड़ी चुनौती?
नीट पेपर लीक विवाद ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा किया है कि देश की बड़ी प्रवेश परीक्षाओं को अधिक सुरक्षित कैसे बनाया जाए। प्रश्न बैंक, AI और कंप्यूटर आधारित परीक्षा जैसे उपाय पेपर लीक की आशंका कम करने में मदद कर सकते हैं, लेकिन इनके साथ सवालों की गुणवत्ता, तकनीकी सुविधाओं और सभी उम्मीदवारों को समान अवसर देने पर भी ध्यान देना होगा।
नंदन नीलेकणि का प्रस्ताव परीक्षा की सुरक्षा मजबूत करने के उद्देश्य से सामने आया है, जबकि आनंद कुमार ने इसके संभावित व्यावहारिक असर पर सवाल उठाए हैं। अब चुनौती ऐसी व्यवस्था तैयार करने की है, जो पेपर लीक रोकने के साथ-साथ निष्पक्षता, पारदर्शिता और छात्रों के भरोसे को भी बनाए रखे।




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