
स्कूली छात्रों और कॉलेज में अध्यनरत छात्र छात्रों में आत्महत्या की घटनाएं लगातार बढ़ती जा रही हैं। इसको देखते हुए अमेरिका ने स्कूली छात्रों में बढ़ते अवसाद और मानसिक स्वास्थ्य को लेकर स्कूलों में छात्रों के ऊपर नजर रखना शुरू कर दिया है। इसके लिए स्कूली बच्चों के लिए एक खास तरह का सॉफ्टवेयर उपयोग में लाया जा रहा है। सॉफ्टवेयर के माध्यम से छात्रों की ऑनलाइन निगरानी की जा रही है। उनके स्मार्टफोन, लैपटॉप और चैट का विश्लेषण किया जा रहा है।
वैसे छात्रों के ऊपर विशेष ध्यान दिया जा रहा है जो आपस में मानसिक अवसाद, निराशाजनक संवाद करते हैं। माता-पिता और शिक्षक को अलर्ट दी जा रही है।
सॉफ्टवेयर से छात्रों द्वारा गूगल पर की गई सर्च, स्कूल के निबंध, स्कूल में की गई पढ़ाई से संबंधित जानकारी, दोस्तों के साथ ईमेल अथवा चैट मैसेज का विश्लेषण किया जाता है। स्कूल से जाने के बाद भी छात्रों के ऊपर लगातार यह सॉफ्टवेयर 24 घंटे निगरानी रखता है।
बता दें कि संयुक्त राज्य अमेरिका में आत्महत्या की दर अन्य विकसित देशों की तुलना में बहुत अधिक है, जहाँ प्रति वर्ष 100,000 लोगों पर आत्महत्या से औसतन 14.5 मौतें होती हैं। संयुक्त राज्य अमेरिका में युवा वयस्कों की मृत्यु का दूसरा प्रमुख कारण आत्महत्या है। रिपोर्ट में यह भी सामने आया है कि अमेरिका में 5 से 11 साल के बच्चों में भी आत्महत्या की दर अप्रत्याशित तौर पर बढ़ी है। यही वजह है कि अब वहां स्कूलों में बच्चों पर निगरानी राखी जा रही है ताकि उन्हें आत्महत्या से रोका जाए।
इधर, भारत में भी बड़ी तेजी के साथ छात्रों में आत्महत्या की घटना बढ़ रही है। ऐसी स्थिति में भारत को भी छात्रों के ऊपर बनने वाले दबाव से किस तरह से निपटा जाए, इसके लिए स्कूल और कॉलेज में विशेष प्रयास करने होंगे। भारत में कोचिंग सेंटर में भी छात्रों द्वारा बड़े पैमाने पर आत्महत्या की जा रही है। हाल में एक रिपोर्ट में यह भी खुलासा हुआ था की देश में छात्रों की आत्महत्या की दर किसानों से भी ज़्यादा है।




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