Edinbox Hindi

शिक्षा के प्रसार के साथ उसकी गुणवत्ता भी बढ़ा रहा एडटेक

लर्न प्लेटफार्म के आंकड़े बताते हैं कि वर्ष 2020 से शैक्षिक प्रौद्योगिकी या एडुटेक या एडटेक का स्कूलों में इस्तेमाल लगभग 99% बढ़ चुका है। माना जा रहा है कि अगले तीन सालों में यानि 2027 तक 80% से ज़्यादा कॉलेज एक या उससे ज़्यादा ऑनलाइन अंडरग्रेजुएट प्रोग्राम लांच कर सकते हैं। शैक्षिक प्रौद्योगिकी का महत्व हमारे जीवन में आवश्यक रूप से बढ़ा है और समय के साथ यह महत्व और बढ़ता जायेगा। आज के समय में टेक्नोलॉजी हर पल एडवांस हो रही है। शिक्षा के प्रसार और उसकी गुणवत्ता बढ़ाने के लिए शैक्षिक प्रौद्योगिकी आज के समय की मांग बन चुकी है। 

दरअसल, शिक्षा और तकनीक के समावेश को ही शैक्षिक प्रौद्योगिकी कहते हैं। शैक्षिक प्रौद्योगिकी, जिसे एडुटेक या एडटेक के रूप में भी जाना जाता है, तकनीक के माध्यम से पढ़ने और पढ़ाने का तरीका है। इसके माध्यम से तकनीक और उसकी समझ भी प्राप्त होती है। सीखने की प्रक्रिया को बेहतर और किफायती तरीके से बेस्ट रिजल्ट्स देने में मदद करना शैक्षिक प्रौद्योगिकी का उद्देश्य है। 
 
नेशनल कॉउन्सिल फॉर टीचर एजुकेशन (NCET) द्वारा दी गई शैक्षिक प्रौद्योगिकी की परिभाषा के अनुसार- ‘‘मानव अधिगम की प्रक्रिया का विकास विनियोग प्रणाली के मूल्यांकन, प्रविधियों एवं सहायक सामग्रियों के माध्यम से विकसित करना ही शैक्षिक तकनीकी- शैक्षिक प्रौद्योगिकी है।’’

सरल शब्दों में हम यह कह सकते हैं कि शैक्षिक प्रौद्योगिकी सबसे पहले यह स्पष्ट करती है कि शिक्षा, प्रशिक्षण का उद्देश्य क्या है? इसके बाद शैक्षिक प्रौद्योगिकी विद्यार्थियों को सीखने के लिए प्रेरित करती है। शिक्षक प्रौद्योगिकी शिक्षा के वातावरण में भी सुधार लाती है।

शैक्षिक प्रौद्योगिकी के उद्देश्य 

– शिक्षा के उद्देश्यों का निर्धारण करना। 
– समुदाय की शैक्षिक आवश्यकताओं और इच्छाओं की पहचान करना। 
– आर्ट्स, साइंस और ह्यूमन वैल्यूज़ से जुड़े करिकुलम को डिजाइन और डेवलप करना। 
– एजुकेशनल गोल्स को सपोर्ट करने वाले डिवाइस तैयार करना। 
– प्लानिंग से लेकर एक्सेक्यूशन, इम्प्लीमेंटेशन और इवैलुएशन तक की पूरी शिक्षा प्रोसेस को मैनेज करना।
– व्यावहारिक रूप में इन उद्देश्यों को डिफाइन करना और लिखना।
– एनालिसिस। 
– सीखने-सिखाने की प्रोसेस को मोडर्नाइज़ करना। 
– शिक्षण और सीखने की मौजूदा प्रोसेस को बेहतर बनाने के लिए शैक्षिक प्रौद्योगिकी मॉडल तैयार करना। 
– दुनिया भर के लोगों, विशेष रूप से कम्युनिटी के उपेक्षित वर्गों के लिए शैक्षिक अवसरों का विस्तार और समर्थन करना।
– पाठ्य-वस्तु का एनालिसिस कर एलिमेंट्स और कंपोनेंट्स को एक आर्डर में सेट करना। 
– टीचिंग- लर्निंग प्रोसेस में सुधार लाना। 
– शिक्षकों को ट्रेन कर उनकी योग्यता एवं क्षमताओं में वृद्धि करना। 
– स्टूडेंट्स के गुणों, क्षमताओं, उपलब्धियों और कौशलों का एनालिसिस करना। 

जनसंख्या एवं ज्ञान के विस्फोट ने शिक्षा के क्षेत्र में शैक्षिक प्रौद्योगिकी को अनिवार्य सा बना दिया है। शिक्षा में शैक्षिक प्रौद्योगिकी का महत्व बहुत बढ़ चुका है। विश्व के सभी देश आज शैक्षिक प्रौद्योगिकी को अपनी शिक्षा व्यवस्था में महत्वपूर्ण स्थान दे रहे हैं। भारत भी इसमें पीछे नहीं। शैक्षिक प्रौद्योगिकी का महत्व इसलिए है क्योंकि यह आज के शिक्षकों को उनकी कक्षा में नई तकनीकों और उपकरणों को शामिल करने में मदद करती है। शिक्षक अपनी कक्षा की टीचिंग प्रोसेस को उन्नत और बेहतर बना रहे हैं। शैक्षिक प्रौद्योगिकी का महत्व इसलिए है क्योंकि यह शिक्षकों को अपने स्टूडेंट्स को अनूठे, नए तरीकों से जोड़ती है। शिक्षक अपने नेटवर्क का विस्तार करने और राष्ट्रीय और विश्व स्तर पर अन्य शिक्षकों और शिक्षकों से जुड़ने में भी सक्षम हैं। इसलिए, शैक्षिक प्रौद्योगिकी का महत्व हमारे आपके जीवन में बढ़ता जा रहा है। 

प्रौद्योगिकी ने निश्चित रूप से हमारे जीवन को आसान बना दिया है क्योंकि इसने हमारे दैनिक गतिविधियों को करने के तरीकों में सुधार किया है। सीखने की प्रक्रिया को बेहतर बनाने के लिए प्रचुर मात्रा में जानकारी तक आसान पहुंच से, प्रौद्योगिकी का अनिवार्य उद्देश्य विभिन्न गतिविधियों को करने के लिए बेहतर और कुशल तरीकों का विकास करना है।

जहाँ तक शैक्षिक प्रौद्योगिकी का सवाल है, तो यह लिखित और दृश्य-श्रव्य रूपों में विभिन्न प्रकार के मास मीडिया का उपयोग करती है और इसमें विभिन्न तकनीकी अनुप्रयोग जैसे ऑडियो या वीडियो प्लेटफॉर्म, कंप्यूटर-आधारित शिक्षा, वेब-आधारित शिक्षा आदि शामिल हैं। तभी यह शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार करना और सीखने की प्रक्रिया को बढ़ा रही है। 

एक देश का समाज और संस्कृति उसकी पहचान होता है। वह देश को नई तकनीक जो नई रिसर्च, टेक्नोलॉजी का समर्थन और प्रोत्साहन करता है, वहां हर क्षेत्र में आधुनिकता और प्रगति देखने को मिलती है। शैक्षिक प्रौद्योगिकी भी इन क्षेत्रों में शामिल है। शैक्षिक प्रौद्योगिकी का करियर स्कोप भी काफी विस्तृत है। शैक्षिक प्रौद्योगिकी में डिग्री के बाद क्लासरूम टीचर, कंप्यूटर इंस्ट्रक्टर, मीडिया स्पेशलिस्ट, कोर्स डिज़ाइनर, फैकल्टी सपोर्ट एंड डेवलपमेंट, कॉर्पोरेट ट्रेनर, कंसलटेंट, एजुकेशनल टेक्नोलॉजिस्ट, टेक्नोलॉजी टीचर जैसे जॉब्स किये जा सकते हैं। 

कह सकते हैं कि शैक्षिक प्रौद्योगिकी का महत्व शिक्षा सम्बन्धी सभी क्षेत्रों में अनिवार्य रूप से देखने को मिलता है। यह लर्निंग के क्षेत्र में उपयोगी है, शिक्षक और स्टूडेंट्स के लिए उपयोगी है, शिक्षा प्रशासन के लिए उपयोगी है तो समाज के लिए भी उपयोगी है।
यानी शैक्षिक प्रौद्योगिकी समग्रता में एक राष्ट्र के विकास में उपयोगी है। 

 

Asmita Sarkar

Add comment

Recent posts

Most popular

Most discussed