
प्रसिद्ध फिल्म निर्देशक-निर्माता और पटकथा लेखक श्याम बेनेगल का सोमवार को मुंबई में स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के कारण निधन हो गया। उनकी गिनती बॉलीवुड के टॉप फिल्म निर्देशकों में होती थी। उन्होंने मुंबई सेंट्रल के वोकहार्ट अस्पताल में शाम 6:38 बजे आखिरी सांस ली। श्याम बेनेगल की उम्र 90 वर्ष थी। वे काफी लंबे समय से बीमार चल रहे थे।
श्याम बेनेगल ने हैदराबाद में उस्मानिया विश्वविद्यालय के निजाम कॉलेज से पढ़ाई की थी। इस कॉलेज से उन्होंने अर्थशास्त्र में पोस्ट ग्रेजुएशन की पढ़ाई पूरी की थी। यहीं से उन्होंने एक फिल्म सोसायटी शुरुआत की थी। श्याम बेनेगल किडनी की गंभीर बीमारी से पीड़ित थे।
1959 में उन्होंने मुंबई स्थित विज्ञापन एजेंसी, लिंटास एडवरटाइजिंग में कॉपी-राइटर के रूप में काम करना शुरू किया। यहां उन्होंने धीरे-धीरे क्रिएटिव हेड के पद तक अपनी यात्रा जारी रखी। साल 1962 में अपना पहला डॉक्यूमेंट्री फिल्म “घेर बैठा गंगा” (गंगा दरवाजे पर) गुजराती में बनाई। उनका पहला फीचर फिल्म बनाने का सपना अगले दशक तक अधूरा रहा, क्योंकि वे इसकी पटकथा पर काम कर रहे थे।
साल 1966 और 1973 के मध्य बेनेगल ने पुणे में मौजूद फिल्म और टेलीविजन इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया (FTII) में अध्यापन किया और वर्ष 1980-83 व 1989-92 के समय दो बार संस्थान के अध्यक्ष के रूप में भी कार्यभार संभाला। इस वक्त तक उन्होंने डॉक्यूमेंट्री फिल्में बनानी शुरू कर दी थीं।
फिल्म निर्देशक श्याम बेनेगल को साल 1976 में पद्मश्री और 1991 में पद्मभूषण से नवाजा गया। 8 अगस्त 2007 को उन्हें भारतीय सिनेमा का सर्वोच्च सम्मान, दादासाहेब फालके अवार्ड (वर्ष 2005) दिया गया। इसके अलावा वे हिंदी सिनेमा में सर्वश्रेष्ठ फीचर फिल्म के लिए सात बार राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार विजेता रहे हैं।




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