
देश में हाईटेक क्राइम बढ़ता जा रहा है। पुलिस अपराधियों को पकड़ लेती है लेकिन अदालत में गुनाह साबित नहीं होते। हालांकि भारत की सबसे पहली फॉरेंसिक साइंस यूनिवर्सिटी में ऐसे अटपटे केस आने से न केवल केस की जड़ों तक पहुंचा जाता है बल्कि अदालत भी मान्य रखे इस तरह से फोरेंसिक तथ्यों को जोड़ा जाता है। इसका श्रेय जाता है पद्मश्री डॉ जे एम व्यास को जो आज इस यूनिवर्सिटी के चांसलर हैं।
दरअसल, डॉ जे एम व्यास भारत में फॉरेंसिक साइंस के भीष्म पितामह हैं। नरेंद्र मोदी जब गुजरात के मुख्यमंत्री थे तब उनके मन में विचार आया कि आगे तरह तरह के अपराध होंगे, उसको साइंटिफिक तरीके से साबित कर अगर अदालत में पेश किया जाये तो न केवल अपराध कम होंगे बल्कि अपराधी इस तरह के कारनामे करने से भी डरेंगे। 2009 में गांधीनगर में नेशनल फॉरेंसिक साइंस यूनिवर्सिटी की स्थापना हुई और डॉ जे एम व्यास को जिम्मेदारी दी गई।
डॉ. जे एम व्यास देश की पहली नेशनल फॉरेंसिक साइंस यूनिवर्सिटी के कुलपति हैं। गांधीनगर का यह विश्वविद्यालय पूरी दुनिया में मशहूर है। डॉ व्यास 1973 में गुजरात की पहली फोरेंसिक साइंस लैब में काम कर रहे थे, बाद में यूनिवर्सिटी में डायरेक्टर और आज वहीं पर कुलपति बने। यानी डॉ. व्यास को आज फॉरेंसिक साइंस की दुनिया में 50 साल पूरे हो गए।
डॉ. व्यास सेवानिवृत होना चाहते थे लेकिन खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उनको सेवा देने के लिए NFSU में बने रहने के लिए कहा था। भारत सरकार ने उनकी फोरेंसिक दुनिया में विशेष सेवा के बदले पद्मश्री अवार्ड से भी नवाज़ा है। अभी यूनिवर्सिटी का मुख्यालय गांधीनगर में है और देश में 9 कैंपस है।
भारत सरकार ने इसका विस्तार करने के लिए हाल ही में 2254 करोड़ रुपये का बजट भी आवंटित किया है। 2021 में धनबाद के न्यायधीश को वाहन से कुचलने के बाद कुदरती मौत बताया गया हालांकि यह हत्या थी और NFSU ने साबित किया। इसके अलावा ऐसे दर्जनों केस को इस यूनिवर्सिटी ने सॉल्व किया है। अपराध भले ही कितना ही बड़ा क्यों न हो लेकिन अदालत तक अपराधियों को सजा यह NFSU गांधीनगर दिलाती है।




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