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क्या बच्चों को सोशल मीडिया चलाने की छूट होनी चाहिए?

भारत में डिजिटल व्यक्तिगत डाटा सुरक्षा नियमों (डीपीडीपी)- 2025 का मसौदा जारी किया गया है। इन नियमों के जरिए सरकार डिजिटल डाटा संरक्षण अधिनियम, 2023 को लागू कर सकती है। संसद ने लगभग 14 महीने पहले इससे जुड़े कानून को मंजूरी दी थी। हालांकि, इसके लागू होने से जुड़े नियम अब जारी किए गए हैं। फिलहाल सरकार ने नियमों के ड्राफ्ट (मसौदे) को सार्वजनिक चर्चा के लिए पोर्टल पर अपलोड किया है। इस मुद्दे पर 18 फरवरी के बाद सरकार निर्णय ले सकती है।

इस मसौदे में एक सबसे अहम नियम है बच्चों को ऑनलाइन अकाउंट बनाने की अनुमति देने से जुड़ा। दरअसल, नियम के मुताबिक अब बच्चों का डाटा जुटाने के लिए कंपनियों को उनके माता-पिता या अभिभावकों की अनुमति लेना अनिवार्य होगा। इसका सीधा मतलब है कि बच्चों के सोशल मीडिया अकाउंट बनाने और इसे इस्तेमाल करने में ही उन्हें परोक्ष रूप से अभिभावकों की इजाजत की जरूरत पड़ेगी। चूंकि, अगर अभिभावक बच्चों के डाटा इस्तेमाल के लिए कंपनी को इजाजत नहीं देते तो वह (बच्चे) सोशल मीडिया का इस्तेमाल नहीं कर पाएंगे। 

इस एक नियम के आने के बाद देशभर में इस पर चर्चा है कि क्या बच्चों को सोशल मीडिया चलाने की छूट होनी चाहिए और अगर यह छूट हो तो इसका दायरा क्या हो सकता है। इसके अलावा सवाल यह भी हैं कि बाकी देशों में इससे जुड़े क्या नियम हैं? अमेरिका, ब्रिटेन और यूरोप के देशों में बच्चों के सोशल मीडिया चलाने पर कैसा नियंत्रण है? 

1. अमेरिका
द चिल्ड्रन्स ऑनलाइन प्राइवेसी प्रोटेक्शन एक्ट (COPPA), जिसे 1998 में लागू किया गया था, उसके तहत 13 साल से कम उम्र के बच्चों का निजी डाटा जुटाने के लिए वेबसाइट्स को अभिभावकों की सहमति की जरूरत होती है। कई कंपनियां नियमों के तहत 13 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए अपने पेज पर एक्सेस प्रतिबंधित कर देती हैं। हालांकि, अमेरिका में इसके चलते कई बच्चों ने इंटरनेट पर गलत उम्र बताने का चलन शुरू कर दिया। इसके बाद चिल्ड्रन्स इंटरनेट प्रोटेक्शन एक्ट (सीआईपीए) ने स्कूलों और लाइब्रेरीज में गलत कंटेंट को प्रतिबंधित कर दिया। हालांकि, आलोचकों का मानना है कि इस कदम का सिर्फ सीमित असर है, क्योंकि बच्चे अभी भी दूसरे तरीकों से सारा ऑनलाइन कंटेंट पा सकते हैं। 
 
2. ऑस्ट्रेलिया
ऑस्ट्रेलिया ने बीते साल ही बड़ी टेक कंपनियों के वर्चस्व को चुनौती देते हुए एक कानून पास किया है, जिसके तहत 16 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल मीडिया को प्रतिबंधित कर दिया गया है। इस कानून के तहत अगर सोशल मीडिया कंपनियां 16 साल से कम उम्र के बच्चों को अकाउंट बनाने से रोकने में असफल रहती हैं तो उन पर 5 करोड़ डॉलर तक का जुर्माना लगाया जा सकता है। हालांकि, ऐसी मैसेजिंग और गेमिंग प्लेटफॉर्म्स को इस प्रतिबंध से दूर रखा गया है, जो कि स्वास्थ्य, शिक्षा के मकसद से काम कर रही हैं। 
 
3. ब्रिटेन (यूके)
ब्रिटेन में फिलहाल बच्चों की ऑनलाइन पहुंच पर किसी तरह का कोई प्रतिबंध या रोकटोक नहीं है। हालांकि, यहां भी सरकार कुछ मौकों पर कह चुकी है कि वह लोगों को इंटरनेट पर सुरक्षित रखने के लिए तैयार रहेगी। सरकार ने लोगों पर और खासकर बच्चों पर स्मार्टफोन और सोशल मीडिया के पड़ने वाले असर को लेकर स्टडीज कराना भी शुरू कर दिया है। इसी के मद्देनजर ब्रिटेन की नियामक संस्था ऑफकॉम (Ofcom) ऑनलाइन स्तर पर पारदर्शिता और जिम्मेदारी तय करने के लिए इसी साल के अंत तक ऑनलाइन सेफ्टी एक्ट ला सकती है। 

इस कानून के आने के बाद सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स- फेसबुक, यूट्यूब और टिकटॉक के लिए कुछ मानक सख्त कर दिए जाएंगे। इसके तहत चुनिंदा ऑनलाइन सामग्री के लिए उम्र के सत्यापन को अनिवार्य कर दिया जाएगा। इस कानून को 2023 में कंजर्वेटिव सरकार ने पास कराया था। 

4. यूरोपीय संघ
यूरोपीय संघ में 16 वर्ष से कम उम्र के बच्चों के डाटा को जुटाने के लिए इंटरनेट से जुड़ी कंपनियों को उनके अभिभावकों की सहमति जुटानी पड़ती है। हालांकि, ईयू के 27 सदस्य देश उम्र की इस सीमा को घटाकर 13 तक कर सकते हैं। दूसरी तरफ यूरोप के ही कुछ और देश इस नियम के अलावा अपने नियम भी लागू कर सकते हैं। 
 
5. नॉर्वे
नॉर्वे सरकार ने भी 2024 में ही एक प्रस्ताव रखा, जिसके तहत बच्चों को अब 13 की जगह 15 साल की उम्र तक सोशल मीडिया इस्तेमाल करने के लिए अभिभावकों की मंजूरी की जरूरत होगी। इसके बाद ही बच्चे खुद से सोशल मीडिया के इस्तेमाल की मंजूरी दे सकते हैं। यहां की सरकार ने कहा है कि वह ऐसा कानून लाने की तैयारी कर रही है, जिसके तहत सोशल मीडिया इस्तेमाल के लिए एक न्यूनतम उम्र की सीमा तय हो जाएगी। बताया जता हा कै कि नॉर्वे में नौ साल के करीब 50 फीसदी बच्चे अभी से सोशल मीडिया पर एक्टिव हैं।

6. फ्रांस
फ्रांस में 2023 में एक कानून पारित हुआ, जिसके तहत सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स को 15 साल तक के बच्चों के अकाउंट बनाने के लिए भी उनके माता-पिता या अभिभावकों से मंजूरी लेनी होगी। हालांकि, कुछ तकनीकी वजहों से इस कानून के लागू होने में अड़चन आई हैं। 

अप्रैल में फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने इस कानून के तहत सख्त नियमों को लागू करने का प्रस्ताव दिया था। इसके तहत 11 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए सेलफोन प्रतिबंधित करने और 13 से कम उम्र के बच्चों के लिए इंटरनेट वाले फोन प्रतिबंधित करने का प्रस्ताव दिया गया। हालांकि, यह साफ नहीं है कि नया प्रस्ताव कब तक पेश होगा और इसके कानून बनने के क्या आसार हैं।
 
7. जर्मनी
जर्मनी में 13 साल से ऊपर और 16 साल के कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल मीडिया इस्तेमाल करने की इजाजत है, हालांकि इसके लिए उन्हें अभिभावकों की सहमति लेनी होती है। जर्मनी में फिलहाल इस कानून को और सख्त करने पर चर्चा नहीं है, दूसरी तरफ बच्चों की सुरक्षा से जुड़े अधिकारियों का कहना है कि अभी जो नियम लागू हैं, उनका ठीक ढंग से पालन कराने में ही कई कमियां हैं।

8. नीदरलैंड
नीदरलैंड में सोशल मीडिया चलाने की कोई न्यूनतम उम्र निर्धारित नहीं की गई है। हालांकि, सरकार ने स्कूल में क्लास के दौरान मोबाइल रखने पर प्रतिबंध लागू किए हैं। सिर्फ डिजिटल क्लास, चिकित्सा जरूरत और दिव्यांगता की स्थिति में ही इन प्रतिबंधों से छूट मिलती है।

 9. बेल्जियम
बेल्जियम में 2018 से ही कानून लागू है, जिसके तहत 13 वर्ष से कम उम्र के बच्चे बिना माता-पिता या अभिभावक की मंजूरी के सोशल मीडिया अकाउं नहीं बना सकते हैं। 

10. इटली
इटली में 14 साल से कम उम्र के बच्चों को सोशल मीडिया अकाउंट बनाने के लिए माता-पिता की मंजूरी की जरूरत है। इससे ज्यादा उम्र के बच्चों को सोशल मीडिया इस्तेमाल की पूरी आजादी है। 
 
11. चीन
चीन में 2023 में ही नियामक संस्थाओं ने एक नियम लागू किया है, जिसके तहत 18 साल से कम उम्र के बच्चे दिन में अधिकतम सिर्फ दो घंटे ही स्मार्टफोन्स के साथ बिता सकते हैं। चीन के साइबरस्पेस एडमिनिस्ट्रेशन (सीएसी) के मुताबिक, उसने स्मार्ट डिवाइस बनाने वाली कंपनियों से अवयस्कों के लिए ऐसे प्रोग्राम बनाने पर बात की है, जिससे 18 वर्ष से कम उम्र के बच्चे रात 10 बजे से सुबह 6 बजे तक के लिए मोबाइल पर इंटरनेट की सुविधा नहीं पा सकेंगे।

Asmita Sarkar

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