
भारत विभिन्न भाषाओं से समृद्ध देश है लेकिन भारत की पहचान मूल रूप से हिंदी भाषा से है। हिंदी देश की राजभाषा है। ये भाषा भारत की सांस्कृतिक और भाषाई एकता का प्रतीक है। जिस देश में सैकड़ों भाषाएं और लिपि मौजूद हैं, वहां लगभग 44% भारतीयों की मातृभाषा हिंदी है। हिंदी केवल भाषा नहीं, बल्कि भारतीय पहचान और गौरव का प्रतीक है। हिंदी भाषा का क्षेत्र इतना विस्तृत है कि ये केवल भारत में ही नहीं बल्कि विदेशों में भी फैली हुई है। विदेशों में ये भारतीय संस्कृति का प्रचार-प्रसार करती है।
हिंदी के महत्व से देश-विदेश तक सभी को जागरूक करने और हिंदी भाषा के प्रचार-प्रसार के लिए हर साल वैश्विक स्तर पर हिंदी दिवस मनाया जाता है। हालांकि साल में दो बार हिंदी दिवस मनाते हैं, जिसमें से एक विश्व हिंदी दिवस और दूसरा राष्ट्रीय हिंदी दिवस है। राष्ट्रीय हिंदी दिवस हर साल 14 सितंबर को मनाते हैं और विश्व हिंदी दिवस 10 जनवरी को मनाया जाता है। एक राष्ट्रीय स्तर पर मनाया जाता है और दूसरा वैश्विक स्तर पर भारत समेत कई देशों में मनाते हैं। विश्व हिंदी दिवस का उद्देश्य हिंदी को अंतरराष्ट्रीय मंच पर स्थापित करना है और राष्ट्रीय हिंदी दिवस का उद्देश्य भारत को राजभाषा के रूप में सशक्त करना है।
पहली बार 10 जनवरी 1975 को महाराष्ट्र के नागपुर में विश्व हिंदी सम्मेलन का आयोजन हुआ था। इस ऐतिहासिक सम्मेलन का उद्देश्य हिंदी भाषा को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बढ़ावा देना था। सम्मेलन में लगभग 30 देशों को 122 प्रतिनिधि शामिल हुए थे। यूरोपीय देश नॉर्वे में भारतीय दूतावास में पहला विश्व हिंदी दिवस मनाया गया।
वर्ष 2006 में भारत के तत्कालीन प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह ने 10 जनवरी को “विश्व हिंदी दिवस” के रूप में घोषित किया। इसी के बाद से हर साल विश्व भर में 10 जनवरी के दिन विश्व हिंदी दिवस मनाया जाने लगा। विश्व हिंदी दिवस का दिन वैश्विक स्तर पर भारतीय दूतावासों, राजनयिक मिशनों, और अन्य अंतरराष्ट्रीय संस्थानों में मनाया जाता है।
विश्व हिंदी दिवस, हिंदी भाषा के वैश्विक महत्व और उसकी बढ़ती लोकप्रियता को रेखांकित करता है। यह दिन हमें अपनी भाषा और संस्कृति पर गर्व करने के लिए प्रेरित करता है।




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