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पीएम मोदी ने की पेरिस में AI समिट की सह-अध्यक्षता, कहा – “आने वाले समय में एआई मानवता की दिशा को आकार देगा”

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इस समय तीन दिवसीय दौरे पर फ्रांस में हैं, जहां वे पेरिस के ग्रैंड पैलेस में ‘एआई एक्शन समिट’ की सह-अध्यक्षता कर रहे हैं। समिट में उनके साथ फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों भी मौजूद हैं। इस अवसर पर प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि हम एआई (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस) के युग की शुरुआत में हैं, जो आने वाले समय में मानवता की दिशा को नया आकार देगा। उन्होंने कहा, “एआई पहले से ही हमारी अर्थव्यवस्था, सुरक्षा, और समाज को नए रूप में ढाल रहा है, और इस सदी में यह मानवता के लिए कोड लिखने का काम करेगा।”

प्रधानमंत्री मोदी ने एआई की क्षमता को रेखांकित करते हुए कहा कि यह स्वास्थ्य, शिक्षा, कृषि और अन्य क्षेत्रों में सुधार लाकर लाखों लोगों के जीवन को बेहतर बना सकता है। उनका मानना है कि एआई सतत विकास लक्ष्यों की दिशा में तेजी ला सकता है, लेकिन इसके लिए संसाधनों और प्रतिभाओं को मिलाकर एक सशक्त ढांचा तैयार करना होगा। उन्होंने कहा कि हमें ओपन-सोर्स सिस्टम को बढ़ावा देना होगा जो विश्वास और पारदर्शिता को बढ़ाए और उच्च गुणवत्ता वाले, पक्षपात से मुक्त डेटा सेट तैयार करना होगा।

प्रधानमंत्री मोदी ने एआई के विकास में एक और महत्वपूर्ण पहलू पर जोर दिया, वह था प्रौद्योगिकी का लोकतंत्रीकरण। उनका कहना था कि हमें लोगों को केंद्र में रखते हुए अनुप्रयोग विकसित करने होंगे और साथ ही साइबर सुरक्षा, गलत सूचना और डीपफेक जैसी समस्याओं को सुलझाने के लिए उपाय करने होंगे।

उन्होंने एआई के संभावित नकारात्मक प्रभावों पर भी बात की, विशेषकर रोजगार के अवसरों में बदलाव पर। उनका कहना था कि नौकरियों का नुकसान एआई के सबसे बड़े प्रभावों में से एक हो सकता है, लेकिन इतिहास ने यह भी सिद्ध किया है कि प्रौद्योगिकी से काम खत्म नहीं होते, बल्कि उनकी प्रकृति बदलती है। ऐसे में हमें भविष्य के लिए अपने लोगों को कौशल और पुनः कौशल प्रदान करने में निवेश करना होगा।

प्रधानमंत्री मोदी ने इस बात को भी रेखांकित किया कि एआई का विकास अभूतपूर्व गति से हो रहा है और यह सीमाओं के पार भी तेजी से अपनाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि इसके सुरक्षित और प्रभावी उपयोग के लिए वैश्विक सहयोग और सामूहिक प्रयासों की आवश्यकता है। “हमारे साझा मूल्यों को ध्यान में रखते हुए, हमें ऐसी वैश्विक शासन प्रणालियां और मानक स्थापित करने होंगे, जो एआई के जोखिमों को संबोधित करते हुए विश्वास का निर्माण करें,” उन्होंने कहा।

प्रधानमंत्री ने यह भी कहा कि शासन का उद्देश्य सिर्फ प्रतिस्पर्धा का प्रबंधन करना नहीं है, बल्कि नवाचार को बढ़ावा देना और वैश्विक भलाई के लिए इसका उपयोग करना भी है। उन्होंने सभी देशों से आह्वान किया कि वे एआई के विकास और उपयोग में वैश्विक दृष्टिकोण को अपनाएं ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि एआई का लाभ सभी को मिले।

Asmita Sarkar

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