
कैंसर के मरीजों के लिए एक बड़ी राहत की खबर है। एम्स के राष्ट्रीय कैंसर संस्थान (एनआईसी), झज्जर में देश का सबसे बड़ा न्यूक्लियर मेडिसिन थेरेपी सेंटर अब तैयार हो गया है। इस सेंटर में मरीजों के इलाज की सुविधाएं जल्द ही शुरू होने की उम्मीद है, क्योंकि लाइसेंस प्राप्त करने की प्रक्रिया चल रही है। इसके साथ ही संस्थान में बोन मैरो ट्रांसप्लांट की सुविधा भी शुरू की जा रही है।
संस्थान के अधिकारियों ने बताया कि रेडियोआइसोटोप न्यूक्लियर मेडिसिन थेरेपी वार्ड तैयार हो चुका है, और एटॉमिक एनर्जी रेगुलेटरी बोर्ड (एईआरबी) से लाइसेंस प्राप्त करने की प्रक्रिया जारी है। इस वार्ड में 20 बेड की क्षमता होगी और यह देश का सबसे बड़ा न्यूक्लियर मेडिसिन थेरेपी सेंटर होगा। इस सेंटर के माध्यम से रेडिएशन द्वारा कैंसर का इलाज किया जाएगा, जो कि वर्तमान में कीमोथेरेपी के साथ किया जा रहा इलाज से अधिक सुरक्षित और प्रभावी साबित हो सकता है।
यह नई थेरेपी मुख्य रूप से थायराइड, प्रोस्टेट, न्यूरोब्लास्टोमा जैसे कैंसर के इलाज में मददगार साबित हो रही है, और भविष्य में स्तन कैंसर, ब्लड कैंसर जैसे अन्य प्रकार के कैंसर के इलाज में भी इसका उपयोग होने की संभावना है। इस क्षेत्र में शोध कार्य लगातार जारी है।
इसके अलावा, संस्थान में जल्द ही बोन मैरो ट्रांसप्लांट की सुविधा भी उपलब्ध होगी। यह जटिल उपचार प्रक्रिया रक्त कैंसर और रक्त विकारों के इलाज में सहायक होगी, जिसमें रोगग्रस्त बोन मैरो को स्वस्थ कोशिकाओं से बदला जाता है। वर्तमान में यह सुविधा एम्स के मुख्य कैंपस में उपलब्ध है।
सेंटर में जीनोम सीक्वेंसिंग और रोबोटिक सर्जरी जैसी अत्याधुनिक सुविधाएं भी शुरू की जाएंगी, जो कैंसर के इलाज में नई दिशा और मदद प्रदान करेंगी।




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