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नए शोध से 100 गुना बढ़ेगी एआई की दक्षता, बिजली खपत भी होगी कम

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के बढ़ते उपयोग के साथ बिजली खपत एक बड़ी चुनौती बनी हुई थी। मगर अब वैज्ञानिकों ने एक नई तकनीक विकसित की है, जो न केवल बिजली की खपत को कम करेगी बल्कि एआई की कार्यक्षमता को भी बढ़ाएगी।

लार्ज लैंग्वेज मॉडल (LLM) आधारित एआई सिस्टम हमारे रोजमर्रा के जीवन का अभिन्न हिस्सा बन चुके हैं। ये सिस्टम कंप्यूटिंग, स्टोरेज और डेटा ट्रांसमिशन के लिए डेटा सेंटर पर निर्भर रहते हैं, जो अत्यधिक ऊर्जा की खपत करते हैं। उदाहरण के लिए, जर्मनी में 2020 में ही डेटा सेंटर पर 1600 करोड़ किलोवाट बिजली खर्च हुई थी, जो देश की कुल खपत का लगभग 1% थी।

पिछले पांच वर्षों में जटिल एआई अनुप्रयोगों के बढ़ते उपयोग के कारण डेटा सेंटर की क्षमता में अप्रत्याशित वृद्धि हुई है। भविष्य में यह प्रवृत्ति और तेज होने की संभावना है।

बिजली खपत को कम कर 100 गुना बढ़ेगी एआई की क्षमता
म्यूनिख तकनीकी विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों ने एक ऐसी तकनीक विकसित की है, जो मौजूदा बिजली खपत पर ही एआई की दक्षता को 100 गुना बढ़ा सकती है। इससे एआई प्रशिक्षण के लिए आवश्यक ऊर्जा में भारी कमी आएगी।

इस तकनीक को हाल ही में कनाडा के वैंकूवर में आयोजित न्यूरल इंफॉर्मेशन प्रोसेसिंग सिस्टम्स कॉन्फ्रेंस (NeurIPS 2024) में प्रस्तुत किया गया।

कैसे काम करेगी नई तकनीक?
फोटो पहचानने या भाषा प्रोसेस करने जैसे कार्यों के लिए उपयोग किए जाने वाले न्यूरल नेटवर्क मानव मस्तिष्क की कार्यप्रणाली पर आधारित होते हैं।

पारंपरिक एआई सिस्टम में, कृत्रिम न्यूरॉन्स एक-दूसरे से जुड़े होते हैं और इनपुट सिग्नल को कुछ पैरामीटर्स के साथ संसाधित किया जाता है।

नेटवर्क को प्रशिक्षित करने के लिए पैरामीटर रैंडम तरीके से चुने जाते हैं और फिर उन्हें क्रमिक रूप से समायोजित किया जाता है।

यह प्रक्रिया कई बार दोहराई जाती है, जिससे प्रशिक्षण लंबा चलता है और अत्यधिक बिजली की खपत होती है।

नई तकनीक कैसे करेगी बिजली की बचत?
शोध टीम के प्रमुख प्रोफेसर फेलिक्स डिट्रिच के अनुसार, नई प्रणाली पारंपरिक पुनरावृत्ति पद्धति के बजाय संभावनाओं का उपयोग करती है।

यह तकनीक महत्वपूर्ण सूचनाओं के लक्षित उपयोग पर केंद्रित है, खासकर जहां डेटा में तेज परिवर्तन हो रहा हो।

यह न्यूनतम कंप्यूटिंग शक्ति के साथ आवश्यक पैरामीटर्स को निर्धारित करने में मदद करती है।

इस विधि से न्यूरल नेटवर्क का प्रशिक्षण तेज हो जाता है और एआई का उपयोग अधिक ऊर्जा दक्ष बनता है।

भारत में एआई का दोगुना उपयोग
हाल ही में आई माइक्रोसॉफ्ट की ‘ग्लोबल ऑनलाइन सेफ्टी सर्वे रिपोर्ट’ के अनुसार, भारत में 65% लोग एआई का उपयोग कर रहे हैं।

वैश्विक स्तर पर 2023 की तुलना में 2024 में एआई के प्रयोग में 26% की वृद्धि दर्ज की गई है।

यह दर्शाता है कि एआई तकनीक का प्रसार तेजी से हो रहा है, और ऊर्जा दक्ष समाधानों की आवश्यकता और भी बढ़ गई है।

नई शोध तकनीक से एआई की दक्षता में 100 गुना वृद्धि होगी और बिजली की खपत में उल्लेखनीय कमी आएगी।
यह खोज भविष्य के ऊर्जा-कुशल एआई सिस्टम के विकास में एक महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकती है।

 

Asmita Sarkar

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