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सहायक स्वास्थ्य शिक्षा यानी अलाइड हेल्थकेयर एजुकेशन पर सरकारी नीतियों का अहम प्रभाव

भारत के स्वास्थ्य क्षेत्र में हो रहे बदलावों के साथ, सहायक स्वास्थ्य पेशेवर (Allied Healthcare Professionals) अब रोगियों की देखभाल के लिए अनिवार्य बन गए हैं। इस क्षेत्र में फिजियोथेरेपिस्ट, रेडियोलॉजिस्ट, डाइटिशियन और ऑक्यूपेशनल थेरेपिस्ट जैसे विभिन्न पेशेवर शामिल हैं। पिछले कुछ वर्षों में सरकार द्वारा लागू की गई नीतियों ने इन पेशेवरों की शिक्षा प्रणाली में बुनियादी परिवर्तन किए हैं, जिससे उनके करियर और भारत की स्वास्थ्य सेवा प्रणाली दोनों प्रभावित हुए हैं।

2025 की भारतीय सरकारी नीतियाँ: सहायक स्वास्थ्य क्षेत्र के लिए नई दिशा
2025-26 के केंद्रीय बजट में स्वास्थ्य क्षेत्र के लिए 1,23,059 करोड़ रुपये का आवंटन किया गया, जो पिछले वर्ष की तुलना में 14% अधिक है। इस बजट में “स्किल फॉर लाइफ, सेव ए लाइफ” जैसे कौशल विकास कार्यक्रमों को प्राथमिकता दी गई है। इसका उद्देश्य 2025 से पहले 14 लाख पेशेवरों को रेडियोलॉजी और फिजियोथेरेपी जैसे उच्च मांग वाले क्षेत्रों में प्रशिक्षित करना है।

सरकारी योजनाओं के अंतर्गत 10,000 नई मेडिकल सीटें जोड़ी जाएंगी, जिससे छात्रों को अधिक अवसर मिलेंगे। यह पांच वर्षीय योजना अंततः 75,000 मेडिकल सीटों की स्थापना का लक्ष्य रखती है। चूंकि सहायक स्वास्थ्य पेशेवर डॉक्टरों के साथ मिलकर कार्य करते हैं, यह विस्तार महत्वपूर्ण है।

अटल टिंकरिंग लैब्स पहल के तहत सरकार 2030 तक 50,000 सरकारी स्कूलों में आधुनिक प्रयोगशालाएं स्थापित करेगी। इनमें आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और इंटरनेट ऑफ थिंग्स (IoT) जैसी तकनीकें मौजूद होंगी, जो छात्रों को स्वास्थ्य तकनीकी नवाचारों में व्यावहारिक अनुभव प्रदान करेंगी।

स्वास्थ्य सेवाओं की सुलभता और किफायती मूल्य
कस्टम शुल्क में छूट के कारण कैंसर और जीवन रक्षक दवाओं की लागत में कमी आई है। इसके अलावा, रेडियोथेरेपी मशीन जैसे महंगे उपकरण अभी भी शुल्क नियंत्रण में फंसे हुए हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि इन पर भी शुल्क में कटौती की जानी चाहिए ताकि प्रशिक्षण संस्थानों में बेहतर उपकरण उपलब्ध कराए जा सकें।

संक्षेप में सरकारी पहलों के मुख्य बिंदु:
– बजट में वृद्धि से प्रशिक्षण सुविधाओं और बुनियादी ढांचे का विकास होगा।
– अतिरिक्त सीटों के चलते छात्रों को सहायक स्वास्थ्य शिक्षा में अधिक अवसर मिलेंगे।
– कस्टम ड्यूटी में छूट से उपकरण और दवाएं सस्ती होंगी।
– कौशल विकास कार्यक्रम जैसे “स्किल फॉर लाइफ, सेव ए लाइफ” से स्वास्थ्य सेवा क्षेत्र की कमी को दूर किया जाएगा।

सरकारी नीतियों का प्रभाव: क्या बदला?
सरकारी योजनाओं और पब्लिक-प्राइवेट भागीदारी से शिक्षा की लागत में कमी आई है। प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना (PM-JAY) के तहत गिग वर्कर्स और वंचित समुदायों के छात्रों को रियायती शिक्षा प्रदान की जा रही है। नेशनल स्किल डेवलपमेंट कॉरपोरेशन (NSDC) और कॉर्पोरेट स्कॉलरशिप योजनाएं छात्रों की आर्थिक मदद कर रही हैं।

भारत में सहायक स्वास्थ्य पेशेवरों की संख्या WHO के मानक 40/10,000 के मुकाबले मात्र 20/10,000 है। इसे सुधारने के लिए Allied Healthcare Professions Act, 2021 के तहत 53 सहायक स्वास्थ्य भूमिकाएं परिभाषित की गई हैं, जिनके लिए प्रशिक्षण पाठ्यक्रम निर्धारित किए गए हैं। 2026 तक, 200 नए कैंसर डे-केयर सेंटर खोले जाएंगे, जिससे ग्रामीण क्षेत्रों के छात्रों को व्यावहारिक प्रशिक्षण का अवसर मिलेगा।

छात्रों और पेशेवरों के लिए अन्य प्रमुख बिंदु:
स्पष्ट नियामक ढांचा: Allied Healthcare Professions Act के तहत प्रशिक्षण और अभ्यास की स्पष्ट रूपरेखा।
ग्रामीण क्षेत्र में ज़ोर: कैंसर डे-केयर केंद्रों से ग्रामीण छात्रों को लाभ।
तकनीकी समावेशन: AI और IoT का प्रशिक्षण कार्यक्रमों में समावेश।

चुनौतियाँ भी बनी हुई हैं
हालांकि प्रगति हो रही है, बिहार और उत्तर प्रदेश जैसे राज्यों में अभी भी ढांचागत कमियाँ हैं। AI आधारित डायग्नोस्टिक्स और वियरेबल टेक्नोलॉजी जैसे क्षेत्रों में पाठ्यक्रम अभी अधूरे हैं। केवल 30% सहायक स्वास्थ्य पेशेवरों को कॉर्पोरेट अस्पतालों में इंटर्नशिप का मौका मिलता है, जिससे व्यावहारिक अनुभव में कमी रहती है।

भविष्य की संभावनाएं और आवश्यकताएं
2025 की नीतियों ने भारत में सहायक स्वास्थ्य शिक्षा के लिए एक मजबूत आधार तैयार किया है। छात्रों को अब किफायती और आधुनिक चिकित्सा शिक्षा प्राप्त करने के अधिक अवसर मिल रहे हैं, जिससे वे टेलीहेल्थ, ग्रामीण स्वास्थ्य और AI-आधारित भूमिकाओं में कार्य कर सकें।

2030 तक 65 लाख सहायक स्वास्थ्य पेशेवरों का लक्ष्य तभी पूरा हो सकेगा जब इन पहलों को समान रूप से लागू किया जाए और तकनीकी समावेशन को प्राथमिकता दी जाए। यह क्षेत्र स्वास्थ्य प्रणाली को सुदृढ़ करने में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाएगा और नए पेशेवरों के लिए एक उज्ज्वल करियर का मार्ग प्रशस्त करेगा।

Asmita Sarkar

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