
भारतीय सूचना प्रौद्योगिकी संस्थान (IIIT) इलाहाबाद के वैज्ञानिकों और शोध छात्रों की टीम ने पाचन तंत्र में मौजूद एक विशेष पेप्टाइड ‘केआर रिपीट्स’ (KR Repeats) की खोज की है। इस गुड बैक्टीरिया का उपयोग घावों और आंखों की कैराटाइटिस जैसी बीमारियों के इलाज में किया जा सकेगा।
‘केआर रिपीट्स’ एक रोग प्रतिरोधक बैक्टीरिया है जो शरीर को संक्रमण से लड़ने में मदद करता है। इस खोज से घावों के साथ-साथ आंखों की गंभीर बीमारी कैराटाइटिस का उपचार भी संभव हो सकेगा।
इस बैक्टीरिया को IIIT इलाहाबाद के अप्लाइड साइंस विभाग के असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. सिंतु कुमार सामंता और शोध छात्र अनन्या अनुराग आनंद, आयुष अमोद, सचिन कुमार गुप्ता, सर्फराज अन्वर, रजत कुमार और विदुषी यादव ने मिलकर खोजा है। इस परियोजना में ट्रिपलआईटी के साथ-साथ एनयूएस सिंगापुर, सीडीआरआई लखनऊ और जेएनयू नई दिल्ली के वैज्ञानिक भी सहयोग कर रहे हैं। बैक्टीरिया की खोज पर कार्य 2020 से जारी था।
इस शोध को वर्ष 2024 में इंटरनेशनल जर्नल ऑफ पेप्टाइड रिसर्च एंड थेरेप्यूटिक्स में प्रकाशित भी किया गया है। परियोजना के लिए उत्तर प्रदेश विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद (UPCST) ने 14 लाख रुपये का अनुदान प्रदान किया है।
कैसे काम करेगा ‘केआर रिपीट्स’ बैक्टीरिया
‘केआर रिपीट्स’ को जेल के रूप में विकसित कर घावों पर लगाया जाएगा। यह बैक्टीरिया घावों और आंखों में मौजूद संक्रमण फैलाने वाले जीवाणुओं की गतिविधि को रोक देगा, जिससे उपचार तेज हो जाएगा।
डॉ. सिंतु कुमार सामंता के अनुसार, केआर रिपीट्स आधारित पेप्टाइड को बीटा-लैक्टम एंटीबायोटिक्स के साथ मिलाकर, प्रतिरोधक बैक्टीरिया से लड़ने और आंखों के संक्रमण कैराटाइटिस तथा घावों के इलाज में प्रभावी तरीके से प्रयोग किया जाएगा।




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