
शिक्षा प्रौद्योगिकी क्षेत्र की जानी-मानी लेकिन संकटग्रस्त कंपनी BYJU’S को एक और बड़ा झटका लगा है। कंपनी के मुख्य लर्निंग ऐप को Google Play Store से हटा दिया गया है, जिसका कारण Amazon Web Services (AWS) को बकाया भुगतान बताया गया है।
यह डीलिस्टिंग BYJU’S की मुख्य लर्निंग ऐप को प्रभावित करती है, हालांकि इसके अंतर्गत आने वाले Think and Learn ब्रांड के अन्य ऐप्स अभी भी प्ले स्टोर पर उपलब्ध हैं। ऐप हटाए जाने के पीछे वेंडर पेमेंट विवाद है, जिसे फिलहाल कंपनी की चल रही दिवालियापन प्रक्रिया के तहत सुलझाया जा रहा है।
BYJU’S के संचालन और वित्तीय जिम्मेदारियों की देखरेख फिलहाल एक इंसॉल्वेंसी रेजोल्यूशन प्रोफेशनल (IRP) द्वारा की जा रही है। शैलेंद्र अजेर्मा, जो कि थिंक एंड लर्न के लिए IRP के रूप में कार्यरत हैं, ने इस मुद्दे पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है।
किस ऐप को हटाया गया?
हटाया गया ऐप कक्षा 4 से 12 तक के छात्रों के लिए गणित, भौतिकी, रसायन विज्ञान और जीव विज्ञान जैसे विषयों की पढ़ाई के लिए उपयोग होता था। इसके अलावा कक्षा 6 से 8 तक के लिए सामाजिक विज्ञान की सामग्री भी उपलब्ध थी। ऐप में JEE, NEET और IAS जैसी प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए भी संसाधन मौजूद थे।
अन्य प्लेटफॉर्म्स पर ऐप की उपलब्धता
हालांकि गूगल प्ले स्टोर से यह ऐप हटा दी गई है, लेकिन Apple के App Store पर यह अब भी डाउनलोड के लिए उपलब्ध है। इसके अलावा, BYJU’S के अन्य ऐप जैसे कि प्रीमियम लर्निंग ऐप और एग्जाम प्रेप ऐप, अभी भी गूगल प्ले स्टोर पर सामान्य रूप से काम कर रहे हैं क्योंकि ये अलग वेंडर व्यवस्थाओं के तहत संचालित होते हैं।
कंपनी की कानूनी और वित्तीय परेशानियाँ
BYJU’S की समस्याएं सिर्फ ऐप स्टोर तक सीमित नहीं हैं। नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल (NCLT) ने कई निवेशकों, जिनमें Glas Trust जैसी ऋणदाता-अधिकृत एजेंसी भी शामिल है, की याचिकाओं के आधार पर कंपनी के खिलाफ दिवालियापन की कार्यवाही शुरू कर दी है।
बेंगलुरु स्थित NCLT शाखा ने भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (BCCI) के 158.9 करोड़ रुपये के बकाए को लेकर दिवालिया प्रक्रिया की शुरुआत की। यह राशि जुलाई 2019 में BCCI के साथ हुए स्पॉन्सरशिप समझौते से जुड़ी है, जिसके तहत BYJU’S को भारतीय क्रिकेट टीम की जर्सी पर ब्रांडिंग अधिकार, टेलीविज़न मैचों के दौरान विज्ञापन, और मैच टिकटों तक पहुंच प्राप्त हुई थी।
BYJU’S के सामने अब ना सिर्फ तकनीकी और वित्तीय संकट हैं, बल्कि कंपनी की साख और संचालन को लेकर भी गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।




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