
एचआईवी वायरस को मानव शरीर में निष्क्रिय करने की दिशा में वैज्ञानिकों को एक महत्वपूर्ण सफलता मिली है। अमेरिका के जॉन्स हॉपकिन्स मेडिसिन के शोधकर्ताओं ने एक नए आणविक उपाय की पहचान की है, जो एड्स वायरस को लंबे समय तक “नींद की अवस्था” में रख सकता है। यह तकनीक जीन थेरेपी पर आधारित है और इसके जरिये वायरस को स्थायी रूप से निष्क्रिय करना संभव हो सकता है।
इस breakthrough से उम्मीद की जा रही है कि एचआईवी संक्रमित मरीजों को रोज़ाना ली जाने वाली दवाओं से राहत मिलेगी और एंटीरेट्रोवायरल थेरेपी (ART) के दीर्घकालिक दुष्प्रभावों से भी बचा जा सकेगा।
क्या है यह नई खोज?
अध्ययन में शोधकर्ताओं ने ‘एंटीसेंस ट्रांसक्रिप्ट’ (AST) नामक एक विशेष आणविक अणु की भूमिका का खुलासा किया है, जो HIV की जेनेटिक सामग्री से ही बनता है। यह अणु वायरस को उस स्थिति में पहुंचा देता है, जहां वह अपनी प्रतियां नहीं बना पाता – यानी वह निष्क्रिय हो जाता है।
कैसे हुआ प्रयोग?
वैज्ञानिकों ने CD4+ T कोशिकाओं में जीनोम संशोधन कर AST के निर्माण को बढ़ाया।कोशिकाओं में ऐसे डीएनए तत्व डाले गए जो AST की कई प्रतियां तैयार कर सकें।फ्लोरोसेंट प्रोटीन (GFP) से मापा गया कि वायरस कितनी तेजी से खुद को दोहरा रहा है। AST की उपस्थिति में वायरस का दोहराव लगभग शून्य हो गया।
इसके बाद, लेजर तकनीक की मदद से यह भी पता लगाया गया कि AST अणु के कौन से हिस्से वायरस को निष्क्रिय करने वाले प्रोटीन से जुड़ते हैं। इसके लिए अणु में कई म्युटेशन कर वैज्ञानिकों ने हर हिस्से की भूमिका समझने की कोशिश की।
मानव कोशिकाओं में भी सफल प्रयोग
अध्ययन का एक महत्वपूर्ण भाग 15 एचआईवी संक्रमित व्यक्तियों की प्रतिरक्षा कोशिकाओं पर आधारित था। उनकी सहमति से प्राप्त कोशिकाओं में भी AST डाला गया और यह देखा गया कि वायरस सक्रिय रहता है या नहीं। परिणाम समान थे—वायरस निष्क्रिय अवस्था में चला गया।
ART का दीर्घकालिक इस्तेमाल और जीन थेरेपी का विकल्प
विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अनुसार दुनिया में लगभग 3.99 करोड़ लोग एचआईवी से संक्रमित हैं, जिनमें से हर साल 6.3 लाख मौतें होती हैं। मौजूदा इलाज, एंटीरेट्रोवायरल थेरेपी (ART), को रोज़ाना लेना जरूरी होता है। हालांकि इसका लंबे समय तक सेवन लिवर, हड्डियों और मेटाबॉलिज्म पर नुकसानदायक प्रभाव डाल सकता है।
वहीं, जीन थेरेपी की एक खुराक से ही लंबे समय तक प्रभाव दिखने की संभावना है, जिससे यह भविष्य में एक लंबे समय तक चलने वाला इलाज बन सकता है।
यह अध्ययन, जो प्रतिष्ठित जर्नल ‘Science Advances’ में प्रकाशित हुआ है, एचआईवी के इलाज में एक नई उम्मीद लेकर आया है। यदि यह जीन थेरेपी तकनीक और अधिक परीक्षणों में सफल रहती है, तो यह एचआईवी को स्थायी रूप से निष्क्रिय करने वाला पहला इलाज बन सकता है — और संभवतः इस महामारी के अंत की ओर एक बड़ा कदम साबित होगा।




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