
देश की सबसे बड़ी मेडिकल नियामक संस्था नेशनल मेडिकल कमीशन (NMC) ने लाइव सर्जरी को लेकर बड़ा फैसला लिया है। अब कोई भी अस्पताल या डॉक्टर मनमर्जी से ऑपरेशन का सीधा प्रसारण नहीं कर सकेगा। यह निर्णय सुप्रीम कोर्ट में दायर एक जनहित याचिका के बाद आया है, जिसमें आरोप लगाया गया था कि निजी अस्पताल मरीजों को मॉडल की तरह इस्तेमाल कर रहे हैं — कॉन्फ्रेंस के जरिए प्रोडक्ट प्रमोशन और ब्रांडिंग के लिए।
सुप्रीम कोर्ट में क्या उठा मुद्दा?
याचिकाकर्ता राहिल चौधरी ने सुप्रीम कोर्ट में कहा कि कई अस्पताल बिना मरीजों की स्पष्ट सहमति के उन्हें लाइव सर्जरी में शामिल कर लेते हैं। डॉक्टर और अस्पताल इस प्रक्रिया का उपयोग अपने ब्रांड को बढ़ावा देने, कंपनियों के उत्पादों का प्रचार करने और अपनी विशेषज्ञता दिखाने के लिए करते हैं — और इस बीच मरीज की सुरक्षा व गोपनीयता को नजरअंदाज किया जाता है।
इस याचिका पर जवाब देते हुए NMC ने एक विशेषज्ञ समिति गठित की, जिसकी सिफारिशों पर 26 जुलाई 2025 को सख्त गाइडलाइंस जारी की गईं।
नई गाइडलाइंस की मुख्य बातें:
1. लाइव सर्जरी के लिए अब पूर्व अनुमति अनिवार्य
किसी भी लाइव सर्जरी से पहले राज्य मेडिकल काउंसिल या संस्थान प्रमुख की मंजूरी जरूरी होगी। विदेश से आए डॉक्टर को NMC और विशेषज्ञ पैनल से अनुमति लेनी होगी।
2. मरीज की जानकारी और सहमति
मरीज को पहले से यह स्पष्ट रूप से बताया जाएगा कि उसकी सर्जरी का लाइव प्रसारण होगा। केवल दस्तावेज़ी नहीं, समझदारी भरी सहमति जरूरी होगी। मरीज किसी भी समय सहमति वापस ले सकता है। उसकी पहचान गोपनीय रखी जाएगी।
3. ब्रांडिंग और प्रमोशन पर रोक
सर्जरी का उपयोग किसी डॉक्टर, अस्पताल या मेडिकल प्रोडक्ट के प्रचार के लिए नहीं किया जा सकेगा। अगर डॉक्टर या संस्था किसी उपकरण में वित्तीय हित रखते हैं, तो उसका उपयोग प्रतिबंधित होगा।
4. प्रसारण के दौरान संयम
ऑपरेशन करते समय सर्जन दर्शकों से बातचीत नहीं करेगा ताकि ध्यान मरीज पर रहे।विशेष परिस्थिति में एक प्रशिक्षित कमेंटेटर गाइड कर सकता है।
5. लालच या लाभ नहीं मिलेगा
मरीज को किसी भी प्रकार का आर्थिक प्रलोभन नहीं दिया जाएगा। इंश्योरेंस कवर की सुविधा दी जा सकती है ताकि किसी गड़बड़ी की स्थिति में मरीज को नुकसान न हो।अगर कोई गलती होती है तो अस्पताल को मरीज का इलाज नि:शुल्क करना होगा।
6. इमरजेंसी से निपटने की तैयारी जरूरी
ऑपरेशन थिएटर में सभी जरूरी उपकरण और विशेषज्ञ मौजूद होने चाहिए। किसी भी आपात स्थिति से निपटने की पूरी योजना पहले से तैयार होनी चाहिए। अगर लाइव सेटअप तकनीकी रूप से असफल रहता है, तो रिकॉर्डेड सर्जरी का उपयोग किया जाएगा।
छात्रों के लिए बेहतर विकल्प सुझाए
हालांकि यह माना जाता है कि लाइव सर्जरी से मेडिकल छात्रों को तकनीकी समझ बेहतर मिलती है, लेकिन NMC का मानना है कि इसके लिए रिकॉर्डेड वीडियोज, कैडेवरिक ट्रेनिंग और सिमुलेशन लैब्स कहीं ज्यादा सुरक्षित और प्रभावी साधन हैं।
यह कदम मरीजों की सुरक्षा, गोपनीयता और चिकित्सा नैतिकता को मजबूत बनाने की दिशा में एक बड़ा बदलाव माना जा रहा है।




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