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किसानों के गंभीर मुद्दे को एंटरटेनिंग ढंग से प्रस्तुत करती है ‘जॉली LLB 3’

यह फिल्म दिखाती है कि एक अच्छी फिल्म बनाने के लिए केवल कहानी ही नहीं, बल्कि कॉमेडी, इमोशन और एक गंभीर मुद्दे को एंटरटेनिंग ढंग से प्रस्तुत करना कितना जरूरी है। यह सिर्फ मनोरंजन नहीं करती, बल्कि सिनेमा से सीखने का मौका भी देती है।

कहानी
कहानी इस बार किसानों की समस्याओं पर आधारित है। राजस्थान में एक किसान आत्महत्या कर लेता है। जमीन पर बिल्डरों का कब्जा, किसानों का विरोध और मामला कोर्ट तक पहुंचता है। केस लड़ने की जिम्मेदारी जॉली पर आती है—लेकिन इस बार दो जॉली हैं, जो खुद आपस में भिड़ जाते हैं। आखिर इसका अंजाम क्या होगा, ये जानने के लिए आपको थिएटर जाना होगा।

कैसी है फिल्म?
फिल्म बेहतरीन है। यह बताती है कि गंभीर मुद्दों को कमर्शियल सिनेमा में भी कितनी खूबसूरती से दिखाया जा सकता है। जॉली LLB फ्रेंचाइजी अपनी कॉमेडी के लिए जानी जाती है, और इस बार उसमें मुद्दों की गंभीरता भी जुड़ी है।

कई सीन आपको तालियां और सीटियां बजाने पर मजबूर करेंगे। कई सीन दिल को छू जाएंगे। आपको ज्ञान भी मिलेगा, लेकिन फिल्मी स्टाइल में—not डॉक्यूमेंट्री की तरह।फिल्म शुरू से अंत तक बांधे रखती है। कोर्टरूम सीन्स में सिनेमैटिक लिबर्टी जरूर है, लेकिन वही इसे रोचक बनाते हैं। हर कलाकार का अभिनय दमदार है और तकनीकी स्तर पर फिल्म बेहतरीन बनी है।

एक्टिंग
अक्षय कुमार अपनी टॉप फॉर्म में हैं। उनकी कॉमिक टाइमिंग और एनर्जी बेमिसाल है। यह परफॉर्मेंस उनके करियर की बेहतरीन अदायगियों में से एक है। अरशद वारसी ने इमोशनल और कॉमिक दोनों दृश्यों में शानदार काम किया है। सौरभ शुक्ला हर सीन में जान डाल देते हैं। सीमा बिस्वास अपनी आंखों के दर्द से दर्शकों को भीतर तक झकझोर देती हैं। गजराज राव निगेटिव रोल में दमदार हैं। हुमा कुरैशी और अमृता राव का काम भी प्रभावी है।

राइटिंग और डायरेक्शन
सुभाष कपूर की लेखनी और निर्देशन फिल्म की सबसे बड़ी ताकत है। उन्होंने हर किरदार को बराबर स्पेस दिया, सिर्फ सुपरस्टार पर फोकस नहीं किया। कोर्टरूम ड्रामा और इमोशनल सीन का बैलेंस शानदार है।

कुल मिलाकर यह फिल्म हर हाल में देखी जानी चाहिए। यह सिर्फ एंटरटेन नहीं करती, बल्कि आपको सोचने और महसूस करने पर मजबूर करती है।

Asmita Sarkar

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