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आज की पत्रकारिता से गायब हो चुके हैं ग्रामीण मुद्दे, बोले अरबिंदो कॉलेज के प्राचार्य प्रोफेसर अरुण चौधरी

अरविंदो कॉलेज के प्राचार्य प्रोफेसर अरुण चौधरी ने कहा कि यदि भारत को विकसित राष्ट्र बनाना है तो हमें गांवों की ओर लौटना होगा। हिंदी समाचार पत्रों का सबसे बड़ा पाठक वर्ग गांवों में है, लेकिन आज की पत्रकारिता में ग्रामीण मुद्दे गायब हो चुके हैं। प्रिंट और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया ग्रामीण समस्याओं पर ध्यान नहीं देते।
वे “हिंदी पत्रकारिता और भारत बोध” विषय पर नवोन्मेष साहित्य सभा द्वारा आयोजित एक दिवसीय संगोष्ठी के उद्घाटन अवसर पर बोल रहे थे।

उन्होंने कहा कि आज की पत्रकारिता एल्गोरिथ्म-आधारित हो गई है, जिसमें ग्रामीण समाज और उनकी समस्याओं को जगह नहीं मिलती, जबकि देश की 60% से अधिक आबादी गांवों में रहती है। रोजगार, शिक्षा और चिकित्सा जैसे मुद्दे मीडिया के एजेंडे में नहीं हैं। जब तक मीडिया इन पर ध्यान नहीं देगा, तब तक विकसित भारत और विश्वगुरु बनने का सपना अधूरा रहेगा।

मुख्य अतिथि और आजतक के वरिष्ठ पत्रकार पंकज शर्मा ने छात्रों से कहा कि भारत बोध में सम्पूर्ण भारतीयता की भावना निहित है। हिंदी पत्रकारिता ने इसे निरंतर पुष्ट किया है। उन्होंने कहा, “हिंदी मेरी दूसरी मां है। हमें इसे आगे बढ़ाना होगा और ज्यादा से ज्यादा लोगों तक पहुंचाना होगा। नई पीढ़ी पर भारत का भविष्य टिका हुआ है।”

डॉ. प्रदीप कुमार सिंह (सहायक आचार्य, दिल्ली विश्वविद्यालय) ने कहा कि हिंदी पत्रकारिता केवल सूचना देने का माध्यम नहीं, बल्कि समाज-बोध और गौरव-बोध को जागृत करने का कार्य करती है। उन्होंने फेक न्यूज और बाजारीकरण पर चिंता जताते हुए कहा कि पत्रकारिता अपनी संवेदनशीलता से भटक रही है।

मुख्य वक्ता डॉ. मनोज वर्मा (एंकर, संसद टीवी) ने कहा कि पत्रकारिता का लक्ष्य समाज और व्यक्ति दोनों हैं। यह राष्ट्र को दिशा देती है। उन्होंने युवाओं से अपील की कि भारत बोध की महत्ता को समझकर आत्मसात करें, तभी उसका उद्देश्य पूरा होगा।

कार्यक्रम का संयोजन निर्देश प्रजापति ने किया और धन्यवाद ज्ञापन डॉ. हंसराज सुमन ने प्रस्तुत किया। इस अवसर पर नवोन्मेष साहित्य सभा के प्रतिनिधियों को सम्मानित किया गया। सभागार छात्रों और शोधार्थियों से खचाखच भरा रहा।

Asmita Sarkar

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