
चंडीगढ़ यूनिवर्सिटी के मनोविज्ञान विभाग, जो यूनिवर्सिटी इंस्टीट्यूट ऑफ लिबरल आर्ट्स एंड ह्यूमैनिटीज का हिस्सा है, ने हाल ही में विश्व मानसिक स्वास्थ्य सप्ताह 2025 के अवसर पर एक एक-दिवसीय संगोष्ठी का आयोजन किया। इस कार्यक्रम का उद्देश्य मानसिक स्वास्थ्य में तकनीक के उपयोग के माध्यम से लोगों के जीवन पर सकारात्मक प्रभाव डालना और विद्यार्थियों, शिक्षकों एवं मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञों को एक साझा मंच पर लाना था, जहाँ सीखने और संवाद का अवसर मिले।
इस अवसर पर प्रो. (डॉ.) शुभ मोहन सिंह, प्रसिद्ध मनोचिकित्सक, पोस्टग्रेजुएट इंस्टिट्यूट ऑफ मेडिकल एजुकेशन एंड रिसर्च (PGIMER), चंडीगढ़ से मुख्य वक्ता के रूप में उपस्थित रहे। डॉ. सिंह सामुदायिक मनोचिकित्सा और ब्रेन स्टिम्यूलेशन ट्रीटमेंट के क्षेत्र में अग्रणी विशेषज्ञ हैं। अपने संबोधन में उन्होंने बताया कि कैसे टेलीथेरपी सेवाएँ, मेंटल हेल्थ मोबाइल ऐप्स और डिजिटल साक्षरता कार्यक्रम आज मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं की पहुँच बढ़ाने और भावनात्मक कल्याण को प्रोत्साहित करने में अहम भूमिका निभा रहे हैं।
संगोष्ठी के दौरान प्रतिभागियों ने इस बात पर चर्चा की कि तकनीक के माध्यम से कैसे बिना कलंक (stigma-free) वातावरण तैयार किया जा सकता है और मानसिक स्वास्थ्य उपचार को अधिक समावेशी (inclusive) बनाया जा सकता है। यह आयोजन चंडीगढ़ यूनिवर्सिटी के उस मिशन के अनुरूप था, जो विद्यार्थियों के समग्र विकास और स्थायित्व पर केंद्रित है, जहाँ मानसिक स्वास्थ्य को आधुनिक शिक्षा का एक महत्वपूर्ण स्तंभ माना गया है।
कार्यक्रम में जिन प्रमुख विषयों पर चर्चा हुई, उनमें शामिल थे —
– दूरदराज़ समुदायों तक पहुँच में टेली-मेंटल हेल्थ सेवाओं के लाभ
– दैनिक जीवन में भावनात्मक सहयोग प्रदान करने में मोबाइल एप्लिकेशनों की भूमिका
– क्लिनिकल वातावरण में तकनीक-आधारित उपचारों का प्रभाव
इस संगोष्ठी ने मानसिक स्वास्थ्य पर खुली चर्चा को प्रोत्साहित किया, पुराने सामाजिक बंधनों को तोड़ते हुए आधुनिक तकनीक की संभावनाओं पर प्रकाश डाला।
यह पहल चंडीगढ़ यूनिवर्सिटी के उन निरंतर प्रयासों का हिस्सा है, जिनके माध्यम से विश्वविद्यालय मानसिक स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता फैलाने, व्यवहारिक संसाधन एवं उपकरण उपलब्ध कराने और भावनात्मक देखभाल को मजबूत बनाने के लिए कार्य कर रहा है।
विश्व स्तर पर बढ़ती मानसिक स्वास्थ्य चुनौतियों के बीच, चंडीगढ़ यूनिवर्सिटी की यह पहल एक प्रगतिशील और समयानुकूल कदम है, जो यह दर्शाती है कि तकनीक अब मानसिक स्वास्थ्य सुधार की दिशा में एक महत्वपूर्ण सहयोगी (key partner) बन चुकी है।




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