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फॉरेंसिक साइंस लैब्स में लंबित केस-फाइलों से पड़ता है प्रतिस्पर्धा और दक्षता पर बड़ा असर

फॉरेंसिक साइंस लैब (FSL) की कार्यक्षमता पर सबसे बड़ा असर बैकलॉग यानी लंबित केस-फाइलों से पड़ता है। 2014 से 2016 तक किए गए अध्ययन में सामने आई अहम बातें।

 

फॉरेंसिक साइंस लैबोरेटरी (FSL) की प्रतिस्पर्धात्मकता को प्रभावित करने वाले प्रमुख कारणों में से एक केस-फाइल बैकलॉग (Backlogs) को पाया गया। बैकलॉग से तात्पर्य उन केस-फाइलों से है जो निर्धारित समयसीमा — जैसे एक सप्ताह, एक महीना या एक वर्ष — के भीतर रिपोर्ट या प्रोसेस नहीं की जा सकीं।

 

इन लंबित फाइलों के कारण ग्राहक शिकायतों में वृद्धि, पुन: कार्य की आवश्यकता, विश्लेषण लागत में बढ़ोतरी, और जैविक नमूनों (biological samples) की गुणवत्ता में गिरावट देखी गई।

 

अध्ययन की अवधि और पद्धति

2014 से 2016 तक लगातार तीन वर्षों में केस-फाइल बैकलॉग का मूल्यांकन किया गया। इसके लिए दो प्रमुख मानकों का उपयोग किया गया— प्रोसेस की गई केस-फाइलें, और प्राप्त की गई केस-फाइलें। इन दोनों के बीच का अंतर लंबित केस-फाइलों (backlogged case-files) की संख्या दर्शाता है।

 

अध्ययन के तहत यह भी तय किया गया कि एक केस-फाइल को कितनी अवधि के बाद “बैकलॉग” माना जाएगा — उदाहरण के लिए, एक सप्ताह। इसके आधार पर बैकलॉग का आकलन मासिक या वार्षिक रूप में किया गया।

 

इसके लिए एक डेटा कलेक्शन उपकरण (data collection instrument) विकसित किया गया, जिसे तीन विभागों में लागू किया गया —

– फॉरेंसिक केमिस्ट्री लैब

– बायोलॉजी/डीएनए लैब

– टॉक्सिकोलॉजी लैब

 

हर समयावधि के लिए प्राप्त और प्रोसेस की गई केस-फाइलों की संख्या दर्ज की गई, जिससे बैकलॉग की गणना की जा सके।

 

अध्ययन में पाया गया कि 2014 से 2016 के बीच रिपोर्ट की गई केस-फाइलों की संख्या बढ़ी, जिसके परिणामस्वरूप बैकलॉग में लगातार कमी आई। हालांकि, वार्षिक आधार पर सबसे अधिक बैकलॉग प्रतिशत फॉरेंसिक टॉक्सिकोलॉजी (Forensic Toxicology) विभाग में दर्ज किया गया।

 

फॉरेंसिक केमिस्ट्री में सबसे अधिक लंबित केस-फाइलें थीं। इसके बाद बायोलॉजी/डीएनए विभाग का स्थान रहा। प्रति विश्लेषक (per analyst) प्रति वर्ष बैकलॉग की संख्या 2014 में सबसे अधिक थी, लेकिन 2016 तक इसमें लगातार गिरावट देखी गई।

 

बैकलॉग डेटा के Probability Density Functions (PDFs) और Cumulative Distribution Functions (CDFs) के विश्लेषण से यह निष्कर्ष निकला कि अधिकांश पुराने बैकलॉग बाद में हटाए जा चुके थे।

 

निष्कर्ष और सुझाव

अध्ययन के परिणामों से स्पष्ट हुआ कि केस-फाइल बैकलॉग FSL की प्रतिस्पर्धात्मकता और कार्यकुशलता को सीधा प्रभावित करता है। यदि समय पर कार्रवाई न की जाए, तो यह लैब की विश्वसनीयता, परिणाम गुणवत्ता और कार्य गति — तीनों पर असर डालता है।

 

हालांकि, यह भी पाया गया कि निरंतर और रणनीतिक प्रबंधन प्रयासों (sustained management efforts) से बैकलॉग को प्रभावी रूप से घटाया जा सकता है। अर्थात्, यदि फॉरेंसिक साइंस लैब नियमित रूप से डेटा ट्रैकिंग, रिपोर्टिंग और संसाधन आवंटन की समीक्षा करे, तो यह न केवल बैकलॉग कम करेगा बल्कि एफएसएल की समग्र दक्षता और प्रतिस्पर्धात्मकता भी बढ़ाएगा।

 

निष्कर्ष बिंदु:

– केस-फाइल बैकलॉग FSL की कार्यक्षमता को कमजोर करता है।

– 2014–2016 के अध्ययन में निरंतर सुधार देखा गया।

– टॉक्सिकोलॉजी और डीएनए विभागों में बैकलॉग सबसे अधिक पाया गया।

– प्रभावी प्रबंधन से लंबित केसों को समय पर निपटाया जा सकता है।

 

 

 

Asmita Sarkar

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