
केरल में एक बार फिर राज्यपाल और सरकार के बीच टकराव देखने को मिला है। राज्यपाल राजेंद्र विश्वनाथ अर्लेकर द्वारा कालीकट विश्वविद्यालय के कुलपति (VC) पद के लिए आवेदन आमंत्रित करने के फैसले पर राज्य सरकार ने कड़ा ऐतराज जताया है।
राज्य की उच्च शिक्षा मंत्री आर. बिंदु ने इस कदम को “अलोकतांत्रिक और निंदनीय” करार देते हुए कहा कि यह राज्य सरकार के अधिकार क्षेत्र में सीधा हस्तक्षेप है। उन्होंने कहा, “राज्यपाल का यह फैसला विश्वविद्यालयों पर राज्य सरकार के नियंत्रण को कमजोर करने की कोशिश है। सरकार अब केवल एक मूक दर्शक बनकर रह गई है।”
मंत्री ने यह भी स्पष्ट किया कि राज्य सरकार इस अधिसूचना के खिलाफ कानूनी कदम उठाने की तैयारी में है।
राज्यपाल द्वारा जारी की गई अधिसूचना 3 नवंबर को प्रकाशित हुई थी। इसके अगले ही दिन उन्होंने एक सर्च-कम-सेलेक्शन कमेटी का गठन भी मंजूर कर दिया, जिसमें कुलाधिपति, यूजीसी प्रतिनिधि और सिंडिकेट सदस्य शामिल हैं। यह समिति नए कुलपति पद के लिए नामों की सिफारिश करेगी।
आर. बिंदु ने आरोप लगाया कि यह अधिसूचना देशभर में संघ परिवार द्वारा “अत्यधिक शक्ति के इस्तेमाल” का एक और उदाहरण है। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालयों की स्वायत्तता और राज्य की संवैधानिक भूमिका को कमजोर करने की यह प्रवृत्ति लोकतंत्र के लिए चिंता का विषय है।
इस पूरे घटनाक्रम ने एक बार फिर राज्यपाल बनाम सरकार के संबंधों को सुर्खियों में ला दिया है। केरल में पिछले कुछ वर्षों से राज्यपाल और सरकार के बीच विश्वविद्यालय नियुक्तियों को लेकर विवाद लगातार बना हुआ है, जिसे लेकर कई बार न्यायिक हस्तक्षेप की भी जरूरत पड़ी है।




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