Edinbox Hindi
dsu-countrys-leading-private-university-focused-on-innovation-research-and-holistic-development

पीएम मोदी ने न्याय प्रणाली में भाषा की सरलता पर दिया जोर, कहा- न्याय की भाषा वही हो जो जनता समझे

PM Modi emphasized the need for simplicity in the judicial system

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि “न्याय की भाषा वही होनी चाहिए, जो न्याय पाने वाले को समझ आए।” उन्होंने कानूनी दस्तावेजों और फैसलों को स्थानीय भाषाओं में उपलब्ध कराने की जरूरत पर बल दिया।

 

प्रधानमंत्री राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में आयोजित ‘वाणिज्य न्यायालयों के स्थायी अंतरराष्ट्रीय मंच (Standing International Forum of Commercial Courts)’ की छठी पूर्ण बैठक को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि न्याय प्रणाली को आम लोगों के और करीब लाने के लिए कानूनी भाषा को सरल और सुलभ बनाना समय की मांग है।

 

“कानून की भाषा सरल होगी तो मुकदमेबाजी घटेगी”

अपने संबोधन में प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि कानून की जानकारी हर नागरिक तक पहुंचनी चाहिए। उन्होंने कहा, “जब कानून लोगों की अपनी भाषा में समझ आता है, तो उसका पालन बेहतर होता है और मुकदमेबाजी भी कम होती है। इसलिए कानून का मसौदा बनाते समय इस बात का ध्यान रखना जरूरी है कि वह आम व्यक्ति की समझ में आए।”

 

प्रधानमंत्री ने सुप्रीम कोर्ट की उस पहल की सराहना की, जिसमें 80 हजार से अधिक फैसलों का 18 भारतीय भाषाओं में अनुवाद किया गया है। उन्होंने भरोसा जताया कि यह प्रयास आगे हाईकोर्ट और जिला अदालतों तक भी पहुंचेगा।

 

“कानूनी जागरूकता को बढ़ाना हमारी प्राथमिकता”

प्रधानमंत्री ने कहा कि गरीब, महिला और बुजुर्ग तब तक न्याय नहीं पा सकते, जब तक उन्हें अपने अधिकारों की जानकारी न हो। उन्होंने कहा, “कानूनी जागरूकता बढ़ाना हमारी प्राथमिकता है। जो व्यक्ति अपने अधिकार नहीं जानता, वह न्याय से वंचित रह जाता है। इसलिए हमें समाज के कमजोर तबकों तक कानूनी जानकारी पहुंचानी होगी।”

 

मोदी ने युवाओं, विशेषकर कानून के छात्रों से आह्वान किया कि वे गांवों और जरूरतमंदों से जुड़ें। उन्होंने कहा, “कानून के विद्यार्थी अगर समाज से सीधा संवाद करेंगे, उन्हें उनके अधिकार समझाएंगे, तो यह न केवल लोगों के लिए फायदेमंद होगा बल्कि छात्रों के लिए भी सीखने का अवसर बनेगा।”

 

‘ईज ऑफ जस्टिस’ सुनिश्चित करना सरकार की प्राथमिकता

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि न्याय तभी सार्थक होता है जब वह सामाजिक और आर्थिक पृष्ठभूमि देखे बिना हर व्यक्ति तक पहुंचे। उन्होंने कहा, “कानूनी सहायता, न्याय को सब तक पहुंचाने का सबसे मजबूत माध्यम है। राष्ट्रीय से लेकर तालुका स्तर तक के कानूनी सेवा अधिकारी आम जनता और न्यायपालिका के बीच सेतु की भूमिका निभा रहे हैं।”

 

उन्होंने बताया कि ‘कानूनी सहायता रक्षा परामर्श प्रणाली’ (Legal Aid Defence Counsel System) के तहत पिछले तीन वर्षों में करीब 8 लाख आपराधिक मामलों का निपटारा किया गया है। प्रधानमंत्री ने कहा कि सरकार के प्रयासों ने गरीब, दलित, शोषित और वंचित वर्गों के लिए ‘Ease of Justice’ यानी न्याय तक आसान पहुंच सुनिश्चित की है।

 

‘Ease of Doing Business’ से आगे अब ‘Ease of Justice’ की दिशा में भारत

मोदी ने कहा कि पिछले 11 वर्षों में सरकार ने लगातार ‘Ease of Doing Business’ और ‘Ease of Living’ को मजबूत किया है। उन्होंने बताया कि 40 से अधिक अनावश्यक अनुपालनों को खत्म किया गया, जन विश्वास अधिनियम के जरिए 3,400 कानूनी धाराओं को गैर-अपराध घोषित किया गया, और 15,000 से अधिक पुराने अप्रासंगिक कानूनों को रद्द कर दिया गया।

 

प्रधानमंत्री ने कहा कि अब समय आ गया है जब “Ease of Doing Business और Ease of Living तभी सार्थक होंगे, जब Ease of Justice भी सुनिश्चित हो।”

 

न्याय प्रणाली में भाषा, पहुंच और पारदर्शिता – तीनों पर जोर

प्रधानमंत्री के भाषण का मूल संदेश स्पष्ट था — भारत की न्याय व्यवस्था को सरल भाषा, सुलभ पहुंच और तेज निष्पादन की दिशा में काम करना होगा। सुप्रीम कोर्ट द्वारा फैसलों के अनुवाद से लेकर कानूनी सहायता की नई प्रणालियों तक, यह पहल उस भारत की झलक दिखाती है, जहां न्याय सिर्फ अभिजात वर्ग के लिए नहीं, बल्कि हर नागरिक के लिए होगा।

 

एडइनबॉक्स टीम

Add comment

Recent posts

Most popular

Most discussed