
अगर कोई आपसे क़ानून की पढ़ाई की बात करे तो ज़्यादातर लोगों के मन में काला कोट पहने वकील या किसी कोर्टरूम की तस्वीर उभरती है। लेकिन अब यह धारणा तेजी से बदल रही है। भारत की नेशनल लॉ यूनिवर्सिटीज़ (NLUs) से कानून की पढ़ाई करने वाले छात्र अब सिर्फ़ वकील या जज नहीं बनते, बल्कि कॉरपोरेट लॉ, पॉलिसी रिसर्च, इंटरनेशनल फर्म्स, और स्टार्टअप सेक्टर में भी अपनी पहचान बना रहे हैं।
CLAT क्या है और क्यों है इतना लोकप्रिय?
कॉमन लॉ एडमिशन टेस्ट (CLAT) एक राष्ट्रीय स्तर की प्रवेश परीक्षा है, जिसके ज़रिए देशभर की 26 नेशनल लॉ यूनिवर्सिटीज़ में दाख़िला मिलता है। हर साल 75,000 से ज़्यादा उम्मीदवार लगभग 3,500 सीटों के लिए यह परीक्षा देते हैं।
CLAT का आयोजन कंसोर्शियम ऑफ़ एनएलयूज़ करता है, और यह परीक्षा हर साल दिसंबर के पहले रविवार को होती है। इस टेस्ट में छात्रों की योग्यता को पाँच सेक्शन में परखा जाता है – English, Current Affairs, Legal Reasoning, Logical Reasoning और Quantitative Techniques।
सफल अभ्यर्थियों को BA-LLB, BBA-LLB, या B.Com-LLB जैसे पाँच वर्षीय इंटीग्रेटेड लॉ प्रोग्राम में प्रवेश मिलता है। इसके अलावा, एक वर्षीय पोस्टग्रेजुएट कोर्स (LLM) के लिए भी CLAT स्कोर का उपयोग किया जाता है।
क़ानून की पढ़ाई का बदलता ढांचा
पहले छात्रों को तीन साल ग्रैजुएशन और फिर तीन साल लॉ की पढ़ाई करनी पड़ती थी। लेकिन अब इंटीग्रेटेड फाइव-ईयर कोर्स के ज़रिए दोनों डिग्रियां साथ पूरी की जा सकती हैं।
जोधपुर नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी के पूर्व छात्र और अब लॉ एजुकेटर केशव मालपानी बताते हैं — “CLAT की सबसे बड़ी खूबी यह है कि कोई भी छात्र, चाहे वह साइंस, कॉमर्स या आर्ट्स स्ट्रीम का हो, यह परीक्षा दे सकता है। लोग सोचते हैं कि लॉ का मतलब सिर्फ़ कोर्टरूम है, लेकिन अब यह कॉरपोरेट, पॉलिसी और टेक्नोलॉजी सेक्टर तक पहुंच चुका है।”
लॉ में करियर के नए रास्ते
केशव के मुताबिक अब लॉ पढ़ने वालों के लिए कई विकल्प खुले हैं:
कॉरपोरेट लॉयर: कंपनियों के लिए कानूनी अनुपालन, मर्जर-एक्विज़िशन और कॉन्ट्रैक्ट की जिम्मेदारी संभालना।
लिटिगेशन: पारंपरिक वकालत यानी कोर्ट में प्रैक्टिस करना।
ज्यूडिशियल सर्विस: न्यायिक सेवाओं में जाकर जज बनना।
टीचिंग: लॉ प्रोफेसर या रिसर्चर के रूप में अकादमिक क्षेत्र में योगदान देना।
उन्होंने बताया कि जैसे-जैसे भारत में कॉरपोरेट सेक्टर बढ़ रहा है, वैसे ही कॉरपोरेट लॉ फर्म्स, बैंक, IT कंपनियां और मल्टीनेशनल कंपनियां लॉ ग्रेजुएट्स को उच्च पैकेज पर भर्ती कर रही हैं।
इंटरनेशनल अवसर और सैलरी ट्रेंड
टॉप NLU जैसे बेंगलुरु, हैदराबाद, भोपाल, कोलकाता और जोधपुर से पास होने वाले छात्रों को लंदन, दुबई और सिंगापुर की प्रमुख लॉ फर्म्स में प्लेसमेंट के अवसर मिलते हैं।
ओडिशा NLU की छात्रा कनिका जैन कहती हैं, “कॉरपोरेट लॉ पढ़ने वालों की शुरुआती सैलरी सालाना 15 से 25 लाख रुपये तक होती है। यह परफॉर्मेंस, ग्रेड्स और इंटर्नशिप्स पर निर्भर करता है।”
फीस की बात करें तो यह हर यूनिवर्सिटी में अलग है — ओडिशा NLU में करीब ₹1.4 लाख, जबकि मेघालय NLU में लगभग ₹1.9 लाख प्रति वर्ष है।
CLAT की तैयारी कैसे करें?
कनिका के अनुसार, “इस परीक्षा में Maths को हल्के में नहीं लेना चाहिए। यह सेक्शन ऐसा है जिसमें आप परफेक्ट स्कोर कर सकते हैं।”
वह सुझाव देती हैं कि:
– रोज़ाना मॉक टेस्ट दें, ताकि असली परीक्षा में समय प्रबंधन आसान हो।
– करेंट अफेयर्स और GK के लिए नियमित नोट्स बनाएं।
– मानसिक शांति और नींद भी उतनी ही जरूरी है जितनी पढ़ाई।
केशव मालपानी जोड़ते हैं कि हिंदी माध्यम के छात्रों को अंग्रेज़ी सुधारने पर विशेष ध्यान देना चाहिए, क्योंकि लॉ से जुड़े ज्यादातर दस्तावेज़ और अदालत की भाषा अंग्रेज़ी होती है।
स्वयं तैयारी बनाम कोचिंग
आज ऑनलाइन माध्यमों से CLAT की तैयारी संभव है, लेकिन केशव कहते हैं— “इंटरनेट पर बहुत सारा कंटेंट है, लेकिन हर चीज़ उपयोगी नहीं होती। इसलिए एक सही दिशा या मेंटर बहुत जरूरी है।”
CLAT कोचिंग की फीस सामान्यतः ₹50,000 से ₹1 लाख तक होती है, जो सेंटर के शहर या ऑनलाइन मोड पर निर्भर करती है।
योग्यता और सीटों की जानकारी
UG परीक्षा के लिए उम्मीदवार को 12वीं में कम से कम 45% अंक (आरक्षित वर्ग के लिए 40%) लाना जरूरी है। PG (LLM) के लिए LLB में 50% अंक आवश्यक हैं, जिसमें आरक्षित वर्ग को 5% की छूट दी जाती है। 12वीं में अध्ययनरत छात्र भी आगामी CLAT परीक्षा में बैठ सकते हैं।
सीटें सीमित हैं: 26 NLUs में कुल लगभग 3,000 से 3,500 सीटें हैं।
ध्यान रहे, NLU दिल्ली अपनी अलग परीक्षा AILET (All India Law Entrance Test) आयोजित करती है, जो CLAT के एक सप्ताह बाद होती है।
CLAT क्यों है युवाओं के बीच आकर्षण का केंद्र?
क़ानून की पढ़ाई अब सिर्फ़ कोर्टरूम तक सीमित नहीं रही। यह करियर अब कॉरपोरेट, इंटरनेशनल रिलेशन, बिजनेस एडवाइजरी, टेक्नोलॉजी लॉ और स्टार्टअप पॉलिसी जैसे कई नए क्षेत्रों में दरवाजे खोल चुका है।
युवा अब कानून को सत्ता या बहस का माध्यम नहीं, बल्कि सशक्तिकरण और परिवर्तन का जरिया मान रहे हैं। यही वजह है कि CLAT अब भारत के सबसे प्रतिष्ठित और चुनौतीपूर्ण एग्ज़ाम्स में से एक बन गया है।




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