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QS Sustainability Rankings 2026: टॉप-200 में नहीं एक भी भारतीय संस्थान, आईआईटी दिल्ली की रैंक भी गिरी 

QS Sustainability Rankings 2026: Not a single Indian institution in the top 200, IIT Delhi's ranking also dropped

18 नवंबर 2025 को QS (Quacquarelli Symonds) ने अपनी World University Rankings: Sustainability 2026 जारी की, जिसमें इस बार भारत की 103 संस्थाएँ सूची में जगह बनाने में सफल रहीं। यह संख्या भारत की बढ़ती वैश्विक मौजूदगी को दर्शाती है। लेकिन इन सकारात्मक आंकड़ों के बीच एक महत्वपूर्ण तथ्य चिंता पैदा करता है—एक भी भारतीय संस्थान QS सस्टेनेबिलिटी रैंकिंग के शीर्ष 200 में नहीं पहुंच पाया।

भारत की स्थिति को समझने के लिए आंकड़ों पर नजर डालना जरूरी है। QS के अनुसार, भारत उन देशों में चौथे स्थान पर है जिनके 100 से अधिक विश्वविद्यालय इस रैंकिंग में शामिल हुए हैं—यह वैश्विक स्तर पर भारत की मजबूत उपस्थिति का संकेत है। 

वहीं, भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (IIT) दिल्ली ने भारत में सर्वोच्च स्थान हासिल किया है। हालांकि, इस साल इसकी रैंक 171 से गिरकर 205 पर पहुंच गई है। QS रिपोर्ट बताती है कि रैंकिंग गिरने के बावजूद IIT दिल्ली का कुल स्कोर बढ़ा है, और संस्थान ने 79.9 का सस्टेनेबिलिटी स्कोर अर्जित किया है।

अन्य IITs का प्रदर्शन भी मिश्रित रहा। IIT बॉम्बे की रैंक घटकर 236 पर आ गई, पिछले वर्ष यह 235 था। IIT खड़गपुर 202 से फिसलकर 236 पर पहुंच गया, जो बड़ी गिरावट है। QS रिपोर्ट के अनुसार कुल 15 IITs सूची में शामिल हैं, जिनमें से 6 संस्थानों ने पिछले वर्ष की तुलना में सुधार किया है।

शीर्ष 700 में शामिल अन्य भारतीय विश्वविद्यालय

  1. वेल्लोर इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी— 352
  2. IIT रुड़की — 352
  3. शूलिनी यूनिवर्सिटी — 522
  4. लवली प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी — 544
  5. पंजाब यूनिवर्सिटी — 569
  6. बनारस हिंदू विश्वविद्यालय (BHU) — 594
  7. NIT राउरकेला — 652
  8. IIT (BHU) वाराणसी — 672
  9. UPES — 682

अब सवाल यह है कि इतने बड़े पैमाने पर भारतीय संस्थानों की उपस्थिति के बावजूद शीर्ष 200 में एक भी नाम क्यों नहीं है?

एक प्रमुख कारण है तेज़ वैश्विक प्रतिस्पर्धा—QS की सस्टेनेबिलिटी रैंकिंग में दुनिया भर के करीब 2,000 संस्थान शामिल हैं (Top Universities)। इसके अलावा, कई भारतीय संस्थानों को अब भी डेटा और रिपोर्टिंग प्रक्रियाओं को मजबूत करने की आवश्यकता है। QS के अनुसार, बेहतर रिपोर्टिंग उन संस्थानों को लाभ दे रही है जो इसे प्राथमिकता दे रहे हैं।

IIT दिल्ली का उदाहरण बताता है कि स्कोर बढ़ने के बावजूद रैंक गिर सकती है, क्योंकि अन्य संस्थान तेजी से सुधार कर रहे हैं।

सस्टेनेबिलिटी रैंकिंग का ढांचा भी काफी व्यापक है। QS इसमें तीन स्तंभों—पर्यावरण, सामाजिक प्रभाव, और गवर्नेंस—को मापता है, और यह अभी विकसित हो रहा मूल्यांकन तंत्र है।

सवाल यह नहीं है कि भारत कहाँ खड़ा है, बल्कि यह कि उसे कहाँ पहुंचना चाहिए। शीर्ष 200 में जगह न बनाना निश्चित रूप से एक चेतावनी है कि भारत के संस्थानों को सस्टेनेबिलिटी मानकों पर और तेजी से काम करना होगा—चाहे वह पर्यावरणीय स्थिरता हो, कैंपस जीवन की गुणवत्ता, ऊर्जा दक्षता या संस्थागत गवर्नेंस।

फिर भी, उम्मीद की एक मजबूत किरण दिखती है—103 भारतीय संस्थानों का शामिल होना। यह संकेत है कि देश की उच्च शिक्षा प्रणाली सस्टेनेबिलिटी को लेकर अधिक सजग हो रही है। कई संस्थानों ने पहली बार सूची में जगह बनाई है और कई ने अपने स्कोर में सुधार दिखाया है।

अब समय है कि भारतीय विश्वविद्यालय सस्टेनेबिलिटी को केवल औपचारिकता नहीं, बल्कि अपनी नीतियों और विज़न का केंद्रीय हिस्सा बनाएं। व्यवस्थित रिपोर्टिंग, मजबूत नीतिगत पहल, छात्रों के कल्याण, ऊर्जा उपयोग और गवर्नेंस सुधार जैसे कदम ही भारत को वैश्विक रैंकिंग के उच्च पायदान तक पहुंचा सकते हैं।

भारत के पास क्षमता है—अब जरूरत है सही दिशा और सतत प्रयास की।

 

एडइनबॉक्स टीम

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