
अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) नई दिल्ली ने मिर्गी (एपिलेप्सी) के ऐसे मरीजों के लिए एक बड़ा समाधान पेश किया है, जिन पर दवाओं का असर नहीं होता। एम्स के न्यूरोसर्जन्स ने बिना चीरा लगाए और न्यूनतम दर्द के साथ मिर्गी के इलाज की एक आधुनिक तकनीक विकसित की है। इस तकनीक का नाम है रोबोटिक थर्मोकोएगुलेटिव हेमिस्फेरोटोमी (ROTech / ROTCM)।
यह प्रक्रिया उन मरीजों के लिए खास तौर पर कारगर है, जिन्हें जटिल और दवा-रोधी मिर्गी होती है—ऐसे मामलों में अक्सर बच्चे अधिक प्रभावित होते हैं।
पुरानी सर्जरी के मुकाबले सुरक्षित विकल्प
पहले मिर्गी की सर्जरी में सिर की हड्डी का बड़ा हिस्सा खोलना पड़ता था। पुरानी सर्जरी में बड़ा चीरा लगता था जिसमें अधिक खून बहने का खतरा होने के साथ ही संक्रमण की आशंका रहती थी। इसके अलावा 10–12 लाख रुपये तक का खर्च आता था और 4–6 हफ्ते की लंबी रिकवरी रहती थी। सफलता दर भी सिर्फ 60–70% तक होती थी। लेकिन नई ROTech तकनीक इस पूरे प्रोसेस को बेहद सरल बना देती है।
ROTech तकनीक कैसे काम करती है?
इस नई सर्जरी में खोपड़ी नहीं खोली जाती, बल्कि सिर में सिर्फ सुई जितना पतला मार्ग बनाया जाता है। फिर एक बेहद पतले उपकरण से दिमाग के उस हिस्से को गर्म कर निष्क्रिय कर दिया जाता है, जहां से दौरे शुरू होते हैं।
इस प्रक्रिया की खासियत यह है कि इसमें ऑपरेशन का समय 45–60 मिनट होता है और वह भी बिना चीरा, बिना टांका। खून बहने का खतरा लगभग शून्य होता है और मरीज 24 घंटे में घर जा सकता है। सफलता दर भी 90–95% है और खर्च भी मात्र 1.25–1.5 लाख रुपये।
एम्स के न्यूरोसर्जरी विभागाध्यक्ष प्रो. सरत चंद्रा, जिन्होंने यह तकनीक विकसित की है, कहते हैं कि यह उपचार खासतौर पर बच्चों के लिए बेहद प्रभावी है। बच्चों में तेजी से रिकवरी और बेहतर न्यूरोलॉजिकल सुधार देखने को मिले हैं।
100 से ज्यादा मरीजों को लाभ, बच्चों में बेहतर नतीजे
अब तक इस तकनीक से एम्स में 100 से अधिक मरीजों का इलाज हो चुका है, जिनमें आधे से ज्यादा बच्चे थे। इस तकनीक से इलाज के बाद बच्चों में बोलने और चलने की क्षमता तेजी से सुधरी, दौरे लगभग तुरंत बंद हुए और रिकवरी बेहद तेज रही।
इस तकनीक के नतीजों को देखते हुए विदेशों में भी इसकी मांग बढ़ रही है। जर्नल ऑफ न्यूरो सर्जरी, जो सर्जरी के क्षेत्र का प्रतिष्ठित अंतरराष्ट्रीय जर्नल है, में भी इसे प्रमुखता से प्रकाशित किया गया है।
भारत में मिर्गी के मरीजों की बड़ी संख्या
एम्स न्यूरोलॉजी विभागाध्यक्ष प्रो. मंजरी त्रिपाठी के मुताबिक दुनिया में मिर्गी के मरीज 5 करोड़ से अधिक हैं जबकि भारत में करीब 1.2 करोड़ लोग इसके मरीज हैं। इनमें से करीब 36 लाख लोग दवा से ठीक नहीं होते। ऐसे मरीजों के लिए सर्जरी ही एकमात्र प्रभावी तरीका माना जाता है। एम्स इस समय दुनिया के सबसे बड़े सर्जिकल एपिलेप्सी कार्यक्रमों में से एक चला रहा है।
विदेशों में भी इस्तेमाल: इजरायल में पहली ROTech सर्जरी सफल
इजरायल के तेल अवीव मेडिकल सेंटर में वहां के न्यूरोसर्जन प्रो. जोनाथन रोथ और प्रो. इदो स्ट्राउस ने एम्स में ट्रेनिंग लेने के बाद इस तकनीक का उपयोग किया। उन्होंने 12 साल की एक बच्ची का सफल ऑपरेशन किया।
सर्जरी से पहले बच्ची बोल नहीं पा रही थी, दाहिना हाथ-पैर काम नहीं कर रहा था और लगातार दौरे पड़ रहे थे। सर्जरी के अगले ही दिन बच्ची सामान्य बातचीत करने लगी, हाथ-पैर चलाने लगी और उसके सभी दौरे बंद हो गए।
सस्ती, सुरक्षित और कम दर्द वाली तकनीक
प्रो. सरत चंद्रा का कहना है कि, “हमारा लक्ष्य है कि गंभीर मिर्गी से जूझ रहे बच्चों को ऐसा उपचार मिले, जो सुरक्षित हो, सस्ता हो और कम दर्द वाला हो। ROTech उनके लिए नई जिंदगी का मौका देता है।”
एम्स की यह तकनीक न केवल भारत बल्कि दुनिया के लिए भी मिर्गी के सर्जिकल उपचार में नई राह खोलती है। यह उन लाखों रोगियों के लिए उम्मीद की किरण है, जिन पर दवाओं का असर नहीं होता। तेज रिकवरी, कम खर्च और उच्च सफलता दर के साथ यह तकनीक भविष्य में बड़े बदलाव की संभावना रखती है।




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