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A new agricultural revolution is necessary for India's $10 trillion economy, Experts at the CII Summit

सीएसआईआर की बड़ी उपलब्धि: सिकल सेल एनीमिया की जल्दी पहचान के लिए स्वदेशी किट तैयार

CSIR's major achievement: Indigenous kit for early detection of sickle cell anemia developed

काउंसिल ऑफ साइंटिफिक एंड इंडस्ट्रियल रिसर्च (CSIR) देश में विज्ञान और तकनीक को जमीन से जोड़ते हुए उन चुनौतियों पर काम कर रहा है, जो सीधे तौर पर आम लोगों के जीवन, उद्योगों और राष्ट्र की रणनीतिक जरूरतों को प्रभावित करती हैं। इसमें खाद्य, जल, ऊर्जा, स्वास्थ्य और सुरक्षा से जुड़े मुद्दे प्रमुख हैं। सीएसआईआर की महानिदेशक डॉ. एन. कलैसेल्वी के अनुसार, भारत के विकसित राष्ट्र बनने की राह में सबसे जरूरी है—तकनीकों का स्वदेशीकरण और उद्योगों के साथ मजबूत साझेदारी।

जमशेदपुर में आयोजित सीएसआईआर–नेशनल मेटलर्जिकल लेबोरेटरी (NML) की प्लैटिनम जयंती समारोह के दौरान डॉ. कलैसेल्वी ने बताया कि संस्था दो बड़े लक्ष्यों पर काम कर रही है—पहला, लैब में तैयार शोध और नवाचारों को सीधे भारतीय उद्योगों तक पहुंचाना, और दूसरा, ऐसी तकनीकें विकसित करना जो लोगों के जीवन की गुणवत्ता में बदलाव ला सकें। 

सिकल सेल एनीमिया की जल्दी पहचान के लिए स्वदेशी किट तैयार

सीएसआईआर ने स्वास्थ्य क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। डॉ. कलैसेल्वी ने बताया कि संस्था ने सिकल सेल एनीमिया की पहचान के लिए एक छोटा, तेज और किफायती डायग्नोस्टिक किट विकसित किया है। यह किट सूखे खून की एक बूंद से मात्र 20 मिनट में जांच कर सकता है कि व्यक्ति को यह बीमारी है या नहीं।

यह तकनीक पूरी तरह स्वदेशी है और देश के सुदूर इलाकों में भी बड़े स्तर पर स्क्रीनिंग को आसान बना रही है। अब तक 25 लाख से अधिक लोगों की जांच की जा चुकी है, जो इस अभियान की व्यापकता को दर्शाता है।

कार्बन कैप्चर तकनीक पर भी फोकस

जलवायु परिवर्तन और बढ़ते प्रदूषण को देखते हुए सीएसआईआर कार्बन कैप्चर, यूटिलाइजेशन और स्टोरेज (CCUS) तकनीक पर भी तेज़ी से काम कर रहा है। इस तकनीक के जरिए उद्योगों से निकलने वाली कार्बन डाइऑक्साइड को कैप्चर कर सुरक्षित रूप से जमा किया जा सकता है या फिर उपयोगी उत्पादों में बदलकर दोबारा इस्तेमाल किया जा सकता है।

देश में ऊर्जा संक्रमण और नेट-ज़ीरो लक्ष्यों के दृष्टिकोण से यह पहल बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

तकनीकी आत्मनिर्भरता की दिशा में बड़ा कदम

डॉ. कलैसेल्वी ने कहा कि सीएसआईआर का प्राथमिक उद्देश्य प्रयोगशालाओं से निकलने वाली तकनीक को सीधे उद्योगों और आम जनता तक पहुंचाना है। उनका मानना है कि भारत तभी आत्मनिर्भर बन सकता है जब देश की अपनी तकनीकें उद्योगों में अपनाई जाएं और समाज को उनका प्रत्यक्ष लाभ मिले।

सीएसआईआर की ये कोशिशें भारत को विकासशील से विकसित राष्ट्र की ओर ले जाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं।

यह स्पष्ट है कि सीएसआईआर न केवल शोध कर रहा है, बल्कि शोध को वास्तविक बदलाओं में बदलने की दिशा में भी तेजी से आगे बढ़ रहा है। स्वास्थ्य, पर्यावरण और उद्योग—तीनों मोर्चों पर यह संस्थान भारत की वैज्ञानिक प्रगति को नई दिशा दे रहा है।  

एडइनबॉक्स टीम

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