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अमेरिका में 12वीं कक्षा के 78% छात्र गणित में कमजोर, विशेषज्ञों ने चेताया- ‘बौद्धिक बढ़त खतरे में’

78% of 12th-grade students in the US are weak in math, experts warn—“Intellectual edge in jeopardy.”

अमेरिका अपनी उन कक्षाओं पर हमेशा गर्व करता रहा है, जिन्होंने दुनिया को विश्लेषणात्मक सोच रखने वाले छात्रों, नवप्रवर्तकों और समस्या-समाधानकर्ताओं से परिचित कराया। लेकिन अब वही गौरव खतरे में दिख रहा है। ओहियो के GOP गवर्नर उम्मीदवार विवेक रामास्वामी द्वारा साझा किए गए हालिया आंकड़े इस संकट की गंभीरता को सामने लाते हैं।

उनके मुताबिक, 12वीं कक्षा के 78% छात्र गणित में दक्ष नहीं हैं, जबकि 65% छात्र ग्रेड-लेवल पर पढ़ भी नहीं पा रहे हैं। रामास्वामी ने कहा, “यह कड़वी सच्चाई है और अब इसे सुधारना राज्यों की जिम्मेदारी है।” यह वही संकट है जिस पर नीति निर्माता वर्षों से आंखें मूंदे बैठे हैं।

अमेरिका के श्रम विभाग ने भी इन संख्याओं को “अस्वीकार्य” बताया है, जो यह दर्शाती हैं कि अमेरिकी शिक्षा प्रणाली उन मूल कौशलों को बचाने के लिए संघर्ष कर रही है, जिन पर कभी अमेरिकी शैक्षणिक उत्कृष्टता आधारित थी।

आंकड़े संकट से ज्यादा खतरनाक कहानी बताते हैं

साक्षरता और संख्यात्मकता की गिरती क्षमता कोई नई समस्या नहीं है। तकनीकी विकर्षण, बिखरा हुआ पाठ्यक्रम, सोशल मीडिया का असर और गहरी सामाजिक असमानताएँ वर्षों से छात्रों की सीखने की क्षमता को कमजोर कर रही हैं।

आज के छात्रों की कक्षा में तर्क के बजाय टेस्ट प्रिपरेशन, पढ़ने की आदत की जगह छोटी-छोटी सामग्री, और जिज्ञासा के बजाय मानकीकृत बेंचमार्क ने जगह ले ली है।परिणामस्वरूप, एक ऐसी पीढ़ी तैयार हो रही है जो उच्च शिक्षा, नौकरी और नागरिक जीवन की अपेक्षाओं को पूरा करने के लिए तैयार नहीं है। 

गिरावट के तथ्य साफ और कठोर हैं

यह कोई राजनीतिक बयान नहीं, बल्कि आधिकारिक डेटा है। NAEP (नेशनल असेसमेंट ऑफ एजुकेशनल प्रोग्रेस) के अनुसार— पढ़ने की दक्षता 2013 में 74% से गिरकर 2024 में 67% रह गई, गणित दक्षता 65% से गिरकर 55% हो गई। महामारी ने गिरावट तेज की, लेकिन इसकी शुरुआत उससे काफी पहले हो चुकी थी।

विशेषज्ञों का मानना है कि आज के छात्र न तो गहराई से पढ़ पा रहे हैं, न विश्लेषणात्मक सोच विकसित कर पा रहे हैं, और न ही जटिल समस्याएँ हल कर पा रहे हैं—जो कभी अमेरिकी शिक्षा की पहचान हुआ करती थीं।

टेक्नोलॉजी और सोशल मीडिया ने बढ़ाया दबाव

विशेषज्ञों का कहना है कि लगातार स्क्रीन टाइम, शॉर्ट फॉर्म कंटेंट और सोशल मीडिया ने छात्रों की ध्यान अवधि और संलग्नता पर गहरा असर डाला है।

गणित पढ़ाई में तर्क की जगह प्रक्रियाओं पर जोर, पढ़ाई के लिए छोटे-छोटे स्निपेट्स पर निर्भरता, और गहन अध्ययन में गिरावट ने सीखने की गुणवत्ता कमजोर की है।

असमानता ने संकट को और गहरा किया

कम आय वाले परिवारों और संसाधन-विहीन स्कूलों के छात्र इस गिरावट का सबसे ज्यादा असर झेल रहे हैं। STEM शिक्षा में लैंगिक असमानता फिर बढ़ रही है क्योंकि लड़कियों के लिए चलने वाले कई कार्यक्रम बंद हो चुके हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि वर्तमान प्रणाली असमानता कम करने के बजाय उसे और बढ़ा रही है।

भविष्य पर खतरा: आर्थिक प्रतिस्पर्धा भी दांव पर

रामास्वामी का बयान विवादों में घिरा, लेकिन जिस सच्चाई की ओर उन्होंने इशारा किया वह अनदेखी नहीं की जा सकती। यदि पढ़ने और गणित की क्षमता में गिरावट जारी रही, तो इसका सीधा असर अमेरिकी अर्थव्यवस्था, कार्यबल की गुणवत्ता, और लोकतांत्रिक समझ पर पड़ने वाला है।

विशेषज्ञ जोर देकर कहते हैं कि इस संकट को रोकने के लिए शिक्षा में बड़े बदलाव जरूरी हैं, मसलन- पूछताछ-आधारित STEM शिक्षा, लंबी पढ़ाई और विश्लेषणात्मक कार्य, जटिल समस्या-समाधान, और कमजोर स्कूलों के लिए विशेष समर्थन।

अमेरिका के सामने कठिन सवाल

यह सिर्फ राजनीति नहीं—यह आने वाली पीढ़ी की बौद्धिक क्षमता का मुद्दा है।

अब असली सवाल यह है कि क्या अमेरिका अपनी शिक्षा में गिरावट को समय रहते रोक पाएगा? या फिर एक पूरी पीढ़ी बुनियादी कौशलों की कमी के साथ बड़े होने को मजबूर होगी?

जब तक निर्णायक कदम नहीं उठाए जाते, तब तक अमेरिका अपनी वह बौद्धिक बढ़त खोने के जोखिम में है, जिस पर वह दशकों से गर्व करता आया है। 

एडइनबॉक्स टीम

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