Edinbox Hindi
cucet-2026-vs-other-private-university-entrance-exams-which-is-the-better-option

बच्चों की सुरक्षा के लिए सख्त हुआ नियम, अब कफ सिरप बिना डॉक्टर की पर्ची के नहीं मिलेगा

Cough syrups will no longer be available without a doctor's prescription

बच्चों में कफ सिरप से जुड़े दुष्प्रभाव और कई मौतों के बाद केंद्र सरकार ने इसके अनियंत्रित उपयोग पर रोक लगाने के लिए कड़ा कदम उठाया है। अब अधिकतर कफ सिरप मेडिकल दुकानों पर डॉक्टर की पर्ची के बिना नहीं मिल सकेंगे। दुकानों को हर प्रिस्क्रिप्शन का पूरा रिकॉर्ड रखना होगा और गुणवत्ता जांच से जुड़े नए मानकों का पालन अनिवार्य होगा।

औषध परामर्श समिति ने दी मंजूरी, नियम हुए और कड़े

केंद्रीय औषध परामर्श समिति (Drugs Consultative Committee) ने कफ सिरप को उस श्रेणी से हटाने की मंजूरी दे दी है, जिसके तहत इसे विशेष लाइसेंस या निगरानी नियमों से छूट मिली हुई थी। इसके बाद अब इन सिरप का बिक्री-प्रक्रिया अधिक सख्त नियमों के तहत आएगी और डॉक्टर की सलाह अनिवार्य होगी।

इस बदलाव का मुख्य उद्देश्य है—खांसी-जुकाम जैसी सामान्य बीमारी में भी लोग खुद दवा लेने के बजाय चिकित्सकीय सलाह पर भरोसा करें।

विदेशों और भारत में मौतों के बाद बढ़ी सख्ती

समिति के अनुसार, पिछले तीन वर्षों में भारत से निर्यात किए गए कई कफ सिरपों में डाई-एथिलीन ग्लाइकोल (DEG) और ईथिलीन ग्लाइकोल (EG) जैसे खतरनाक रसायनों की मौजूदगी पाई गई। इन रसायनों के कारण गाम्बिया, उज्बेकिस्तान और कैमरून में बच्चों की मौतों की पुष्टि हुई थी। 

हाल में मध्य प्रदेश में भी संदिग्ध कफ सिरप के सेवन से बच्चों की मौतों ने चिंता बढ़ा दी। इसके बाद यह स्पष्ट हो गया कि बिना निगरानी बिक्री से गंभीर खतरे पैदा हो सकते हैं।

बच्चों की सुरक्षा सरकार की प्राथमिकता

स्वास्थ्य मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार, सरकार की पहली प्राथमिकता बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित करना है। नए नियमों से न सिर्फ गलत दवा सेवन और दुष्प्रभाव कम होंगे, बल्कि कफ सिरप के नशे की प्रवृत्ति पर भी अंकुश लगेगा।

रिपोर्ट्स में यह भी सामने आया है कि कई अभिभावक बिना डॉक्टर से पूछे बच्चों को कफ सिरप देना शुरू कर देते हैं, जो कई बार खतरनाक साबित होता है।

कफ सिरप की अनियंत्रित बिक्री पर सरकार की यह सख्ती दवा सुरक्षा को लेकर एक महत्वपूर्ण कदम है। डॉक्टर की पर्ची अनिवार्य होने से दुरुपयोग पर रोक लगेगी, गुणवत्ताहीन दवाओं की पहचान आसान होगी और बच्चों की जान जोखिम में पड़ने की आशंका कम होगी। यह कदम आने वाले समय में दवा बाजार को अधिक सुरक्षित और जवाबदेह बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।

 

एडइनबॉक्स टीम

Add comment

Recent posts

Most popular

Most discussed