
भारतीय सेना अब युवाओं के लिए एक अनूठा इंटर्नशिप प्रोग्राम शुरू करने जा रही है। यह कार्यक्रम युवाओं को तकनीक, साइबर सिक्योरिटी, एआई और ड्रोन जैसे आधुनिक और उभरते क्षेत्रों में सेना के साथ काम करने का अवसर देगा।
उप-सेना प्रमुख लेफ्टिनेंट जनरल राकेश कपूर ने समाचार एजेंसी एएनआई से बातचीत में बताया कि ‘सेना इंटर्नशिप प्रोग्राम’ का उद्देश्य देश के युवाओं को साइबर, एआई, ड्रोन टेक्नोलॉजी, जनसंचार और लेखा जैसे विभिन्न क्षेत्रों में सेना के साथ व्यावहारिक तरीके से काम करने का मौका देना है।
छात्रों की बढ़ती रुचि, अब हर साल आयोजित होगा कार्यक्रम
लेफ्टिनेंट जनरल कपूर के अनुसार, इस इंटर्नशिप ने छात्रों की बड़ी रुचि को आकर्षित किया है। इस साल हुए पायलट प्रोग्राम का अनुभव सेना के लिए काफी उत्साहजनक रहा। अब यह एक वार्षिक कार्यक्रम के रूप में आयोजित किया जाएगा।
यह वार्षिक इंटर्नशिप अकादमिक पढ़ाई और वास्तविक दुनिया में उसके उपयोग के बीच की खाई को भरने के लिए डिजाइन की गई है। यह युवाओं को राष्ट्रीय विकास और सेना के आधुनिकीकरण से जुड़े अहम क्षेत्रों में काम का वास्तविक अनुभव प्रदान करेगी।
नागरिक और सैनिकों के बीच मजबूत समन्वय का प्रयास
सेना अधिकारियों के मुताबिक, यह इंटर्नशिप प्रोग्राम नागरिकों और सैनिकों के बीच बेहतर समन्वय बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। सेना शैक्षणिक संस्थानों, स्टार्ट-अप्स और राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी एजेंसियों के साथ मिलकर इस कार्यक्रम को आगे बढ़ा रही है। इसका उद्देश्य साझा नवाचार और संसाधनों के बेहतर उपयोग के जरिए भारत की सुरक्षा को मजबूत करना है।
सेना में एआई को बढ़ावा देने की बड़ी पहल
अधिकारियों ने बताया कि दिसंबर 2024 में सेना प्रमुख द्वारा शुरू किया गया एआई रिसर्च एंड इनक्यूबेशन सेंटर सेना में तकनीकी बदलाव के केंद्र में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस को लाने का प्रयास है। यह पहल स्टार्ट-अप्स, उद्योग जगत और शिक्षा क्षेत्र के सहयोग से चलाई जा रही है।
इस केंद्र को आईआईटी बॉम्बे के प्रोफेसर गणेश और आईआईएससी बेंगलुरु के प्रोफेसर शशि मार्गदर्शन दे रहे हैं। सेना को उम्मीद है कि यह पहल भविष्य में देश को तकनीक के क्षेत्र में मजबूत बढ़त दिलाएगी।




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