
केंद्र सरकार ने संसद में देश की स्वास्थ्य व्यवस्था से जुड़े महत्वपूर्ण आंकड़े पेश किए हैं। सरकार के अनुसार भारत में डॉक्टर–मरीज अनुपात अब 1:811 है। हालांकि यह अनुपात WHO के मानक (1:1000) के आसपास पहुंच चुका है, लेकिन ग्रामीण और दूरदराज क्षेत्रों में डॉक्टरों की कमी अब भी एक बड़ी चुनौती है।
डॉक्टरों की संख्या कितनी?
राज्यसभा में लिखित जवाब देते हुए केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा ने बताया कि देश में 13,88,185 रजिस्टर्ड एलोपैथिक डॉक्टर और 7,51,768 रजिस्टर्ड आयुष डॉक्टर उपलब्ध हैं। यदि इनमें से लगभग 80% डॉक्टर सक्रिय रूप से प्रैक्टिस कर रहे हों, तो देश में डॉक्टर–मरीज अनुपात 1:811 बैठता है।
2014 के बाद मेडिकल इंफ्रास्ट्रक्चर में बड़ा विस्तार
स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि पिछले एक दशक में मेडिकल शिक्षा क्षेत्र में अभूतपूर्व वृद्धि हुई है।
2014 की तुलना में आंकड़े इस तरह बदले हैं —
मेडिकल कॉलेज: 387 → 818
MBBS सीटें: 51,348 → 1,28,875
PG सीटें: 31,185 → 82,059
सरकार का कहना है कि इससे आने वाले वर्षों में डॉक्टरों की उपलब्धता और बढ़ेगी।
गांव और दूरदराज के क्षेत्रों में डॉक्टरों की कमी कैसे दूर होगी?
1. नए मेडिकल कॉलेजों की स्थापना
सेंट्रली स्पॉन्सर्ड स्कीम के तहत जिला या रेफरल अस्पतालों से जुड़े मेडिकल कॉलेज खोले जा रहे हैं। कुल 157 मेडिकल कॉलेज मंजूर किये गए हैं और इनमें से 137 कॉलेज शुरू हो चुके हैं। यह प्रयास ग्रामीण इलाकों में स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
2. फैमिली एडॉप्शन प्रोग्राम (FAP)
MBBS कोर्स में शामिल इस कार्यक्रम के तहत मेडिकल कॉलेज एक गांव गोद लेते हैं और छात्र गांव के परिवारों को गोद लेते हैं। इससे वैक्सीन, बच्चों की ग्रोथ, पीरियड हाइजीन, पोषण, आयरन-फॉलिक एसिड गोलियां, मच्छर से बचाव, और दवा समय पर देने जैसे मामलों में नियमित फॉलो-अप हो रहा है। परिवारों को सरकारी स्वास्थ्य योजनाओं की जानकारी भी दी जाती है।
3. जिला रेजिडेंसी प्रोग्राम
नेशनल मेडिकल कमीशन के नियमों के तहत PG के दूसरे और तीसरे वर्ष के छात्रों को जिला अस्पतालों में पोस्टिंग दी जा रही है। ग्रामीण व ट्राइबल क्षेत्रों में जाने वाले स्पेशलिस्ट डॉक्टरों को हार्ड एरिया अलाउंस और बेहतर रहने की सुविधा दी जाती है।
राज्य सरकारें क्या कर रही हैं?
1. स्पेशलिस्ट डॉक्टरों को आकर्षित करने के लिए लचीली सैलरी
नेशनल हेल्थ मिशन (NHM) के तहत राज्य सरकारें स्पेशलिस्ट डॉक्टरों को मनचाही सैलरी ऑफर कर सकती हैं। कई राज्यों में ‘यू कोट, वी पे’ जैसी स्कीमें भी चल रही हैं। यह मॉडल डॉक्टरों को दूरदराज क्षेत्रों में सेवाएं देने के लिए प्रेरित करता है।
2. विदेशी डॉक्टरों के लिए नए नियम
नेशनल मेडिकल कमीशन ने ऐसे नियम बनाए हैं, जिनके तहत विदेश में क्वालिफाइड और रजिस्टर्ड गैर-भारतीय नागरिक डॉक्टर भारत में ट्रेनिंग, फेलोशिप, रिसर्च, ऑब्जर्वरशिप, एक्सपर्ट विज़िट, वॉलंटरी सर्विस, अप्रूव्ड PG सुपर स्पेशियलिटी कोर्स आदि कार्यों के लिए अस्थायी रजिस्ट्रेशन ले सकते हैं। इनसे भारत में अत्याधुनिक चिकित्सा शिक्षा और विशेषज्ञ सेवाओं को बढ़ावा मिलेगा।
डॉक्टर–मरीज अनुपात में सुधार जरूर हुआ है, लेकिन ग्रामीण और दूरदराज क्षेत्रों में डॉक्टरों की उपलब्धता अभी भी बड़ी चुनौती है। सरकार मेडिकल कॉलेजों के विस्तार, फैमिली एडॉप्शन प्रोग्राम, जिला रेजिडेंसी, और विदेशी डॉक्टरों की अस्थायी रजिस्ट्रेशन जैसी नीतियों से इस अंतर को कम करने की कोशिश में है। इन प्रयासों से आने वाले समय में स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच और गुणवत्ता में निश्चित तौर पर सुधार की उम्मीद है।




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