
कृषि विज्ञान के छात्र Agricultural Scientists Recruitment Board (ASRB) की परीक्षाओं में लगातार हो रही अनियमितताओं को लेकर चिंता जता रहे हैं। छात्रों का कहना है कि अनियमित परीक्षा चक्र, सीमित अवसर और ASRB NET व Agricultural Research Service (ARS) भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता की कमी उनके करियर को प्रभावित कर रही है।
ASRB परीक्षा कृषि वैज्ञानिकों की भर्ती के लिए आयोजित एक योग्यता परीक्षा है, जो तीन चरणों—प्रीलिम्स, मेन्स और इंटरव्यू—में पूरी होती है। लेकिन बीते दशक में यह परीक्षा अनिवार्य आवृत्ति के अनुसार नहीं हुई और औसतन दो साल में एक बार ही आयोजित की जाती है। छात्रों के अनुसार ऐसी असंगतियाँ उनके करियर प्लान को बिगाड़ देती हैं, खासतौर पर तब जब अधिकतर संस्थानों में NET योग्यता अनिवार्य कर दी गई है।
डेटा ब्रीच ने बढ़ाई चिंताएँ
परीक्षा अनियमितताओं के अलावा इस वर्ष ICAR और ASRB को एक बड़े डेटा ब्रीच का भी सामना करना पड़ा। फरवरी-मार्च में सामने आए इस मामले में दिल्ली स्थित ICAR के मुख्य सर्वर और हैदराबाद के डिज़ास्टर रिकवरी सेंटर (DRC) से महत्वपूर्ण डेटा डिलीट हो गया।
इस डेटा में भर्ती रिकॉर्ड, वैज्ञानिकों की प्रोफाइल, शोध परियोजनाओं की फाइलें, आवेदन पत्र, इंटरव्यू मूल्यांकन, संचार रिकॉर्ड शामिल थे। यह घटना छात्रों और शोधकर्ताओं के बीच पहले से जारी अनिश्चितता को और गहरा कर गई।
देश में तीन NET परीक्षाएँ, लेकिन ASRB NET केवल कृषि विद्यार्थियों के लिए
भारत में UGC NET, CSIR NET और ASRB NET तीन प्रमुख NET परीक्षाएँ होती हैं। ASRB NET विशेष रूप से कृषि विद्यार्थियों के लिए आयोजित की जाती है।
आमतौर पर ASRB प्रीलिम्स परीक्षा सितंबर/अक्टूबर में होती है, लेकिन इस वर्ष बाढ़ के कारण इसमें देरी हुई और परीक्षा नवंबर में कराई गई। मेन्स परीक्षा मार्च 2026 में आयोजित की जानी है।
प्रीलिम्स रिज़ल्ट में देरी, प्रक्रिया में पारदर्शिता की कमी
एक शोधार्थी, जिन्होंने नाम न बताने की शर्त पर बात की, ने बताया कि प्रीलिम्स का परिणाम सामान्यतः 45 दिनों में आ जाना चाहिए, लेकिन ASRB कभी भी इस समयसीमा का पालन नहीं करता।
छात्रों में अनुमान है कि रिज़ल्ट मध्य दिसंबर तक आ सकता है, लेकिन बोर्ड की ओर से कोई आधिकारिक सूचना जारी नहीं हुई है। मेन्स परीक्षा की कॉपी जाँच लंबी होती है क्योंकि पेपर सब्जेक्टिव होते हैं और इन्हें अलग-अलग मूल्यांकनकर्ताओं को भेजा जाता है। ऐसे में पूरा ASRB भर्ती चक्र 1.5 से 2 साल तक खिंच जाता है।
परीक्षा की आवृत्ति कम हुई, संख्या बढ़ी
शोधार्थी बताते हैं कि अभ्यर्थियों की संख्या बढ़ने के बावजूद, परीक्षा की आवृत्ति और पारदर्शिता लगातार कम हुई है। UGC की तरह साल में दो बार NET आयोजित करने का प्रावधान है, लेकिन ASRB दो से ढाई साल में केवल एक बार परीक्षा आयोजित करता है। पिछले ASRB NET वर्ष 2021, 2023 और अब 2025 के अंत में आयोजित होने हैं।
NET न होने के कारण छात्रों के लिए शिक्षण और शोध पदों पर आवेदन करना मुश्किल हो जाता है। एक उम्मीदवार, जिन्होंने हाल ही में अपना PhD पूरा किया है, कहती हैं— “PhD के बाद शोध या नौकरी शुरू करने के बजाय हम नोटिफिकेशन का इंतज़ार करने में अटक जाते हैं।”
वहीं, बेंगलुरु की एक यूनिवर्सिटी के शिक्षक का कहना है कि UPSC की तरह निश्चित वार्षिक कैलेंडर होने के बजाय ASRB वैकेंसी-ड्रिवन है, जिससे पूरा सिस्टम अनिश्चित बना रहता है।




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