
भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) के महानिदेशक एम.एल. जाट ने देशभर के सभी राज्य और केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालयों, साथ ही उन विश्वविद्यालयों के कुलपतियों को पत्र लिखा है जिनमें कृषि विभाग मौजूद हैं। उन्होंने आग्रह किया है कि संस्थान प्राकृतिक खेती पर स्नातक, स्नातकोत्तर और शोध कार्यक्रम जल्द शुरू करें।
अब तक प्राकृतिक खेती कई संस्थानों में ऐच्छिक विषय के रूप में उपलब्ध थी और चार विश्वविद्यालय इस विषय पर विशेष कोर्स भी संचालित कर रहे थे। लेकिन यह पहली बार है जब ICAR ने सभी संबद्ध कॉलेजों और राज्य संस्थानों को औपचारिक रूप से प्राकृतिक खेती को पाठ्यक्रम में शामिल करने की सिफारिश की है।
डॉ. जाट ने अपने पत्र में कहा कि प्राकृतिक खेती आज राष्ट्रीय महत्व का विषय बन चुका है और यह भारत की सतत कृषि नीति, किसान कल्याण, और पर्यावरण संरक्षण की रणनीतिक प्राथमिकताओं से सीधे जुड़ा है। उन्होंने बताया कि बी.एससी. (ऑनर्स) कृषि – प्राकृतिक खेती कार्यक्रम, जिसे सिक्स्थ डीन्स कमेटी की सिफारिशों और राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 के तहत तैयार किया गया है, को मंजूरी दे दी गई है और सभी कृषि विश्वविद्यालयों को भेजा जा चुका है।
उन्होंने लिखा, “कुछ विश्वविद्यालयों ने यह कार्यक्रम शैक्षणिक वर्ष 2023-24 से लागू कर दिया है, जो कृषि उच्च शिक्षा में एक बड़ा बदलाव है। उम्मीद है कि बाकी विश्वविद्यालय भी अगले शैक्षणिक वर्ष से यह कोर्स शुरू करेंगे।”
स्नातकोत्तर शिक्षा और शोध को मजबूत करने पर जोर देते हुए डॉ. जाट ने कहा कि देश में रासायन-मुक्त खाद्य प्रणाली, मिट्टी का पुनरुद्धार, लचीले कृषि-परिस्थितिकी तंत्र और कम-उत्सर्जन खेती की बढ़ती जरूरत को देखते हुए, राज्य और केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालयों तथा डीम्ड विश्वविद्यालयों को प्राकृतिक खेती और इससे जुड़े क्षेत्रों में नए PG कार्यक्रम विकसित करने चाहिए।




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