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एनटीए के कामकाज पर संसदीय समिति ने उठाए सवाल, परीक्षाओं में पेन-एंड-पेपर मोड की वकालत

Parliamentary Committee Expresses Concern Over NTA's Functioning

संसद की शिक्षा मामलों की स्थायी समिति ने राष्ट्रीय परीक्षण एजेंसी (NTA) के लगातार विवादों और परीक्षाओं में हुई गड़बड़ियों पर गंभीर चिंता जताई है। समिति ने साफ कहा है कि एनटीए पर छात्रों और अभिभावकों का भरोसा लगातार कम हो रहा है, ऐसे में तकनीकी आधारित परीक्षाओं की बजाय पेन-एंड-पेपर मोड को प्राथमिकता दी जानी चाहिए। कांग्रेस सांसद दिग्विजय सिंह की अध्यक्षता वाली इस समिति की 371वीं रिपोर्ट संसद में पेश की गई है, जिसमें एनटीए के कामकाज की विस्तृत समीक्षा के साथ कई बड़े सुधार सुझाए गए हैं।

2024–25 में एनटीए की बड़ी विफलताएं

समिति ने अपनी रिपोर्ट में यह स्पष्ट किया कि 2024 में एनटीए द्वारा आयोजित 14 में से कम से कम 5 प्रमुख परीक्षाओं में गंभीर स्तर की गड़बड़ियां देखने को मिलीं। इनमें यूजीसी-नेट, सीएसआईआर-नेट, नीट-पीजी जैसी महत्वपूर्ण परीक्षाओं को रद्द करना पड़ा। सीयूईटी-यूजी के रिज़ल्ट में देरी हुई। जेईई मेन 2025 (जनवरी सेशन) की फाइनल आंसर की में हुई गलतियों की वजह से 12 प्रश्न वापस लेने पड़े।

इन घटनाओं ने देशभर के छात्रों की तैयारी, समय और मानसिक स्वास्थ्य पर बड़ा असर डाला है। समिति का कहना है कि इन लगातार हुई गड़बड़ियों ने एनटीए की विश्वसनीयता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

स्थायी समिति के प्रमुख सुझाव

रिपोर्ट में समिति ने एनटीए को लेकर कई ठोस और कड़े सुझाव प्रस्तुत किए हैं:

1. एनटीए को अपनी इन-हाउस क्षमता बढ़ानी होगी

समिति ने बताया कि पिछले छह साल में एनटीए ने कुल 448 करोड़ रुपये अतिरिक्त आय अर्जित की है। इस फंड का इस्तेमाल एजेंसी को अपनी तकनीकी और प्रशासनिक क्षमता बढ़ाने में करना चाहिए, ताकि बाहरी वेंडर्स पर निर्भरता कम हो।

2. वेंडर मॉनिटरिंग सिस्टम बने मजबूत

रिपोर्ट में कहा गया है कि परीक्षा कराने वाली निजी कंपनियों और वेंडर्स की निगरानी बेहद कमजोर है। समिति ने सुझाव दिया कि एनटीए एक सख्त और पारदर्शी निगरानी तंत्र विकसित करे ताकि पेपर लीक और अन्य गड़बड़ियों की संभावनाएं खत्म हों।

3. पेन-एंड-पेपर मोड पर फिर जोर

समिति का मानना है कि डिजिटल परीक्षा प्रणाली अभी पूरी तरह सुरक्षित नहीं है। इसलिए बड़े स्तर की परीक्षाओं में पारंपरिक पेन-एंड-पेपर मोड को प्राथमिकता दी जानी चाहिए। इससे तकनीकी गड़बड़ियों और सॉफ्टवेयर-आधारित त्रुटियों की संभावना कम होगी।

4. लीक रोकने के लिए सख्त कदम

समिति ने दावा किया कि सही सिस्टम और पारदर्शी प्रक्रियाओं के जरिए पेपर लीक जैसी समस्याओं को बड़ी हद तक खत्म किया जा सकता है। इसके लिए एनटीए को तुरंत सुधारात्मक कदम उठाने की सलाह दी गई है।

सरकार की कार्रवाई जल्द संभव

शिक्षा मंत्रालय इस रिपोर्ट पर जल्द कोई बड़ा फैसला ले सकता है। माना जा रहा है कि एनटीए से सुधारों पर विस्तृत रोडमैप मांगा जाएगा और भविष्य की परीक्षाओं के लिए नई गाइडलाइन्स लागू की जा सकती हैं।

रिपोर्ट के बाद यह साफ है कि देश की सबसे बड़ी परीक्षा एजेंसी अब बड़े बदलावों के दौर से गुजर सकती है। लाखों छात्रों का भविष्य एनटीए की कार्यप्रणाली पर निर्भर करता है, ऐसे में केंद्र सरकार और एजेंसी दोनों के सामने भरोसा बहाल करने की चुनौती है।  

 

एडइनबॉक्स टीम

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