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JAF Fellowship in Australia: A Golden Opportunity for Those Pursuing a Career in Agricultural Research

ऑरो यूनिवर्सिटी में फरवरी 2026 में आयोजित होगा ‘वैदिक ज्ञान: खोज और अनुप्रयोग’ पर अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन

, Indian Knowledge Systems,

सूरत स्थित ऑरो यूनिवर्सिटी में “डिस्कवरी एंड एप्लीकेशन ऑफ वैदिक नॉलेज” पर बड़ा अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन आयोजित किया जाएगा। यह सम्मेलन 12 से 15 फरवरी 2026 तक चलेगा। कार्यक्रम हाइब्रिड मोड में होगा, यानी प्रतिभागी सूरत कैंपस में आकर या विश्व के किसी भी स्थान से ऑनलाइन जुड़कर हिस्सा ले सकते हैं। इस आयोजन का उद्देश्य यह दिखाना है कि किस तरह वैदिक ज्ञान आज की शिक्षा, समाज, नेतृत्व, वेलबीइंग और व्यक्तिगत विकास जैसी आधुनिक चुनौतियों का समाधान प्रदान कर सकता है।

सम्मेलन की प्रमुख जानकारी

 

विवरण

जानकारी

तिथि

12–15 फरवरी 2026

मोड

हाइब्रिड — ऑफलाइन (ऑरो यूनिवर्सिटी, सूरत) + ऑनलाइन

मुख्य फोकस

वैदिक ज्ञान, आध्यात्मिक परंपराएँ और उनका आधुनिक जीवन में उपयोग

प्रतिभागी

शिक्षाविद, शोधकर्ता, विद्यार्थी, आध्यात्मिक साधक एवं भारतीय ज्ञान प्रणाली में रुचि रखने वाले प्रोफेशनल्स

कार्यक्रम अनुसूची

12 फरवरी 2026 (गुरुवार): ‘द सीक्रेट ऑफ द वेद’ पर सेमिनार

13 फरवरी 2026 (शुक्रवार): पैनल चर्चा एवं शोधपत्र प्रस्तुति

14 फरवरी 2026 (शनिवार): पैनल चर्चा एवं शोधपत्र प्रस्तुति

15 फरवरी 2026 (रविवार): समापन सत्र एवं महाशिवरात्रि उत्सव

सम्मेलन का उद्देश्य क्या है?

यह सम्मेलन उन विद्वानों, शोधकर्ताओं और छात्रों को एक मंच पर लाएगा जो वर्तमान समय में वैदिक विचारधारा पर काम कर रहे हैं। इसमें चर्चा होगी कि कैसे प्राचीन भारतीय ज्ञान प्रणाली— तनाव और मानसिक स्वास्थ्य, शिक्षा में मूल्य आधारित सुधार, सतत जीवनशैली, आंतरिक विकास जैसे विषयों पर व्यावहारिक समाधान दे सकती है।

श्री अरबिंदो की दृष्टि से प्रेरित यह आयोजन वेदों को केवल इतिहास या दर्शन नहीं, बल्कि जीवंत ज्ञान के रूप में समझने पर केंद्रित होगा, जो 21वीं सदी में मानव जीवन को बेहतर बना सकता है।

शोधपत्रों के प्रमुख विषय

– श्री अरबिंदो और वेद

– भाषा विज्ञान की नई दिशा

– सावित्री में वैदिक रूपक

– पूर्ण योग और वैदिक यज्ञ

– इंटीग्रल योग व वेद में ‘मदर’ और ‘अदिति

– चेतना के स्तर

– वेद में आवर्तन (Involution) और विकास (Evolution)

– वैदिक ऋषि — वे कौन थे?

– भारतीय संस्कृति की नींव

– गीताजी का पूर्ण योग और श्री अरबिंदो का इंटीग्रल योग

कौन कर सकता है भाग?

– भारतीय दर्शन, वेद या आध्यात्मिक विषयों में रुचि रखने वाले विद्यार्थी

– मानविकी, सामाजिक विज्ञान, शिक्षा, दर्शन और धर्म अध्ययन से जुड़े प्रोफेसर

– इंडोलॉजी, मनोविज्ञान और संस्कृति क्षेत्र के शोधकर्ता

– काउंसलर एवं आध्यात्मिक साधक

– आधुनिक जीवन में वैदिक ज्ञान की भूमिका समझना चाहने वाले व्यक्ति

हाइब्रिड मोड होने के कारण, दुनिया के किसी भी हिस्से से लोग आसानी से जुड़ सकते हैं।

कैसे करें भागीदारी?

इच्छुक प्रतिभागी—

  1. ऑरो यूनिवर्सिटी की आधिकारिक वेबसाइट पर उपलब्ध सम्मेलन पेज पर जाएं
  2. सार (Abstract) एवं शोधपत्र जमा करने के निर्देश देखें
  3. प्रेज़ेंटर (Paper Presenter) या डेलीगेट (Participant) के रूप में रजिस्टर करें
  4. ऑनलाइन या कैंपस मोड का चुनाव करें

ध्यान दें: ऑफलाइन भागीदारी सीमित सीटों पर आधारित है, इसलिए जल्द रजिस्ट्रेशन करना बेहतर रहेगा।

क्यों है यह सम्मेलन खास?

यह अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन उन सभी के लिए महत्वपूर्ण अवसर है जो यह जानना चाहते हैं कि कैसे वैदिक ज्ञान, आधुनिक विश्व में सकारात्मक और सार्थक बदलाव ला सकता है। यह भारत की आध्यात्मिक व बौद्धिक धरोहर पर वैश्विक संवाद को भी मजबूत करेगा।

एडइनबॉक्स टीम

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