
बाज़ार नियामक भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (SEBI) ने अपनी तकनीकी, जांच और फॉरेंसिक क्षमताओं को और सशक्त बनाने के लिए नेशनल फॉरेंसिक साइंसेज यूनिवर्सिटी (NFSU) के साथ एक महत्वपूर्ण समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए हैं। यह समझौता 24 नवंबर 2025 को किया गया।
NFSU, जिसे नेशनल फॉरेंसिक साइंसेज यूनिवर्सिटी एक्ट, 2020 के तहत स्थापित किया गया था, देश में फॉरेंसिक विज्ञान शिक्षा और अनुसंधान का प्रमुख संस्थान है।
SEBI की डिजिटल और फॉरेंसिक क्षमता बढ़ाने पर फोकस
इस समझौते का उद्देश्य SEBI की क्षमता को कई अहम क्षेत्रों में मजबूत करना है, जिनमें डिजिटल फॉरेंसिक्स, फॉरेंसिक अकाउंटिंग, साइबर सिक्योरिटी, डेटा एनालिटिक्स शामिल हैं।
NFSU, SEBI अधिकारियों के लिए विशेषीकृत और कस्टमाइज़्ड ट्रेनिंग प्रोग्राम तैयार करेगा और प्रदान करेगा, जिससे SEBI की कार्यक्षमता और रेगुलेटरी निगरानी क्षमता में सुधार हो सके। दोनों संस्थान मिलकर ट्रेनिंग सेशन, सेमिनार, कॉन्फ्रेंस और वर्कशॉप का आयोजन भी करेंगे।
MoU के प्रमुख बिंदु
– SEBI के लिए आधुनिक फॉरेंसिक इंफ्रास्ट्रक्चर का विकास, जिसमें साइबर सिक्योरिटी, डिजिटल फॉरेंसिक्स और संबंधित क्षेत्रों में अत्याधुनिक प्रयोगशालाओं की स्थापना शामिल होगी।
– NFSU, SEBI को कंसल्टेंसी सेवाएं भी प्रदान कर सकता है ताकि जांच क्षमताओं को आधुनिक स्तर तक बढ़ाया जा सके।
– दोनों संस्थान, लागू कानूनों के तहत, ज्ञान और संसाधनों को साझा करेंगे ताकि अपने-अपने दायित्वों को अधिक कुशलता से निभा सकें।
कॉरपोरेट फ्रॉड और फंड डायवर्जन मामलों की जांच में मिलेगी मजबूती
यह कदम SEBI को कॉरपोरेट धोखाधड़ी, फंड डायवर्जन और अन्य जटिल मामलों से निपटने में अधिक प्रभावी बनाएगा। डिजिटल और फॉरेंसिक उपकरणों के मजबूत होने से SEBI की रेगुलेटरी पकड़ और मजबूत होगी और बाजार निगरानी में पारदर्शिता बढ़ेगी।




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