
कभी खेतों में पिता के साथ काम में हाथ बंटाने वाली बेटियां आज कृषि शिक्षा के सहारे अपने भविष्य को नई दिशा दे रही हैं। राजस्थान के श्रीगंगानगर और हनुमानगढ़ जिलों में कृषि विषय में छात्राओं की बढ़ती भागीदारी ने न सिर्फ शिक्षा के क्षेत्र में नया रुझान पैदा किया है, बल्कि ग्रामीण समाज की सोच में भी बड़ा बदलाव दिखाया है। जहां कुछ साल पहले तक बेटियों की पढ़ाई कला, वाणिज्य या विज्ञान तक सीमित मानी जाती थी, वहीं अब कृषि शिक्षा में वे लगातार नए रिकॉर्ड बना रही हैं।
इस बदलाव के पीछे राज्य सरकार की कृषि शिक्षा प्रोत्साहन योजनाओं की अहम भूमिका रही है। 11वीं-12वीं की छात्राओं को सालाना 15 हजार रुपये, कॉलेज स्तर पर 25 हजार रुपये और शोध व उच्च शिक्षा के लिए 40 हजार रुपये की आर्थिक सहायता ने पढ़ाई का बोझ कम किया है। इससे बेटियों का आत्मविश्वास बढ़ा है और परिवारों ने भी कृषि शिक्षा को एक मजबूत करियर विकल्प के रूप में स्वीकार करना शुरू किया है। श्रीगंगानगर और हनुमानगढ़ सहित राज्य के हजारों विद्यार्थियों, खासकर छात्राओं ने इन योजनाओं का लाभ उठाकर कृषि क्षेत्र में अपनी पहचान बनाई है।
आज कृषि शिक्षा केवल खेतों तक सीमित नहीं रह गई है। एग्री-प्रोसेसिंग, खाद्य उद्योग, एग्री-स्टार्टअप, बैंकिंग, जैविक खेती, कृषि उपकरण निर्माण, रसायन उद्योग और सरकारी सेवाओं में इसके व्यापक अवसर मौजूद हैं। कृषि पर्यवेक्षक, कृषि अधिकारी और शोध संस्थानों जैसे पदों पर बेटियां लगातार आगे बढ़ रही हैं। माध्यमिक स्तर पर कृषि संकाय वाले विद्यालयों की संख्या बढ़ने से ग्रामीण क्षेत्रों की छात्राओं के लिए इस विषय तक पहुंच आसान हुई है। श्रीगंगानगर का सरकारी कृषि महाविद्यालय खास तौर पर ग्रामीण पृष्ठभूमि की लड़कियों के लिए नई उम्मीद बनकर उभरा है।
आंकड़े भी इस बदलाव की गवाही देते हैं। वर्ष 2023-24 में 1335 छात्राओं को करीब 2 करोड़ 46 लाख रुपये की सहायता दी गई। 2024-25 में 1273 छात्राओं को लगभग 2 करोड़ 44 लाख रुपये मिले, जबकि 2025-26 में यह संख्या बढ़कर 1609 छात्राओं तक पहुंच गई और करीब 2 करोड़ 92 लाख रुपये की सहायता दी गई। यह साफ दिखाता है कि कृषि शिक्षा में बेटियों की भागीदारी लगातार बढ़ रही है।
कृषि विभाग के अधिकारियों का कहना है कि जिले में कृषि संकाय के विस्तार से छात्राओं में जागरूकता तेजी से बढ़ी है। पहले जहां इस विषय में उनकी भागीदारी सीमित थी, अब वे कृषि विज्ञान, शोध और तकनीकी क्षेत्रों में सक्रिय रूप से आगे आ रही हैं। सरकारी प्रोत्साहन राशि ने आर्थिक दबाव कम किया है और रोजगार व स्टार्टअप के अवसरों ने उनमें आत्मविश्वास भरा है।
शिक्षा विभाग के अनुसार, ग्रामीण समाज में बेटियों को लेकर सोच भी सकारात्मक रूप से बदली है। परिवार अब कृषि शिक्षा को एक सम्मानजनक और सुरक्षित करियर मानने लगे हैं। विभिन्न कृषि पदों पर बेटियों की सफलता महिला सशक्तिकरण का मजबूत उदाहरण पेश कर रही है। सरकारी योजनाओं ने उन्हें आगे बढ़ने का हौसला दिया है और यह बदलाव आने वाले समय में और गहरा होने की उम्मीद है।




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