
केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी प्रधानमंत्री इंटर्नशिप योजना (PMIS) के पहले चरण के नतीजे सामने आ गए हैं। संसद में वित्त मंत्रालय द्वारा साझा की गई जानकारी के मुताबिक, योजना के पायलट चरण में अब तक 82,077 इंटर्नशिप ऑफर जारी किए जा चुके हैं। पार्टनर कंपनियों ने कुल 1.27 लाख अवसर उपलब्ध कराए थे, जिनमें से 28,141 ऑफर उम्मीदवारों ने स्वीकार किए, जबकि 2,066 युवा इंटर्नशिप पूरी कर चुके हैं।
सरकारी आंकड़े बताते हैं कि यह योजना केवल बड़े शहरों तक सीमित नहीं रही, बल्कि छोटे शहरों और राज्यों तक भी इसकी पहुंच बनी है। यही वजह है कि इसे युवाओं को रोजगार योग्य बनाने की दिशा में एक अहम पहल माना जा रहा है।
राज्यवार हिस्सेदारी की बात करें तो उत्तर प्रदेश और बिहार इस योजना में सबसे आगे रहे हैं। उत्तर प्रदेश में जहां 11,563 इंटर्नशिप ऑफर जारी हुए, वहीं 4,656 युवाओं ने जॉइन करने की सहमति दी। बिहार में कंपनियों ने 5,668 ऑफर दिए, जो वहां के युवाओं की बढ़ती प्रोफेशनल जागरूकता को दर्शाता है। इसके अलावा मध्य प्रदेश और आंध्र प्रदेश से भी बड़ी संख्या में आवेदन और चयन देखने को मिला है।
इंटर्नशिप पूरी करने के मामले में असम ने पूरे देश में सबसे बेहतर प्रदर्शन किया है। यहां 30.6 प्रतिशत प्रशिक्षुओं ने सफलतापूर्वक इंटर्नशिप पूरी की, जो राष्ट्रीय औसत से कहीं अधिक है। यह संकेत देता है कि छोटे राज्य और पूर्वोत्तर क्षेत्र भी इस योजना का भरपूर लाभ उठा रहे हैं और गंभीरता से इसमें भाग ले रहे हैं।
योजना के तहत चयनित युवाओं को काम का वास्तविक अनुभव देने के साथ-साथ आर्थिक सहयोग भी दिया जा रहा है। हर प्रशिक्षु को हर महीने 5,000 रुपये का स्टाइपेंड मिलता है, जिसमें 4,500 रुपये केंद्र सरकार और 500 रुपये संबंधित कंपनी की ओर से दिए जाते हैं। इसके अलावा, जॉइनिंग के समय 6,000 रुपये की एकमुश्त सहायता भी दी जाती है। सभी इंटर्न्स को सरकारी बीमा योजनाओं के तहत सुरक्षा कवर भी उपलब्ध कराया जाता है, जिससे प्रशिक्षण के दौरान उन्हें सामाजिक सुरक्षा मिल सके।
हालांकि, योजना के सामने कुछ व्यावहारिक चुनौतियां भी सामने आई हैं। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने स्पष्ट किया है कि यह योजना सीधे नौकरी देने का जरिया नहीं, बल्कि युवाओं को स्किल्ड और इंडस्ट्री-रेडी बनाने की पहल है। कई मामलों में ऐसा देखा गया कि ऑफर मिलने के बावजूद कुछ उम्मीदवारों ने जॉइन नहीं किया। इसकी प्रमुख वजह लोकेशन और रोल से जुड़ी असहमतियां बताई गई हैं। सरकार इन बिंदुओं पर फीडबैक के आधार पर सुधार कर रही है।
इसी क्रम में योजना के दूसरे चरण (Round 2) की तैयारियां तेज कर दी गई हैं, जिसमें अब तक 1.18 लाख से ज्यादा इंटर्नशिप अवसर पोस्ट किए जा चुके हैं। सरकार का फोकस इस बार मैपिंग, जॉब रोल क्लैरिटी और उम्मीदवारों की अपेक्षाओं को बेहतर ढंग से जोड़ने पर है।




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