
कॉमन लॉ एडमिशन टेस्ट (CLAT) का रिजल्ट आने के बाद बड़ी संख्या में लॉ एस्पिरेंट्स के मन में एक ही सवाल होता है—LLB करें या LLM? दोनों ही कोर्स कानून की पढ़ाई से जुड़े हैं, लेकिन इनका उद्देश्य, स्तर और करियर की दिशा अलग-अलग होती है। ऐसे में अगर आप लॉ में करियर बनाने की योजना बना रहे हैं, तो LLB और LLM के बीच का अंतर, योग्यता और CLAT के बाद एडमिशन प्रक्रिया को समझना बेहद जरूरी है।
यह लेख इसी उलझन को दूर करने के लिए तैयार किया गया है, ताकि छात्र सही फैसला ले सकें।
LLB क्या है?
LLB की फुल फॉर्म बैचलर ऑफ लॉ (Bachelor of Laws) है। यह एक अंडरग्रेजुएट लॉ डिग्री होती है, जो छात्रों को वकालत और अन्य लीगल प्रोफेशन के लिए तैयार करती है।
भारत में LLB दो तरह से की जा सकती है—
– 5 साल का इंटीग्रेटेड कोर्स (जैसे BA LLB), जिसे 12वीं के बाद किया जाता है
– 3 साल का LLB, जिसे ग्रेजुएशन के बाद किया जाता है
LLB कोर्स में संविधान कानून, आपराधिक कानून, कॉन्ट्रैक्ट लॉ, फैमिली लॉ और सिविल लॉ जैसे अहम विषय पढ़ाए जाते हैं। यह कोर्स उन छात्रों के लिए सही माना जाता है जो सीधे लीगल प्रैक्टिस या ज्यूडिशियल सर्विसेज की ओर जाना चाहते हैं।
LLM क्या है?
LLM की फुल फॉर्म मास्टर ऑफ लॉ (Master of Laws) है। यह एक पोस्टग्रेजुएट लॉ डिग्री है, जो पहले से LLB कर चुके छात्रों के लिए होती है।
LLM का मकसद कानून के किसी एक क्षेत्र में स्पेशलाइजेशन कराना होता है। इसमें संवैधानिक कानून, कॉरपोरेट लॉ, इंटरनेशनल लॉ, क्रिमिनल लॉ, ह्यूमन राइट्स जैसे विकल्प मिलते हैं।
LLM कोर्स को रिसर्च, टीचिंग, पॉलिसी-मेकिंग और सीनियर लीगल रोल्स के लिए ज्यादा उपयोगी माना जाता है।
LLB या LLM—कौन-सा कोर्स बेहतर?
यह सवाल हर छात्र के करियर प्लान से जुड़ा है।
अगर आप कानून की पढ़ाई की शुरुआत कर रहे हैं और वकील बनना चाहते हैं, तो LLB सही विकल्प है।
अगर आपने पहले से LLB कर ली है और किसी खास लॉ फील्ड में गहराई से काम करना चाहते हैं, तो LLM करना फायदेमंद रहेगा।
सीधे शब्दों में कहें तो LLB आपको लॉ प्रोफेशन में एंट्री देता है, जबकि LLM आपको उसी प्रोफेशन में आगे बढ़ने का रास्ता दिखाता है।
LLB और LLM के लिए योग्यता
LLB के लिए योग्यता कोर्स के प्रकार पर निर्भर करती है।
– 5 साल के LLB के लिए 12वीं पास होना जरूरी है
– 3 साल के LLB के लिए किसी भी स्ट्रीम से ग्रेजुएशन अनिवार्य है
LLM के लिए उम्मीदवार के पास मान्यता प्राप्त यूनिवर्सिटी से LLB डिग्री होनी चाहिए।
इसके अलावा CLAT के जरिए एडमिशन लेने के लिए न्यूनतम प्रतिशत का मानदंड होता है, जो अलग-अलग कैटेगरी के अनुसार तय किया जाता है।
CLAT के बाद कैसे होता है एडमिशन?
LLB और LLM दोनों प्रोग्राम्स में एडमिशन Consortium of National Law Universities द्वारा आयोजित सेंट्रलाइज्ड काउंसलिंग के जरिए होता है।
CLAT रैंक के आधार पर छात्रों को उनकी पसंद और सीटों की उपलब्धता के अनुसार नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी अलॉट की जाती है।
सीट मिलने के बाद उम्मीदवारों को तय समय के भीतर डॉक्यूमेंट वेरिफिकेशन और फीस जमा कर एडमिशन कन्फर्म करना होता है।
LLB और LLM दोनों ही कोर्स कानून की दुनिया में मजबूत करियर के रास्ते खोलते हैं। फर्क सिर्फ इतना है कि LLB आपको कानून की बुनियाद देता है, जबकि LLM उस बुनियाद पर स्पेशलाइजेशन और आगे की उड़ान का मौका देता है।
इसलिए CLAT के बाद फैसला लेते समय अपने करियर लक्ष्य, शैक्षणिक पृष्ठभूमि और भविष्य की योजना को ध्यान में रखना सबसे जरूरी है।




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