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गणपत यूनिवर्सिटी में अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञ का व्याख्यान आयोजित, अफ्रीका में फार्मास्युटिकल इनोवेशन पर हुई चर्चा

गणपत यूनिवर्सिटी में अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञ का व्याख्यान आयोजित, अफ्रीका में फार्मास्युटिकल इनोवेशन पर हुई चर्चा

गणपत यूनिवर्सिटी में अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञ का व्याख्यान आयोजित, अफ्रीका में फार्मास्युटिकल इनोवेशन पर हुई चर्चा

गणपत यूनिवर्सिटी के फैकल्टी ऑफ साइंस और फैकल्टी ऑफ फार्मेसी ने “अफ्रीका में ड्रग डिस्कवरी और डेवलपमेंट में प्रगति: युगांडा केस स्टडी” विषय पर दो दिवसीय अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञ व्याख्यान श्रृंखला का सफल आयोजन किया। यह सत्र डॉ. जोसेफ किबिरिगे, एसोसिएट फैकल्टी, मेकेरेरे यूनिवर्सिटी और UMC विक्टोरिया हॉस्पिटल (युगांडा) में क्लिनिकल फार्मासिस्ट द्वारा दिया गया। कार्यक्रम में 200 से अधिक छात्र और फैकल्टी सदस्य शामिल हुए, जहां अफ्रीका की फार्मास्युटिकल इनोवेशन में बढ़ती भूमिका पर गहन चर्चा हुई।

गुजरात के मेहसाणा स्थित गणपत यूनिवर्सिटी कैंपस में आयोजित यह कार्यक्रम फार्मेसी और साइंस शिक्षा में विश्वविद्यालय के वैश्विक दृष्टिकोण को दर्शाता है। B.Pharm एडमिशन 2026 की तैयारी कर रहे या रिसर्च करियर की योजना बना रहे भारतीय छात्रों के लिए यह सत्र बताता है कि कैसे शीर्ष निजी विश्वविद्यालय क्लासरूम लर्निंग को अंतरराष्ट्रीय ट्रेंड्स से जोड़ते हैं।

डॉ. किबिरिगे के व्याख्यान के प्रमुख बिंदु

डॉ. किबिरिगे ने अफ्रीका के फार्मास्युटिकल इकोसिस्टम को सरल तरीके से समझाया, खासकर वैश्विक स्वास्थ्य जरूरतों के संदर्भ में युगांडा की भूमिका पर फोकस किया। प्रतिभागियों को कई व्यावहारिक जानकारियां मिलीं—

ड्रग डिस्कवरी में नए रुझान:

अफ्रीका के हर्बल संसाधन नई दवाओं के विकास में अहम भूमिका निभा रहे हैं।प्राकृतिक उत्पादों पर रिसर्च में युगांडा अग्रणी देशों में शामिल है।

युगांडा का रिसर्च और रेगुलेटरी ढांचा:

युगांडा की नेशनल ड्रग अथॉरिटी क्लिनिकल ट्रायल्स और दवाओं के निर्यात को सक्षम बनाती है, जिससे सालाना $50 मिलियन से अधिक का एक्सपोर्ट संभव हो रहा है।

अकादमिक–क्लिनिकल–इंडस्ट्री साझेदारी:

मेकेरेरे यूनिवर्सिटी और UMC जैसे सहयोग मॉडल लैब से बाजार तक दवाओं के विकास की प्रक्रिया को तेज करते हैं।

लोकल लीड्स और ट्रांसलेशनल रिसर्च:

परंपरागत ज्ञान और आधुनिक तकनीक के मेल से मलेरिया जैसी बीमारियों के लिए प्रभावी हर्बल समाधान विकसित किए जा रहे हैं।

भविष्य के अवसर:

एंटीमाइक्रोबियल रेजिस्टेंस जैसी वैश्विक चुनौतियों से निपटने के लिए भारतीय शोधकर्ताओं के साथ सहयोग के अवसरों पर भी चर्चा हुई।

Q&A सत्र के दौरान भारत–अफ्रीका फार्मा सहयोग पर मंथन हुआ, जो लगभग $50 अरब के भारतीय फार्मा बाजार के अनुरूप है।

भारत के फार्मेसी छात्रों के लिए यह क्यों महत्वपूर्ण है?

भारत के फार्मा सेक्टर को वैश्विक सोच वाले प्रोफेशनल्स की जरूरत है। IQVIA 2025 के अनुसार, AI और बायोसिमिलर्स के कारण 2025 में भारत में फार्मा नौकरियों में करीब 10% की वृद्धि दर्ज की गई। गणपत यूनिवर्सिटी में आयोजित ऐसे कार्यक्रम B.Pharm और M.Pharm छात्रों को R&D, क्लिनिकल ट्रायल्स और रेगुलेटरी अफेयर्स जैसे करियर विकल्पों के लिए तैयार करते हैं—जहां Sun Pharma और Dr. Reddy’s जैसी कंपनियों में अवसर मौजूद हैं।

यह व्याख्यान एक बार फिर साबित करता है कि गणपत यूनिवर्सिटी गुजरात के शीर्ष निजी फार्मेसी कॉलेजों में क्यों गिनी जाती है, जहां स्थानीय जड़ों के साथ वैश्विक स्तर की शिक्षा दी जाती है। कार्यक्रम के बाद छात्र वैश्विक स्वास्थ्य चुनौतियों से निपटने के लिए स्वदेशी नवाचार पर काम करने को प्रेरित नजर आए।

नोट: फार्मेसी एडमिशन 2026 या कार्यक्रम से जुड़ी अधिक जानकारी के लिए गणपत यूनिवर्सिटी की आधिकारिक वेबसाइट देखें।

एडइनबॉक्स टीम

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