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स्कूल से रिसर्च तक, भारत के भविष्य को तैयार करने की बड़ी योजना थी साल 2025 का शिक्षा बजट

स्कूल से रिसर्च तक, भारत के भविष्य को तैयार करने की बड़ी योजना थी साल 2025 का शिक्षा बजट

स्कूल से रिसर्च तक, भारत के भविष्य को तैयार करने की बड़ी योजना थी साल 2025 का शिक्षा बजट

साल 2025 की शुरुआत में सरकार के सामने सबसे बड़ा सवाल यह नहीं था कि शिक्षा में पैसा लगाया जाए या नहीं, बल्कि यह था कि यह निवेश कितनी स्पष्ट सोच और ठोस दिशा के साथ किया जाए। देश की बड़ी युवा आबादी, तेजी से बदलती तकनीक और वैश्विक स्तर पर कड़ी होती नौकरी की प्रतिस्पर्धा ने शिक्षा को नीति निर्धारण के केंद्र में ला खड़ा किया।

केंद्रीय बजट 2025 में सरकार ने इसी चुनौती का जवाब देने की कोशिश की है। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने शिक्षा को केवल सामाजिक खर्च नहीं, बल्कि देश के लिए रणनीतिक बुनियादी ढांचा बताते हुए शिक्षा मंत्रालय के लिए ा1,28,650 करोड़ रुपये का प्रावधान किया। यह राशि पिछले वर्ष की तुलना में करीब 6.22 प्रतिशत अधिक है। इस बजट का मकसद स्कूल से लेकर उच्च शिक्षा, रिसर्च, स्किलिंग और उद्योग को एक ही कड़ी में जोड़ना है।

सरकारी स्कूलों तक पहुंचेगा इंटरनेट

भारतनेट परियोजना के तहत देश के सभी सरकारी सेकेंडरी स्कूलों में ब्रॉडबैंड इंटरनेट सुविधा दी जाएगी। इससे गांव और दूरदराज के इलाकों के छात्र भी ऑनलाइन क्लास, डिजिटल किताबें और शैक्षणिक ऐप्स का लाभ उठा सकेंगे। सरकार का मानना है कि इससे शहर और गांव के छात्रों के बीच की खाई कम होगी और डिजिटल स्किल्स के जरिए रोजगार के नए रास्ते खुलेंगे।

अटल टिंकरिंग लैब से सीखेंगे प्रयोग करके

अगले पांच वर्षों में स्कूलों में 50,000 अटल टिंकरिंग लैब स्थापित की जाएंगी। इन लैब्स में छात्र विज्ञान, तकनीक, कोडिंग और रोबोटिक्स को सिर्फ किताबों में नहीं, बल्कि प्रयोग के जरिए सीख सकेंगे। खासकर छोटे शहरों और कस्बों के छात्रों के लिए यह व्यावहारिक सीख का बड़ा अवसर होगा।

भारतीय भाषाओं में डिजिटल पढ़ाई

भारतीय भाषा पुस्तक योजना के तहत भारतीय भाषाओं में डिजिटल पाठ्यपुस्तकें तैयार की जाएंगी। इससे उन छात्रों को बड़ी राहत मिलेगी, जिन्हें अंग्रेजी माध्यम में पढ़ाई करने में कठिनाई होती है। विशेषज्ञों के मुताबिक, मातृभाषा में पढ़ाई से विषयों की समझ बेहतर होती है।

स्कूल शिक्षा को अब तक का सबसे बड़ा सहारा

स्कूल शिक्षा के लिए इस बार अब तक का सबसे बड़ा बजट तय किया गया है। समग्र शिक्षा, पीएम-पोषण और पीएम-श्री जैसी योजनाओं को अतिरिक्त फंड मिलेगा। इससे स्कूलों के बुनियादी ढांचे, बच्चों के पोषण और शिक्षण संसाधनों में सुधार होने की उम्मीद है।

आईआईटी और मेडिकल शिक्षा का विस्तार

उच्च शिक्षा के स्तर पर भी बजट का असर दिखेगा। 2014 के बाद बने पांच आईआईटी में नए भवन और हॉस्टल बनाए जाएंगे, जिससे लगभग 6,500 अतिरिक्त छात्रों को दाखिले का मौका मिलेगा। आईआईटी पटना के बुनियादी ढांचे का भी विस्तार किया जाएगा।

इसके अलावा, सरकार ने अगले साल 10,000 नई मेडिकल सीटें जोड़ने का ऐलान किया है, जिससे स्वास्थ्य सेवाओं के लिए प्रशिक्षित डॉक्टरों की संख्या बढ़ेगी।

रिसर्च और स्किलिंग पर जोर

पीएम रिसर्च फेलोशिप योजना के तहत आईआईटी और आईआईएससी बेंगलुरु में पढ़ने वाले 10,000 छात्रों को शोध के लिए सहायता दी जाएगी। इससे छात्रों को देश में ही उच्च स्तर का रिसर्च करने का अवसर मिलेगा।

साथ ही, पांच नेशनल सेंटर ऑफ एक्सीलेंस इन स्किलिंग स्थापित किए जाएंगे, जहां अंतरराष्ट्रीय स्तर की ट्रेनिंग और सर्टिफिकेशन दी जाएगी।

शिक्षा में एआई और ज्ञान परंपरा का संरक्षण

शिक्षा के लिए 500 करोड़ रुपये की लागत से एआई सेंटर ऑफ एक्सीलेंस बनाया जाएगा, जहां पर्सनलाइज्ड लर्निंग और स्मार्ट एजुकेशन टूल्स पर काम होगा।

वहीं, ‘ज्ञान भारतम मिशन’ के तहत एक करोड़ से ज्यादा पांडुलिपियों को संरक्षित करने और एक नेशनल डिजिटल लाइब्रेरी बनाने की योजना है, जिससे भारत की प्राचीन ज्ञान परंपरा तक छात्रों और शोधकर्ताओं की आसान पहुंच होगी।

छात्रों के लिए क्या मायने रखता है यह बजट

बजट 2025 का संदेश साफ है—बेहतर स्कूल, ज्यादा सीटें, प्रैक्टिकल सीख, मजबूत रिसर्च और रोजगार से जुड़ी स्किल्स। सरकार शिक्षा को देश की आर्थिक और सामाजिक प्रगति की नींव मानकर आगे बढ़ रही है। आने वाले वर्षों में इसका सीधा असर छात्रों के अवसरों और भारत की वैश्विक प्रतिस्पर्धा पर देखने को मिल सकता है।

एडइनबॉक्स टीम

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