Edinbox Hindi
अमेरिका में विदेशी छात्रों के लिए बढ़ी सख्ती, स्टूडेंट वीज़ा नियम कड़े करने का बिल पेश

अमेरिका में विदेशी छात्रों के लिए बढ़ी सख्ती, स्टूडेंट वीज़ा नियम कड़े करने का बिल पेश

अमेरिका में विदेशी छात्रों के लिए बढ़ी सख्ती, स्टूडेंट वीज़ा नियम कड़े करने का बिल पेश

अमेरिका में विदेशी छात्रों को लेकर लगातार सख्त फैसले सामने आ रहे हैं। अब अमेरिकी संसद में ऐसा बिल पेश किया गया है, जिसके जरिए स्टूडेंट वीज़ा सिस्टम की निगरानी और नियमों को और कड़ा किया जाएगा। रिपब्लिकन पार्टी के सांसद ब्रैंडन गिल ने यह बिल पेश करते हुए दावा किया कि वीज़ा सिस्टम की कमियों की वजह से फर्जीवाड़े और वीज़ा ओवरस्टे के मामले बढ़े हैं, जिससे राष्ट्रीय सुरक्षा पर भी खतरा पैदा हुआ है। सांसद ने साफ कहा कि अमेरिका में पढ़ाई करना “अधिकार नहीं, बल्कि विशेषाधिकार” है, और इसी वजह से वीज़ा सिस्टम को सख्त बनाना जरूरी हो गया है।

क्या है ‘स्टूडेंट वीज़ा इंटीग्रिटी एक्ट’?

ब्रैंडन गिल द्वारा पेश किए गए इस बिल का नाम ‘स्टूडेंट वीज़ा इंटीग्रिटी एक्ट’ है। इसका उद्देश्य स्टूडेंट वीज़ा में पारदर्शिता और निगरानी को बढ़ाना है, ताकि फर्जी एडमिशन, वीज़ा दुरुपयोग और वीज़ा अवधि खत्म होने के बाद ओवरस्टे जैसे मुद्दों पर रोक लगाई जा सके। सांसद के मुताबिक वीज़ा प्रोग्राम में कई खामियां हैं, जिनका फायदा उठाकर फर्जी एजेंट और संस्थान सिस्टम का दुरुपयोग करते हैं।

बिल में क्या-क्या बदलाव प्रस्तावित हैं?

सांसद गिल के कार्यालय ने बिल के प्रमुख बिंदुओं की जानकारी दी है। इनके मुताबिक, प्रस्तावित बदलाव इस तरह हैं:

1. कोर्स खत्म होने की स्पष्ट तारीख तय की जाएगी

इस प्रावधान का उद्देश्य वीज़ा ओवरस्टे कम करना है। कोर्स की निश्चित समाप्ति तारीख के आधार पर वीज़ा अवधि तय होगी और किसी भी देरी पर निगरानी बढ़ेगी।

2. वीज़ा इंटरव्यू की शर्तें होंगी सख्त

ताकि केवल वही छात्र अमेरिका जा सकें जो वास्तव में पढ़ाई का इरादा रखते हैं और वीज़ा लेने का उद्देश्य स्पष्ट है।

3. कोर्स बदलने पर पाबंदी

बिल के अनुसार, छात्र अमेरिका में पढ़ाई शुरू करने के बाद किसी अन्य कोर्स में ट्रांसफर नहीं हो सकेंगे। यह कदम उन मामलों को रोकने के लिए है, जहां छात्र वीज़ा लेकर किसी दूसरे लाभ के लिए कोर्स बदल लेते हैं।

4. यूनिवर्सिटी और अधिकारियों पर सख्त कार्रवाई

यदि कोई संस्थान या अधिकारी वीज़ा प्रक्रिया में धोखाधड़ी करते हुए पाया जाता है, तो संबंधित अधिकारियों को जेल भेजा जा सकेगा, और विश्वविद्यालय को फेडरल स्टूडेंट वीज़ा प्रोग्राम से बाहर कर दिया जाएगा। इसका मतलब है कि ऐसी यूनिवर्सिटी विदेशी छात्रों को प्रवेश नहीं दे पाएंगी।

5. ‘शत्रु देशों’ के छात्रों पर प्रतिबंध

बिल में कहा गया है कि अमेरिका जिन देशों को शत्रु मानता है, उन देशों के नागरिकों को अमेरिकी संस्थानों में पढ़ने की अनुमति नहीं दी जाएगी।

क्यों चर्चा में है चीन और ईरान?

बिल में यह भी प्रस्ताव है कि अमेरिका की कॉलेज और यूनिवर्सिटी को चीन सरकार से अपने किसी भी वित्तीय या संस्थागत संबंध का खुलासा करना अनिवार्य होगा।

इसी सिलसिले में, अलबामा के रिपब्लिकन सीनेटर टॉमी ट्यूबरविले ने सीनेट में एक अलग बिल पेश किया है। उन्होंने चिंता जताई है कि चीन और ईरान जैसे देशों के छात्रों की बड़ी संख्या अमेरिकी यूनिवर्सिटी में मौजूद है, जो उनके अनुसार सुरक्षा जोखिम भी पैदा कर सकती है।

कुल मिलाकर क्या बदलेगा?

इस नए बिल से अमेरिका में विदेशी छात्रों, खासकर भारत, चीन, मध्य पूर्व के देशों और एशियाई देशों के छात्रों पर सीधा असर पड़ सकता है। यदि बिल पारित हो जाता है, तो वीज़ा इंटरव्यू कठिन हो सकते हैं, कोर्स बदलने के विकल्प सीमित हो जाएंगे, वीज़ा अवधि का उल्लंघन करने वालों पर कार्रवाई बढ़ेगी और कई विश्वविद्यालयों को भी सख्त शर्तों का सामना करना पड़ेगा।

एडइनबॉक्स टीम

Add comment

Recent posts

Most popular

Most discussed