
स्वामी विवेकानंद विश्वविद्यालय में मीडिया साक्षरता और नागरिक सहभागिता पर आयोजित अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन की शुरुआत हुई, जिसमें प्रो. उज्ज्वल चौधरी विशेष अतिथि के रूप में शामिल हुए। ग्लोबल मीडिया एजुकेशन काउंसिल (GMEC) के सचिव और एमिटी विश्वविद्यालयों के पूर्व डीन प्रो. चौधरी ने सुबह 10 बजे मुख्य वक्ता के रूप में संबोधित करते हुए डिजिटल दौर में मीडिया साक्षरता की बढ़ती जरूरत पर जोर दिया।
मीडिया साक्षरता नागरिकों की भागीदारी का आधार: प्रो. चौधरी
अपने संबोधन में प्रो. चौधरी ने कहा कि नागरिकों की सक्रिय भागीदारी के लिए मीडिया साक्षरता एक बेहद अहम तत्व है। उन्होंने चेताया कि इंटरनेट पर उपलब्ध भारी मात्रा में जानकारी कभी-कभी अच्छे-खासे जानकार लोगों को भी भ्रमित कर सकती है।
उन्होंने कहा कि आज के समय में आलोचनात्मक सोच की क्षमता विकसित करना बेहद जरूरी है। सही और विश्वसनीय स्रोतों की पहचान, भ्रामक जानकारी से बचाव और ऑनलाइन चर्चाओं में जिम्मेदार सहभागिता—ये सभी कौशल नागरिकों को लोकतांत्रिक प्रक्रिया में सक्रिय भूमिका निभाने में सक्षम बनाते हैं। मीडिया साक्षरता अब केवल एक अकादमिक विषय नहीं, बल्कि एक नागरिक जिम्मेदारी बन चुकी है।
शोध से लेकर व्यवहारिक उपयोग तक—सम्मेलन का उद्देश्य
शोधकर्ताओं, शिक्षाविदों और छात्रों की मौजूदगी वाले इस सम्मेलन का लक्ष्य मीडिया साक्षरता को शोध से निकालकर जमीनी स्तर पर लागू करना है। प्रो. चौधरी ने कई ऐसे प्रोजेक्ट्स का जिक्र किया जो छात्रों और शिक्षकों में मीडिया साक्षरता, डिजिटल नैतिकता और जिम्मेदार ऑनलाइन व्यवहार के प्रति जागरूकता बढ़ाने में मदद कर रहे हैं।
उन्होंने कहा कि यदि हम सूचित डिजिटल भागीदारी की संस्कृति विकसित करते हैं, तो इससे न केवल लोकतांत्रिक मूल्यों को मजबूती मिलेगी बल्कि समाज में संवाद की जिम्मेदारी भी बढ़ेगी।
वर्कशॉप्स में नए तरीकों पर होगा फोकस
आयोजकों के मुताबिक, सम्मेलन के दौरान होने वाली वर्कशॉप्स में नई शिक्षण पद्धतियों, संयुक्त शैक्षणिक परियोजनाओं और स्थानीय स्तर पर मीडिया साक्षरता को बढ़ावा देने के तरीकों पर चर्चा होगी।
इन सत्रों का उद्देश्य युवाओं को सुरक्षित इंटरनेट उपयोग के लिए जरूरी ज्ञान और व्यावहारिक उपकरण उपलब्ध कराना है।
डिजिटल युग में मीडिया साक्षरता की बढ़ती आवश्यकता
कार्यक्रम ने इस बात को रेखांकित किया कि सोशल मीडिया, डिजिटल प्लेटफॉर्म और ऑनलाइन कंटेंट आज लोगों की सोच और नागरिक भागीदारी को प्रभावित करने वाले प्रमुख माध्यम बन चुके हैं। शुरुआती वर्कशॉप में प्रतिभागियों को आलोचनात्मक सोच, जिम्मेदार इंटरनेट उपयोग और सक्रिय नागरिकता को बढ़ावा देने के कई उपयोगी सुझाव मिले।




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