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बिहार में छह नए फॉरेंसिक साइंस लैब स्थापित किए जाने की तैयारी, साइबर अपराध पर होगी तेज कार्रवाई

बिहार में छह नए फॉरेंसिक साइंस लैब स्थापित किए जाने की तैयारी, साइबर अपराध पर होगी तेज कार्रवाई

बिहार में छह नए फॉरेंसिक साइंस लैब स्थापित किए जाने की तैयारी, साइबर अपराध पर होगी तेज कार्रवाई

बिहार में अपराधियों के लिए अब बच निकलना पहले जैसा आसान नहीं होगा। राज्य सरकार जांच प्रणाली को हाईटेक और अधिक वैज्ञानिक बनाने की दिशा में तेजी से कदम बढ़ा रही है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के नेतृत्व में बिहार पुलिस को आधुनिक तकनीक से लैस करने की योजना के तहत छह नए फॉरेंसिक साइंस लैब (एफएसएल) स्थापित किए जाने की तैयारी है। इसके बाद साल के अंत तक राज्य में लगभग एक दर्जन फॉरेंसिक जांच केंद्र सक्रिय हो जाएंगे।

छह जिलों में शुरू होंगी नई लैब्स

सीआईडी के एडीजी पारसनाथ ने पुलिस मुख्यालय सरदार पटेल भवन में प्रेस वार्ता के दौरान बताया कि गयाजी, बेतिया, छपरा, मुंगेर, पूर्णिया और सहरसा में नए एफएसएल स्थापित किए जाएंगे। वर्तमान में पटना, मुजफ्फरपुर, भागलपुर और राजगीर में चार लैब काम कर रही हैं, जबकि दरभंगा और रोहतास में मार्च तक नए केंद्रों के शुरू होने की संभावना है।

साइबर अपराध पर मार्च से और सख्ती

एडीजी पारसनाथ ने बताया कि मार्च तक पटना और राजगीर स्थित एफएसएल में साइबर फॉरेंसिक यूनिट की शुरुआत हो जाएगी। इन यूनिट्स में डिजिटल साक्ष्यों की जांच आधुनिक तकनीकों से की जाएगी, जिससे ऑनलाइन ठगी, साइबर फ्रॉड और तकनीकी अपराधों में दोषियों की पहचान और गिरफ्तारी और तेज हो सकेगी।

नए आपराधिक कानूनों से बढ़ी फॉरेंसिक जांच की भूमिका

1 जुलाई 2024 से लागू भारतीय न्याय संहिता (BNS) सहित नए कानूनों में फॉरेंसिक रिपोर्ट को कई मामलों में अनिवार्य कर दिया गया है। विशेष रूप से ऐसे अपराध जिनमें सात वर्ष या उससे अधिक की सजा का प्रावधान है, उनमें डिजिटल और वैज्ञानिक साक्ष्य बेहद महत्वपूर्ण हो गए हैं। फॉरेंसिक रिपोर्ट अब अपराधियों को सजा दिलाने की निर्णायक कड़ी बनती जा रही है।

जांच क्षमता में तेज बढ़ोतरी

2024 में 1 जुलाई से 31 दिसंबर तक 5,141 मामलों के 25,285 नमूनों की फॉरेंसिक जांच पूरी की गई। वहीं 2025 में अब तक 10,995 मामलों के 56,511 नमूनों की जांच कर संबंधित एजेंसियों को रिपोर्ट सौंप दी गई है। इन आंकड़ों से साफ है कि बिहार में फॉरेंसिक जांच की क्षमता तेजी से बढ़ रही है।

डीएनए यूनिट और संसाधनों का विस्तार

मुजफ्फरपुर, भागलपुर और राजगीर के लिए तीन नई डीएनए यूनिट का प्रस्ताव गृह विभाग को भेजा गया है। पटना स्थित विधि विज्ञान प्रयोगशाला में भी अतिरिक्त डीएनए परीक्षण सुविधा विकसित करने की तैयारी चल रही है। उपकरणों और मशीनों के आधुनिकीकरण के लिए लगभग 162.93 करोड़ रुपये का प्रस्ताव भेजा गया है।

मानव संसाधन को भी किया जा रहा मजबूत

वर्तमान में राज्य की एफएसएल इकाइयों में 44 राजपत्रित पदाधिकारी और 85 वरीय वैज्ञानिक सहायक कार्यरत हैं। इसके अलावा 89 सहायक निदेशक और 100 वरीय वैज्ञानिक सहायकों की संविदा पर भर्ती प्रक्रिया अंतिम चरण में है। चयनित उम्मीदवारों के दस्तावेज सत्यापन और मेडिकल परीक्षण चल रहा है।

अत्याधुनिक भवन और चलंत फॉरेंसिक यूनिट

पटना के शास्त्रीनगर इलाके में सीआईडी को आवंटित कॉलोनी में एक आधुनिक फॉरेंसिक परिसर बनाने का प्रस्ताव भेजा गया है। राज्य के सभी 38 जिलों के लिए चलंत फॉरेंसिक यूनिट की मंजूरी मिल चुकी है। फिलहाल 51 चलंत फॉरेंसिक वाहन उपलब्ध हैं और 50 और वाहनों की खरीद के लिए 212 करोड़ रुपये का प्रस्ताव गृह विभाग को भेजा गया है।

नतीजा: अपराधियों के लिए मुश्किलें बढ़ेंगी

बिहार पुलिस की इस हाईटेक पहल से अपराध जांच प्रक्रिया तेज, पारदर्शी और अधिक वैज्ञानिक होगी। मजबूत फॉरेंसिक साक्ष्यों से न केवल अपराधियों की पहचान और गिरफ्तारी आसान होगी, बल्कि सजा की दर में भी बढ़ोतरी की उम्मीद है। इससे न्याय व्यवस्था पर आम लोगों का भरोसा और मजबूत होने की संभावना है।

एडइनबॉक्स टीम

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