
नेशनल बोर्ड ऑफ एग्जामिनेशन्स इन मेडिकल साइंसेज (NBEMS) के NEET PG 2025 एडमिशन से जुड़े एक फैसले ने देशभर में बहस छेड़ दी है। राउंड-2 काउंसलिंग के बाद NBEMS ने सभी कैटेगरी के लिए क्वालिफाइंग परसेंटाइल में बड़ी कटौती कर दी है। इस कदम के बाद सोशल मीडिया से लेकर मेडिकल समुदाय तक नाराजगी देखने को मिल रही है। मामला अब सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच गया है, जहां NBEMS के इस फैसले को चुनौती दी गई है।
सुप्रीम कोर्ट पहुंचा मामला
NEET PG 2025 की कटऑफ घटाने के खिलाफ जनहित याचिका (PIL) दायर की गई है। यह याचिका सोशल वर्कर हरिशरण देवगन, सौरभ कुमार, यूनाइटेड डॉक्टर्स फ्रंट के डॉक्टर लक्ष्य मित्तल और वर्ल्ड मेडिकल एसोसिएशन के सदस्य डॉक्टर आकाश सोनी की ओर से दाखिल की गई है। याचिका में कहा गया है कि इतनी कम परसेंटाइल पर दाखिले की अनुमति देना मेडिकल शिक्षा की गुणवत्ता और मरीजों की सुरक्षा दोनों के लिए गंभीर खतरा हो सकता है।
सोशल मीडिया पर खुलकर बोले डॉक्टर लक्ष्य मित्तल
डॉक्टर लक्ष्य मित्तल लगातार इस फैसले के खिलाफ सोशल मीडिया पर सवाल उठा रहे हैं। उन्होंने एक्स (पूर्व में ट्विटर) और इंस्टाग्राम पर पोस्ट और वीडियो के जरिए कहा कि मेडिकल सिर्फ एक करियर नहीं, बल्कि सीधे इंसानी जिंदगी से जुड़ा पेशा है। उनका आरोप है कि NBEMS का यह फैसला मेडिकल शिक्षा के मानकों को कमजोर करता है और इसका सबसे ज्यादा फायदा निजी मेडिकल कॉलेजों को पहुंचाने के लिए किया गया है।
क्यों घटाई गई NEET PG 2025 की कटऑफ?
NBEMS ने यह फैसला राउंड-2 काउंसलिंग के बाद लिया। बोर्ड के अनुसार, देशभर के सरकारी और निजी मेडिकल कॉलेजों में 18,000 से ज्यादा PG सीटें खाली रह गई थीं। इन्हीं सीटों को भरने के लिए सभी कैटेगरी में क्वालिफाइंग परसेंटाइल कम की गई।
नए बदलाव के तहत:
– EWS कैटेगरी के लिए क्वालिफाइंग परसेंटाइल 50 से घटाकर 7 कर दी गई है।
– जनरल PwBD कैटेगरी में कटऑफ 45 से घटाकर 5 परसेंटाइल कर दी गई है।
– SC, ST और OBC वर्ग के लिए भी क्वालिफाइंग परसेंटाइल में भारी कटौती की गई है।
इस फैसले को लेकर सबसे ज्यादा आपत्ति इसी बात पर जताई जा रही है कि बहुत कम स्कोर वाले उम्मीदवारों को भी PG मेडिकल कोर्स में प्रवेश का रास्ता मिल सकता है।
परसेंटाइल घटने से क्या खतरे बताए जा रहे हैं?
सोशल मीडिया और मेडिकल एक्सपर्ट्स के बीच इस मुद्दे पर कई सवाल उठाए जा रहे हैं—
शिक्षा की गुणवत्ता पर असर: बेहद कम स्कोर पर एडमिशन से मेडिकल एजुकेशन का स्तर गिर सकता है।
मरीजों की सुरक्षा: कमजोर अकादमिक बैकग्राउंड वाले डॉक्टरों की एंट्री से पेशेंट सेफ्टी पर खतरा बढ़ने की आशंका जताई जा रही है।
मेरिट से समझौता: मेहनत कर ज्यादा स्कोर लाने वाले छात्रों के साथ अन्याय की भावना पैदा होगी।
सिस्टम पर भरोसा: एग्जाम और सेलेक्शन प्रोसेस की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े होंगे।
NEET PG सीटों की मौजूदा स्थिति
भारत में NEET PG सीटों की संख्या में पिछले कुछ वर्षों में लगातार बढ़ोतरी हुई है। 2021 से 2025 के बीच PG मेडिकल सीटें बढ़कर लगभग 80,000 के करीब पहुंच गई हैं। हर साल करीब 2.4 लाख उम्मीदवार NEET PG परीक्षा के लिए आवेदन करते हैं, जिनमें से लगभग 1 लाख उम्मीदवार क्वालिफाई करते हैं। इसके बावजूद बड़ी संख्या में सीटें खाली रह जाना सिस्टम की एक बड़ी चुनौती बना हुआ है।
आगे क्या?
अब सभी की नजर सुप्रीम कोर्ट पर टिकी है। अदालत यह तय करेगी कि NBEMS का यह फैसला छात्रों और मेडिकल सिस्टम के हित में है या नहीं। यह मामला सिर्फ एडमिशन प्रक्रिया का नहीं, बल्कि देश में मेडिकल शिक्षा की गुणवत्ता और भविष्य के डॉक्टरों की तैयारी से भी जुड़ा हुआ है।




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